सुमन से मुलाकात भाग 1 🤤

मैं कोटा से राजेन्द्र फिर से आपके सामने अपनी एक रीयल सेक्स कहानी लेकर सामने आया हूं। मेरी कहानी सुमन से मुलाकात तब शुरू हुई कब मैं किसी सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ था जिसके लिए मुझे पाली भेजा गया था। ये अन्तर्वासना कहानी पाली की एक औरत की हे जिसने मुझे अपनी ऐसी यादें दी जो भुलाई तो नहीं जा सकती मगर जिनको दुबारा जीना भी संभव नहीं।

मैं जब वहा अपने काम से गांव मैं जाया करता था तो मुझे मेरे कई लोकल सहकर्मी के वहा रात रुकना पड़ता था। क्यो ऐसे
गांव में कोई होटल या सराय नही होती थी। मैं मेरे एक सहकर्मी रमेश के साथ कई बार उसके गांव गया जो
पाली से 70 किलोमीटर था।

ससुरजी और बहू की कमर तोड़ चुदाई

वहा से और अंदर जाकर कई चोट गांव में हमारे कैंप थे इसके लिए मुझे वहा रुकना
पड़ता था। मेरे ग्रुप मैं कई लड़कियां भी थी जो अलग अलग गांव से था। मगर में उन सबको अपने बच्चों को
तरह रखता था क्योंकि जो भी हो आखिर वो है तो मुझे उमर में कम।

मेरी एक ऑपरेटर थी सरोज और नीतू जो बहुत दूर के गांव से आती थीं ओर वहा से दिन में बस एक बस आती ओर जाती थी। तो वह बीच के गांव में रुकती थी जहां उसकी चाची का घर था।
नीतू की चाची जवान थी और उसका घर बहुत बड़ा था तो नीतू ने कहा सर आप कुछ दिन गांव में रह लो में चाची के वहा आपको ठहरा दूंगी।

मेने मना कर दिया मगर में कुछ ही दिन में रोजाना अप डाउन करके परेशान हो गया और शनिवार को सरोज ओर नीतू और पास के गांव के कुछ लड़के बोले सर आप आज यही रुको कल आपको घाटी वाले महादेव लेके चलेंगे जो वही कही पहाड़ी पर था जिसके चारों तरफ कोई बरसाती नदी चक्कर लगाती है। हम सब बस से नीतू की चाची के घर आ गए। जब तक अंधेरा हो गया था।

मम्मी अंकल गोलमाल !!

गांव में ज्यादा रोशनी तो होती नही वैसे भी आदिवासी गांव में तो ना के बराबर। नीतू नई मुझे अपने चाचासे
मिलवाया जो 40 के आसपास के बड़ी बड़ी मूंछों वाले दुबले मर्द थे। नीतू की चाची मुझे नजर नहीं आई मगर इक
औरत घर का काम कर रहीं थी मगर देखने से मुझे नही लगा ये इनकी पत्नी होगी।

वैसे भी रात को में उनका चेहरा नहीं देख पाया कुछ देर 9 बजे तक खाना बन गया। खाना खाकर में चारपाई पर ही सो गया सुबह मालाराम जल्दी ही बाइक से a गया ओर मुझे उठाने लगा। मालाराम भी मेरा ऑपरेटर था जो पास के गांव से
था।

में सुबह जंगल मतलब फ्रेश होकर नदी पर चले गए जहा हम नहाए। गांव के माहोल में मुझे बहुत अच्छा लग
रहा था। फिर हम खेत मे आ गए जहा हरियाली ही हरियाली थी आज वैसे भी रविवार था। मैने वहा एक औरत को
देखा जो काफी सुंदर नैन नक्श को थी। मे उसे ही देखे जा रहा था और उसने भी मुझे ताड़ते हुए देख लिया। हमारी
निगाहें कई बार मिली। उसके बारे मे बताऊं वो दुबली पतली तीखे नैन नक्श की थी उसका जिस्म भरा हुआ था।

बिटिया रानी की चुदाई

मैने मालाराम से कहा ये कोन हे मालाराम बोला चाची हे आपने नही पहचाना क्या। मालाराम ने कहा सर मंदिर
चलते है उसने दो बाइक का इंतजाम किया। एक बाइक मैने चलाई मालाराम के साथ नीतू और सरोज बैठ गई। नीतू
बोली चाची तू भी चल तो चाची भी तयार हो गई। तीनों ने चाची को मेरे साथ बैठा दिया।

अपना लंड खड़ा करने के लिए हमें इंस्टाग्राम पर फॉलो करे !!

follow antarvasnastory on instagram

मुझे तो जैसे कोई करंट सा लगा। मेने ऐसा नही सोचा था। अब आप जानते हो कितना भी बचने की कोसिस करो गांव की सड़के चिपका ही देती है।

सुमन ने पहले मेरी शर्ट पकड़ी फिर मैने कहा तो उसने कंधे पर हाथ रख लिया। हमारी आंखे ओर बदन तो जैसे एक दूसरे
से बात चुपके से कर रहे थे। हम रात होते होते गांव आ गए अभी तक नीतू के चाचा नही आए थे। आज हम सबने साथ
बैठ कर खाना खाया। अगले दिन में वापस अपने काम पर आ गया मगर अब नीतू के साथ उसकी चाची भी आने लगी थी।
एक दिन मैने सुमन से कहा आप कितना काम करती हो खेत घर सब केसे हो पाता है।

मम्मी पड़ोस के पहलवान अंकल से चुदवाती थी

सुमन बोली ये तो आप सोचते हे वरना मेरी किसे परवाह नीतू के चाचा रात रात भर बाहर ही पड़े रहते है और मेरी कोई नही सोचता। मेने कहा ऐसा भी क्या हमसे कहो तो सही हम हे ना। सुमन ने कहा ऐसा हे क्या तभी तो हमे बुलाते हो आप नही आ सकते गांव मे रोजाना आती अच्छी लागू। इतने में मैंने उसके हाथ पे हाथ रख दिया तो उसने कहा सबर नही कल खाने के समय आना।

मैने वहा ज्यादा बात नही को और अगले दिन 12 बजे ही गांव को निकल गया। जैसे सुमन मेरा ही इंतजार कर रही थी। मैने घर में जाते ही हम ने साथ खाना खाया ओर मैने सीधा उसे पकड़ लिया सुमन बोली रुको अंदर खलिहान वाले कोठी मे चलो में आई।

उसने मुझे रास्ता बताया घर के पीछे कोने से खेत को तरफ को एक कमरा था जहा धान आदि रखा था। कुछ देर में
जैसे ही सुमन आई मेने उसे पकड़ कर दीवार से चिपका दिया उसके कपड़ो से मिट्टी की महक आ रही थी जो मुझे बहुत
उत्तेजित कर रही थी।

नंगी चुदाई हिंदी में

उसके होटों को चूमने लगा वो भी मेरा साथ देने लगी इसके बूब्स मेरी मुट्ठी में भी नही आ रहे थे। में किस करते हुए चोली मे से बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा। सुमन भी कम नही थी वो तो जोर से सिसकारी करने लगी ओर मेरे हथियार को टटोलने लगी। मेने उसके बूब्स आजाद कर दिए और घाघरा ऊंचा कर गोदी मे उठा लिया। उसने अंदर कुछ नही पहना था। इस तरह मेरी xxx sex story की शुरुआत हुई और मेने सुमन को अपने बच्चे की माँ मनाने का सोच लिया।

मैने अपना लंड निकाल कर उसे चूसने को बोला तो वो नही मानी। में नीचे बैठ गया ओर
उसकी दरार मे मुंह लगा दिया जिस से वो उछल पड़ी। हम वहा गेहूं पर ही लेट गए वो मैने उसको सीधा किया ओर
उसकी दरार मे सीधा चोट कर दी जिस से वो चिल्ला पड़ी मारोगे क्या। फट गई मुन्नी मेरी अब तो मुझे रहा नही जा राहा
था।

स्त्री और समाज-3

हम दोनो बिना कपड़ो के एक दूसरे मे खो जाने को लड़ाई लड़ रहे थे। जैसा की आपको पता में सेक्स के समय बहुत
जंगली हूं। सुमन को मे जोर जोर से बजाता रहा ओर 10 मिनट तक चोदता रहा।

उसके बाद मैने उसे घोड़ी बनाया ओर पेलने लगा। सुमन जोर जोर से आह आह चिल्ला रही थी गांव की औरत बहुत मज़ा देती है। अब मेरा आखरी टाइम आने को था तो मैने उसे गोद मे उठा सीधा 69 मे चोदने लगा और पानी मुँह मे निकाल और दूसरी तरफ उसने भी अपनी चुत का रस मेरे मुँह में निकाला। दिया फिर हमने कपड़े पहने ओर हम वापस घर के आंगन की तरफ आ गए।

फिर मैने इसे जाने को कहा और वापस काम पर आ गया। इसके बाद भी मैने सुमन को चोदा वो में आपको अगले भाग मे बताऊंगा। आप अपने विचार मुझे ओर मेरी चुदाई कहानी कैसी लगी मुझे मेल पर बताए।
[email protected] आपका राजेन्द्र।

error: Content is protected !!