स्त्री और समाज-3

हैलो दोस्तों कैसे है आप लोग? उम्मीद करती हूँ आप लोग स्वस्थ और खुश होंगे । अब मैं स्त्री और समाज भाग -3 पर आती हूँ। यदि आपने स्त्री और समाज का पहला भाग और दूसरा भाग नहीं पढ़ा तो पहले आप उसे पढ़ लीजिए जिससे आपको यह भाग पढ़ने बहुत आनंद आएगा और परिस्थितियों को समझ पाएंगे। चलिए अब मैं शुरू करती हूँ।

पिछले भाग में आपने देखा कि मैं और स्नेहा दीपक के घर मे रहने आये हैं। और कुछ ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न
हुई जिससे स्नेहा को मेरी बहन और मुझे दीपक की पत्नी होने का नाटक करना पड़ रहा हैं। हम लोग रिया जो मेरी
पड़ोसी हैं उसके यहाँ डिनर करने आये हैं।

उसने हमें उसके पति से मिलवाया जिसे देख कर मुझे शॉक सा लगा वह और कोई नहीं मेरा कॉलेज के दिनों का आशिक था। कॉलेज में हम दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे। लेकिन कुछ कारणों से हम एक दूसरे की antarvasna पूरी नहीं कर पा रहे थे जिसका जिक्र मैंने भाग-1 में करी हूँ। वो भी मुझे देखकर एक दम से हिल गया। मुझे यकीन नहीं हो रहा था वो मेरे सामने खड़ा है। फिर नॉर्मली हाय हैलो हुआ और हम डिनर करने लगे।

डिनर करते हुए राहुल बार-बार मेरी तरफ देख रहा था। दीपक बोल रहा था राहुल और मैं बहुत अच्छे दोस्त बन गए हैं
यही कोई 7-8 महीने पहले ये लोग शिफ्ट हुए हैं लगता है अब तुम दोनों भी अच्छी दोस्त बन जाओगी क्यों मेरी
जान सही कहा न? और मेरे कंधे पर अपना कंधा टकराया। दीपक मुझे टच करने और छेड़खानी करने का कोई
मौका नहीं छोड़ रहा था।

मुझे अच्छा नहीं लगता लेकिन मैं भी क्या कर सकती थी बस शांत रह सकती थी। मैंने अपने गुस्से को संभाला और हल्की सी स्माइल दी और कहा जी बिल्कुल आप सही बोल रहे हैं। फिर रिया, राहुल को बता रही थी मेरी और दीपक की लव मैरिज हुई हैं दोंनो कॉलेज से ही एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं ये बात
सुनकर एक दम राहुल के गले खाना अटक गया।

क्योंकि उसको मालूम था मेरे साथ कॉलेज में मै उससे प्यार करती थी। फिर दीपक का डिनर हो गया और वो उठ गया रिया का भी हो गया और वो भी सामान रखने चली
गयी। मुझे अकेला पाके राहुल ने मुझसे पूछा – ओ तो ये हैं तुम्हारा पति और तुमने रिया से झूठ क्यो बोला कि
तुम्हारी लव मेर्रिज हुयी है।

अब मैं उसको कैसे समझाती की वो मेरा पति नहीं हैं और ये सब बस एक प्रकार का नाटक हैं। मैंने उससे कहा दीपक ने उससे पहले ही बता दिया था कि लव मैरिज हुई है इसीलिये मैंने भी रिया को वही बोली । फिर मैं डिनर खत्म करके वहाँ से उठ गयी। फिर हमनें कुछ देर बातचीत की।

राहुल को देखकर ऐसा लग रहा था वो खुश हैं और मुझे भुला चुका है। मैं ख़ुश भी थी और अजीब सा दुःख भी लग रहा था कि वो किसी
और के साथ हैं। क्योंकि मैं कहीं न कहीं आज भी उससे थोड़ा बहुत प्यार जरूर करती थी।

फिर मैंने दीपक से बोली सुनिए जी स्नेहा भी घर पर आ गई होगी, हम लोग भी चलते हैं फिर हमने विदा ली और घर आ गये।
मैं घर आकर सोच रही थी वो अपने1 आप को थोड़ा संभाले और अपनी लिमिट में रहे, लेकिन उसको समझाने
का कोई फायदा नहीं होता और तो हम उसी के घर में रह रहे हैं उसी के घर का खाना पानी पी रहे हैं।

मैं मेरे रूम में जाकर रमेश को फ़ोन लगायी और उससे बात की लेक़िन वो काम से आकर थक गया हूँ बोल रहे थे इसीलिए
ज्यादा बात नहीं हो पायी। स्नेहा भी रूम में ही थीं और भाभी कैसा रहा डिनर ? मैंने बोली ठीक था। फिर वह हँसते
हुए बोली- जीजू आपका ख्याल तो रख रहे हैं ना दीदी? मैंने बोली, क्या कह रही हो तुम। उसने बोली- मै यह बोल
रही हूँ कि आपके नये पति आपको ख़ुश रख रहे हैं या नहीं । मैंने उसको बोली पागल हो गयी हो क्या तुम कैसी
बातें कर रही हो ? मैं तुम्हारे भाई की बीवी हूँ। फिर वह बोली- अरे भाभी मैं तो मज़ाक कर रही हूँ मुझे पता है आप

भैया से कितना प्यार करती हैं आप भैया को कभी धोखा नहीं देंगी। फिर मैंने कही बहुत हो गयी बातें मुझे नींद आ
रहीं हैं चल अब सो जाते हैं। मेरे दिमाग़ में स्नेहा की कही बातें घूम रही थी और हम लोग सो गये।

दोस्तों मेरी फॅमिली सेक्स कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद मैं वादा करती हूँ इसी करहा की और चुदाई की सेक्सी कहानिया आपके लिए यहाँ लेकर आती रहूगी। इसलिए इस वेबसाइट पर बने रहे।

अब 2-3 सप्ताह बीत गए थे। मेरी रोज की जिंदगी अब नॉर्मल सी हो गयी थी। रोज सुबह उठ के चाय नाश्ता खाना
बनाओ दोपहर पड़ोस वाली सहेलियों से टाइम पास करती थी और फिर शाम को खाना बनाके खाना खाने के बाद कुछ
देर टीवी देखकर रात को सो जाती थी।

घर में सभी लोग अपने असली रिश्ते भूल ही चुके थे स्नेहा मुझे अब हमेशा दीदी कहकर ही बुलाती थी दीपक भी मुझे सोनाली नाम ही पुकार कर बुलाता था। मुझे भी इन सब की आदत हो गयी थी।
रमेश से भी मेरी बात न के बराबर होती थी वह अपने काम मे बिजी रहता था न मेरा फ़ोन उठाता और न ही मुझे कॉल
करता। अब तक हमने एक दो ही बार बात की थी शिफ्ट होने के बाद।

अब मैं भी रमेश को उतना याद नहीं करती थी।
मैंने भी खुद को माहौल के हिसाब से अपने आप को ढाल लिया था। दीपक अब भी मुझे छेड़ा करता था लेकिन मुझे
इसकी आदत हो गयी थी दीपक मुझे हमेशा ताड़ा करता करता था वह मेरे बूब्स और मेरी गांड को देखता रहता था मैं
हमेशा साड़ी में रहती थी मेरे ब्लाउज भी मॉडर्न डिज़ाइन के थे पीछे से बैकलेस और सामने से गहरे गले के।

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मेरे बूब्स का साइज भी बड़ा है जिससे आधे हमेशा निकले रहते हैं मैं कितना भी उन्हें छुपाने की कोशिश करती लेक़िन छुपा नहीं
पाती। दीपक का मुझे ताड़ना रोज़ का काम था। इसलिए मैं ज्यादा दिमाग़ में नहीं लेती थीं।

एक दिन रिया और राहुल आये उनका बाहर घूमने और मूवी देखने का प्लान था। उन्होंने दीपक से कहा तुम लोग भी
साथ चलो। दीपक ने बिना मुझसे पूछे हाँ कर दी। मेरा जाने का कोई इरादा नहीं था लेकिन मुझे जाना पड़ा। रिया और
राहुल उनकी बाइक में, और दीपक मैं दीपक की बाइक में थे। राहुल और दीपक बाइक एक दूसरे के आजु बाजू पास पास
चला रहे थे। रिया राहुल को कसकर बैठी थीं रिया ने टॉप जो कमर से खुला हुआ था और जीन्स पहनी हुई थी वह
बिलकुल स्लिम और इसके भी ज्यादा बड़े नहीं थे वो एक दम कॉलेज गर्ल लग रही थी।

वह बीच बीच में राहुल की जांघो को सहलाती , उसकी गर्दन पर किस करती। एक प्रकार से वो हमें जेलस फील करना चाहती कि हम कितने रोमांटिक है।
हो सकता हो ये राहुल का ही हो मुझे जेलस कराने का। दीपक भी यह सब देख रहा था वह मुझसे कहता देख रही
सोनाली दोनों कितने मज़े कर रहे हैं लग रहा हैं वो लोग हमें जलाने कर रहे हैं हमे भी करना चाहिए ।

मैंने बोली मैं कुछ नहीं करूँगी। फिर वह बोला अरे नहीं करना है तो मत करो। कम से कम अच्छे से तो बैठ जाओ वहाँ कहा पीछे पकड़कर
बैठी हो सामने हाथ रखो। फिर मैंने दीपक के कंधे पर हाथ रखी और और उन लोगों को देख रही थी। उन को देखकर मुझे
भी कुछ कुछ होने लगा था। कहि न कहीं मुझे जलन सी हो रही थी। मैंने साड़ी पहनी हुई थी। मैंने पल्लू को हल्का सा
साइड किया किया जिससे मेरे बूब्स दिखने लगे।

जैसे ही गड्ढे ब्रेकर आते मेरे बूब्स बाहर आने को होते बूब्स बहुत उछलते। राहुल की नज़र मेरे बूब्स पर पड़ गयी थी वह बार बार मुड़कर मेरे देखता उसने अपने राइट साइड का मिरर भी ठीक किया मैं समझ गयी कि अब वह मुझे मिरर से देख रहा है। दीपक ने भी अपनी बाइक के साइड मिरर देख लिया
था कि मेरे आधे बूब्स दिख रहे हैं। अब वह बार बार ब्रेक लगाकर बाइक चला रहा था। जैसे ही वो ब्रेक लगाता मैं आगे
कीऔर जाती और मेरे उसके पीठ से टकराते। मैंने उससे पूछी गाड़ी कैसी चला रहे हो वह बोला शॉक अप में शायद
प्रॉब्लम आ गयी है एक काम करो तुम मेरी कमर में हाथ बाँध कर बैठ जाओ।

मुझे पता था वो ऐसा क्यों कर रहा हैं। पर मैं भी दीपक को जलाना चाहती थी। और मैने सोची दीपक हमारी इतनी मदद करता है तो थोड़े बहुत मज़े वो ले भी
लेता है तो इसमें बुराई क्या है। मैं आगे की ओर खिसकी और उसकी कमर हाथ बांधकर बैठी ।दीपक थोड़ा सरप्राइज
हुआ उसको शायद लगा नहीं था मैं उसकी बात मानुगी।

अब मेरे बूब्स उसकी पीठ से चिपके हुए थे। मेरा सिर उसके कंधे पर था। फिर उसने एक दम से स्पीड बढ़ायी और बाइक आगे ले गया और फिर वही ब्रेक लगा लगा कर गाड़ी का चलाता। जब वो ब्रेक लगाता मैं आगे की और जाती मेरे बूब्स और दबते। मुझे ख़ुद से बहुत नफरत हो रही थी कि मेरे
शरीर को ये सब आनन्दमय लग रहा था। मेंरी चूत गीली हो चुकी थी। फिर हम मूवी कॉम्प्लेक्स के सामने रुके और अंदर
इंग्लिश हॉलीवुड मूवी लगी थी इंग्लिश मूवी होने के कारण भीड़ भी कम थी।

मूवी में जब भी कोई किसिंग सीन आता मैं एक्साइट हो जाती मेरी सांसे तेज़ चलने लगती । रिया और राहुल तो मूवी में कम एक दूसरे में ज्यादा बिजी थे एक दूसरे
को किश कर रह थे राहुल तो रिया के टॉप में हाथ डालकर बूब्स दबा रहा था।

दीपक का पूरा ध्यान मूवी पर था वह मूवी के मज़े ले रहा था औऱ अपने एक हाथ से पेंट के ऊपर से ही लंड सहला रहा था पेंट के ऊपर से उसका लण्ड खाफी बड़ा
लग रहा था फ़िर वह उठ के बाथरूम चला गया। मैं समझ गयी वह बाथरूम किसलिये गया हैं। मैं खुद को लकी समझ

रही थी उसका ध्यान मुझ पे नहीं गया नहीं तो मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि चाहकर भी उसको रोक नहीं पाती। फिर
हम हॉटेल में डिनर करके घर आ गये। कुछ दिन बाद दीपक का फ़ोन आया कि मेरे पिता जी का एक्सीडेंट हो गया है औऱ वो अपने शहर के हॉस्पिटल में भर्ती हैं
तुम दोपहर में रेडी रहना मै तुमको पिकअप कर लूंगा।

मैं बहुत डर गयी थी पिताजी को एक्सीडेंट कैसे हो गया वो ठीक तो है ना मैं परेशान हो रहीं थीं दोपहर में दीपक आके मुझे हॉस्पिटल ले गया मैंने उनके हाल चाल के बारे में पूछी और
पूछी एक्सीडेंट कैसे हुआ उन्होंने कहा कुछ नहीं छोटा सा एक्सीडेंट हैं पैर में हल्का सा फ्रैक्चर है डॉक्टर ने कहा हैं जल्द
ही ठीक हो जाएगा औऱ बताओ बेटी तुम कैसी हो। दीपक ने बताया कि तुम लोग उसके यहाँ किराये से रहते हों। मैं खुश
थीं कि दीपक ने ये नहीं बताया मैं उसके यहाँ किराएदार नहीं उसकी बीवी बनकर रहती हूँ नहीं तो पापा मेरे बारे में
क्या सोचते।

मैंने पापा से कहा मै ख़ुश हूँ और मुझे दीपक के यहाँ कोई परेशानी नहीं हैं। मेरे भाई के एग्जाम थे तो वो
वापिस घर चला गया । पापा हॉस्पिटल में 10 दिन तक एडमिट रहे तब दीपक ने उनकी खूब मदद की उनकी दवाईयाँ,
देखरेख सब दीपक ने अच्छे से किया।

पापा भी दीपक से ख़ुश थे। फिर पापा वापस गांव चले गये। मन ही मन दीपक को कितना ग़लत समझ रही थीं वह तो दिल का बहुत अच्छा निकला।
अब में घर में पहले से ज्यादा कम्फ़र्टेबल महसूस कर रहीं थीं। मैं अब घर में साड़ी के साथ साथ नाइटी, गाउन, और
सलवार सूट पहनकर घुमती औऱ काम करती।

दीपक का मुझे छेड़ना अच्छा लगने लगा था, कई बार वो डबल मीनिंग वाले जोक मारता मैं हल्की सी स्माइल देकर चली जाती। मैं भी कई बार उसको टिपिकल वाइफ की तरह डाँटती, उससे बात करती। मैं अब अच्छे से सजती-संवरती, मेकअप करती। एक बार दीपक ने मुझसे कहा तुम तो बहुत हॉट लग रहीं
हो मैंने बोली – थैंक्स माय डियर हसबैंड! वह मेरी बातें सुनकर हैरान हुआ और बोला तुम इतना सजती संवरती किसके
लिए हो, मैं बोली आपके लिए पतिदेव! वह हैरानी से खुश होके बोला- सच मे! मैंने हँसते हुए बोली- हाँ, आपके लिए
ताकि लोगो को लगे कि आप अपनी बीवी का कितना ख्याल रखते हैं।

और लोगों को लगे हम अच्छे हसबैंड वाइफ है।वह बोला अच्छा ऐसा है क्या मैं बोली हाँ जी। फिर वह उदास होकर चला गया। मुझे भी दीपक को छेड़ने में मज़ा आता था। मैं उसकी बीवी होने का नाटक करते करते सच में उसकी बीवी जैसा महसूस करने लगी थीं ।

रमेश को तो मैं भूल ही चुकी थी अब उसका एक भी कॉल नहीं आता था और न ही मैं करती क्योंकि वो मेरा कॉल उठाता नहीं था। और जिस
तरह से दीपक ने मेरे पापा की सेवा की मैं उससे इम्प्रेस थीं। कई बार मै छुपके से दीपक को नहाते हुए कपड़े बदलते हुए
देखती , मैं तो बिलकुल गर्म हो जाती और मेरी चूत गीली हो जाती । क्योंकि दीपक की बॉडी एक दम फिट हैं और मैंने
भी 3-4 महीनों से सेक्स का आनंद नहीं ली हूँ।

कुछ दिन बाद दीपक का बर्थडे आया। उस दिन स्नेहा की कॉलेज ट्रिप थी तो वह चली गयी । दीपक ने उस दिन बर्थडे
पार्टी अरेंज की। दीपक ने कहा सोसाइटी के लगभग सभी लोग आएंगे।

तुम अच्छे से तैयार होना , बहुत सारे लोग होंगे इसलिए अच्छे से गुड वाइफ होने का नाटक करना। मैंने कही ठीक है। शाम को मैंने ब्लैक कलर की बैकलेस ब्लाउज
पहनी जिससे मेरी गोरी, चिकनी पीठ साफ दिख रही थी सामने से ब्लाउज डिज़ाइन ऐसा था कि मेरे आधे बूब्स साफ
दिखते थे। ऊपर से मैंने रेड कलर की नेट वाली साड़ी पहनी थी जिससे आरपार आसानी से दिखता था।

पल्लू डालने पर भी मेरे बूब्स दिख रहे थे। औऱ मैंने रेड कलर की डार्क लिपस्टिक लगाई थी। सब कुछ कॉम्बिनेशन के हिसाब से था। मैं
तैयार होकर आयी तो दीपक ने मुझे देखकर कहा तुम तो एक दम सेक्सी बॉम्ब लग रही हो। मैंने उससे कहीं कुछ भी!
फिर हम लोग गेस्ट लोग से मिलने लगे।

लोगो की नज़र दीपक से मुझ पर थी दीपक शायद सही कह रहा था मैं सेक्सी लग रही हूँ। तभी लोग हवसी नज़रो से देख रहे थे और घूर रहे थे। कई लोगो ने भीड़ का फायदा उठाकर मुझे छुआ भी। मेरी गांड दबाते, पीठ सहलाते, कुछ ने तो मेरे बूब्स को भी छुआ। सच में कहीं पर भी चले जाओ समाज की मानसिकता
में कोई परिवर्तन नहीं आता। फिर दीपक ने केक काटा लोगों खाना खाया डांस किया फिर सब लोग चले गए।
अब घर में सिर्फ मैं और दीपक ही थे ।

दीपक नशे में था वह मुझसे बोला सोनाली तुमने मुझे विश नही की। मैंने बोली सॉरी मुझे ध्यान नहीं रहा । अब बोल देती हूँ- हैप्पी बर्थडे टू यू दीपक जी ! औऱ फिर बोला मेरा गिफ्ट? मैंने बोली मेरे पास अभी देने के लिए कुछ नहीं है। वह बोला नहीं! मुझे अभी चाहिए। मैंने कही मैं नहीं दे सकती कुछ भी। वह बोला
मेरा बर्थडे आज मुझे आज ही मेरा गिफ्ट चाहिए। मैंने बोली मेरे पास कुछ नहीं हैं। वो बोला नहीं तुम दे सकती हो। मैंने
पूछी क्या दे सकती हूँ? वह बोला जो मैं कहता हूँ वह तुम्हें करना होगा। मैं थोड़े शॉक में आकर बोली क्या करना होगा

।उसने तुमको बस मेरे साथ बैठ के ड्रिंक लेनी पड़ेगी। मैंने बोली मैं ड्रिंक नहीं लेती। वह बोला तुम नहीं लोगी तो मैं
नाराज हो जाऊंगा। मैंने बोली तुमको नाराज होना है तो हो जाओ पर मैं नहीं लूंगी।

फिर वह छिड़ते हुए बोला- क्या यार मैं तुम्हारे इतना कुछ कर रहा हूँ तुम को रहने के लिए घर दे रहा हूँ। तुम्हारी सेफ्टी का ध्यान रख रहा हूँ औऱ तुम
मेरे लिए इतना नहीं कर सकती। मैंने फिर थोड़ी देर सोची दीपक बात तो सही बोल रहा है उसने हमारे लिए क्या कुछ
नहीं किया। फिर मैंने बोली ओके सिर्फ एक ड्रिंक। फिर उसने एक ड्रिंक बनाया और मुझे दिया ये मेरी लाइफ की पहली
ड्रिंक थी काफी कड़वा स्वाद लगा।

मैंने बोली काफी कड़वा स्वाद हैं । फिर वह बोला शुरू में लगता हैं बाद में मज़ा आता हैं फिर वह अपनी पहली ड्रिंक के किस्से सुनाने लगा और हम लोग ऐसे ही बातें करने लगे। मुझे भी नशा चढ़ने लगा। मैं भी हँस हँस कर बातें कर रही थी। फिर उसने एक और ड्रिंक बनायी और मुझे दी मैं मना करी फिर भी उसने जबरदस्ती
पिला दी। अब मैं भी फुल नशे में थी।

फिर वह बोला चलो डॉन्स करते हैं। फिर उसने एक रोमांटिक सॉन्ग लगाया और हम दोनों कपल डांस करने लगे उसने मेरा एक हाथ अपने कंधे पे और एक हाथ अपने हाथ से पकड़ा था ।और उसका एक हाथ मेरी कमर पे रख था । हम लोग ऐसे ही डांस कर रहे थे और म्यूजिक में खो रहे थे। फिर उसने अपना मुंह मेरे कान
के पास लाकर कहा तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे छेड़ते हुए कहा मतलब मैं रोज तुम्हें बुरी लगती हूँ।
वह बोला नहीं ऐसी बात नहीं है तुम तो रोज अच्छी लगती हो लेकिन आज गजब ही कहर ढा रही थी मेरी जान!

मैंने बोली अच्छा! सब लोग तो जा चुके लेकिन तुम अब भी नाटक में डूबे हुए हो। फिर वह मुझे पलट के मेरी कमर सहलाते
हुए बोला नहीं ये हकीकत हैं तुम बहुत सेक्सी हो मैं तुम्हें अपने आघोष में लेना चाहता हूँ।

मैं आश्चर्य से बोली क्या…!
फिर उसने मेरी कमर पड़कर अपनी ओर खींचा औऱ मेरी गर्दन पर किश करने लगा और बोला हाँ मेरी डार्लिंग! मैंने
तुमको पहली बार देखा था तभी तुम्हें चोदने का सोच लिया था अब जाके इतने महिनों बाद सपना पूरा हो रहा हैं। वो
एक हाथ से मेरे बूब्स भी दबा रहा था।

मै भी नशे में थी, अपने आप से नियंत्रण खो रही थीं मैं उससे छूटने की नाक़ाम
कोशिश कर रहीं थी। मैं उससे बोली ये तुम क्या कर रहे हों ? ये ग़लत हैं, मैं तुम्हारे दोस्त की बीवी हूँ। और मैं अपने पति
को धोखा नहीं दे सकती। वह बोला- कैसा पति जो अपनी बीवी गैरमर्द के हवाले छोड़ कर चला जाता हैं।

मुझे दीपक की बातें और ज्यादा उत्तेजित कर रहीं थीं मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मैं अपने आप से घृणा कर रही थीं मेरी बॉडी मेरा
साथ नहीं दे रही थीं आनंद महसूस कर रही थी फिर दीपक ने मुझे पलटा औऱ एक लंबा लिपलॉक किश किया मैं अपने
आप ही उसका साथ देने लगी थीं इतने उसने मेरी ब्लाउज का हुक निकाल कर ब्लाउज अलग फेंक दिया था फिर उसने
किश करते हुए मुझे गोदी में उठाया और अपने बेडरूम में ले गया और बेड में पटक दिया और मेरी साड़ी और पेटिकोट
खोल दिया अब मैं उसके सामने पेंटी बस में थी।

फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए औऱ पूरा नंगा हो गया। उसका
लण्ड 7 इंच लम्बा और बहुत मोटा था रमेश के लण्ड से बहुत बड़ा आज तो मेरी शामत आने वाली थी। और मेरी और
बढ़ा। मैं उससे मिन्नतें कर रही थीं प्लीज़ मेरे साथ ऐसा मत करो।

वह नहीं सुना औऱ आगे आकर मेरी पैंटी निकाल दी।
मेरी गीली चूत देखकर वह बोला क्यों नोटंकी कर रही हैं तेरी चूत तो कुछ और ही कह रही हैं फ़िर उसने मेरी टांगे
पकड़कर खिंचा औऱ अपना लंड सेट करके जोर धक्का मारा औऱ उसका आधा लंड चूत में घुस गया ।

मैं जोर से चिल्लायी, आहह….!!! फिर उसने और जोर से धक्का मारा औऱ पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। इस बार मैं औऱ ज्यादा ज़ोर से
चिल्लायी, आहहह….!!!! और मेरे आँसू भी निकल आये।! वह बोला तेरी चूत बहुत टाइट हैं तेरा असली पति नपुंसक हैं
क्या? वो मुझे जोर जोर से पेलता गया। मैं जोर जोर से चिल्लाती रही आहह……. आह…….अहह…. हह…!!दीपक
नही…!!!अहह..! आह….नहीं दीपक….आह..अहह….!

मेरी चिल्लाने की आवाज पक्का बाहर पड़ोसियों के घर तक जा रही होगी। वो सोच रहे होंगे दीपक की वाइफ ने उसे
अच्छा बर्थडे गिफ्ट दी। मैं दो बार झड़ चुकी थी दीपक भी अब झड़ने वाला था उसने एक जोर से झटका मारा ओर पूरा
वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया। औऱ ऊपर आकर लेट कर किश करने लगा।

फिर साइड में सो गया मैं वही पड़ी रो रही थीं मुझे पता नहीं चला मुझे कब नींद आ गयी। सुबह मैं बहुत लेट उठी, दीपक ऑफिस जा चुका था मैं जल्दी से फ्रेश
होकर तैयार हो गयी और रात की बात सोचकर कर रो रहीं थी मैंने सोची दीपक को सब कुछ बता दू।

लेकिन वो मेरी बात पर भरोसा करेगा या नहीं दीपक उसका बेस्ट फ्रेंड हैं यह बात सोचकर रुक गयी लेकिन बाद मैं उसको फ़ोन लगायी
लेकिन उसने फ़ोन नहीं उठाया। मैंने सोच ली थीं अब मैं और स्नेहा यहाँ नहीं रहेंगें हम लोग अपने घर वापिस शिफ्ट हो
जाएंगे। शाम जब दीपक घर आया तो मैंने उससे बात कही।

वह मेरे पास आकर बैठा औऱ हाथ पकड़कर कहा देखों कल रात जो हुआ उसका बुरा मत मानो जो भी वो एक प्राकृतिक कृत्य हैं कई बार यह सुख अपने पार्टनर से नहीं मिलता तो दूसरों से करने में कोई बुराई नहीं हैं। मैंने उससे दूर हटते हुए कही- मुझे तुम्हारे साथ यह नहीं करना है मेरा पति अभी

जिंदा हैं। वो बोला – देखों मेरी बात को समझो ,एक्सट्रा मटेरियल अफेयर रखने में कोई बुराई नहीं हैं गवर्नमेंट ने भी
इसे लीगल कर दिया हैं।

वैसे भी तुम्हारा पति कब वापिस आता हैं कोई गारंटी नहीं। हो सकता उसको सालों भी लग जाये। जब तक तुम क्या अपनी जवानी बर्बाद करोगी। तुम्हारी बॉडी की भी कुछ जरूरतें है उनकी पूर्ति होना भी जरूरी हैं मैंने रात में तुम्हारी चूत का हॉल देखा लण्ड लेने के लिए कितना तड़प रही थीं ज़ल्दी ही झड़ गयी। औऱ ये मत कहना
तुम मज़े नही ले रही थीं तुम्हारी सिसकियाँ सब बता रहीं थी तुम्हें कितना सुख मिल रहा था। औऱ रही घर छोड़ने की
बात तो तुम लोग वहाँ सेफ नहीं हो।

उस दिन मै वहाँ नहीं होता तो पता नहीं क्या होता? अब तक पता नहीं कितनों के
बिस्तर गर्म कर चुकी होती अरे अपना नहीं तो स्नेहा के बारे में तो सोचों वो तो ढंग से बड़ी भी नही हुई। मुझे उसकी बातें
कुछ कुछ समझ आ रही औऱ सोच रही थीं।

फ़िर वह आगे बढ़ा और मुझे ज़ोरदार लिपलॉक किश किया औऱ मुझे भी गर्म कर दिया। फिर मेरी गर्दन पर किश करता
उसको चाटता और बोलता मैं तुमसे प्यार करता हूँ जान! मैं तुम्हारा अच्छे से ख्याल रखूंगा रमेश की कमी खलने नहीं
दूंगा। मैं उसकी जीभ को अपनी गर्दन पर महसूस कर रही थीं।

मैं भी आँख बंद करके उसके सिर पर हाथ फेरते हुये उसका साथ दे रही थी और बड़ी ही मादक आवाज़ में बोल रही थी- दीपक…!. दीपक…! हम ऐसा नहीं कर सकते.. ! ये
ग़लत हैं….! वह बोला कुछ गलत नहीं है हम दोनों ये करना चाहते हैं तुम भी ज्यादा शर्माओ मत तुम्हारा बदन भी साथ
दे रहा हैं। मैंने बोली मैं रमेश को धोखा नहीं दे सकती, वो मेरे बारे में क्या सोचेगा। वह बोला रमेश को पता चलेगा न
तब धोखा होगा ! रमेश कौन बताएगा? इसलिये ये सब छोड़ो और मज़े करो।

दीपक की ये सब बातें सुनकर मैं थोड़ी खुल गयी और उसको किश करने लगी। हम लोग किश करते करते उसके रूम में चले गये। उसने जल्दी से दरवाजा बंद
किया । औऱ मुझे दबोच के किश करने लगा औऱ मेरी गांड दबाने लगा। वो बोला आज तो तुम्हें मैं कच्चा चबा जाऊंगा।
और मेरी ब्लाउज उतार के फेक दी। मैं भी उसकी शर्ट निकालने लगी।

फिर उसने अपनी शर्ट निकाल कर फेंक दी। फिर मैं उसकी बाहों में चली गयी उसका शरीर बेहद अच्छा था सुडौल बॉडी भी कसी हुई मैं उसके बदन को चूम रही थी औऱ उसकी पीठ सहला रही थी। फिर उसने मेरी ब्रा का हुक खोलके ब्रा भी निकाल दी और मुझे बेड में फेंक कर खुद मेरे ऊपर
चढ़ गया। और मेरे बूब्स चूसने लगा।

मैं भी उसका सिर पकड़कर मधुर आवाज़ निकाल के सिसकियाँ ले रही थी
आह…दीपक.. चूसो… हहहह, …. आह… मैं कितनों महीनों से मेरा बॉडी तड़प रही थीं आह…। फिर वह थोड़े और नीचे
गया और मेरा पेटिकोट खोल दिया। फिर मेरी पेंटी भी निकाल दी। फिर वह बोला कल तो तुम गजब माल लग रही थी।
सब लोग तुम्हें ही घूर रहे थे। सबने घर जाके जरुर तुम्हारे नाम की मुट्ठ मारी होंगी।

उसकी गन्दी बातें मुझे और हॉर्नी बना रही थीं। फिर मैंने बोली उन सब तुम्हीं लकी थे जिसने हकीकत में मुझे चोदा। मैंने कई रंडियों की चुदाई की हैं
लेकिन तुम्हारी जैसी पतिव्रता पत्नी की चुदाई करके में धन्य हो गया। फिर वो मेरी चूत में उंगली करने लगा मैं
सिसकियाँ लेने लगी। फ़िर वो मेरी चूत चाटने लगा।

मैं तो सुख के सातवें आसमान में पहुँच गयीं। मैं उसका सिर पकड़कर सिसकिया लेती बोल रही थी। चूसो मेरे राजा! चूसो.. कुछ देर मैं झड़ गयी और वो पूरा पानी पी गया। फिर उसने पेंट उतारी और अपनी चड्डी भी निकाल के फेंक दी उसका लंड एक दम तना था। मैं उठी और उसका लण्ड हाथ में लेकर
सहलाने लगीं।

वह बोला मेरा लण्ड तुम्हारे पति के लण्ड से बड़ा है ना? मैं बोली प्लीज ऐसी बातें मत बोलो वह फिर मेरे
सिर के बाल साइड करते हुआ बोला बताओ मेरी रानी।

मैंने बोली हाँ! तुम्हारे लण्ड के सामने रमेश का लण्ड कुछ भी नहीं उसका बहुत छोटा हैं। फिर वह बोला, तो फिर इसे अच्छे से प्यार करो। उसने मेरे बाल पकड़े और अपना लण्ड मेरे मुंह में डाल दिया। औऱ बोला चूसो मेरी जान रंडियों की तरह चूसो! फिर मैं उसका लण्ड चूस रही थी और एक हाथ
उसकी बॉल्स के साथ खेल रही थी।

वो सिसकिया ले रहा था। और बोल रहा था तुम एक दम रंडियों की तरह चूस रही हो आह..!उसका मुझे रण्डी बोलना गाली देना अच्छा लग रहा था। फिर वह मेरे मुंह के सामने के बाल हटाते हुए बोला, तुम लण्ड चूसते हुए बहुत मासूम लगती हो इसलिए मैं तुम पर मरता हूँ जान। फिर वह कुछ देर बाद मेरे मुंह पे ही झड़
गया। मैं उसका सारा वीर्य पी गयी।

उसका थोड़ा खट्टा स्वाद था लेकिन अच्छा था। फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गया मुझे
किश करने लगा और मेरे बूब्स दबा रहा था मैं भी उसको किश कर रही थी मेरे हाथ के नाखून के निशान उसकी पीठ पर
बन रहे थे। ऐसा आनंद मुझे पहले कभी नहीं मिला था।

कुछ देर बाद उसका लण्ड फिर से खड़ा हो गया। वो मेरे ऊपर से उठकर अपना लण्ड मेरी चूत में रगड़ रहा था। मैं एक से मचल उठी मैंने बोली मुझे मत तड़पाओ राजा। मेरी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ दो। वह बोला पहले तुम बोलो मुझे रोज दोगी।

मैंने बोली हाँ मेरी जान तुम मुझे रोज चोदना। वह
बोला जब मेरा मन करेगा तब मुझे तुम्हारी चुदाई करने दोगी। मैं बोली हाँ जानू जब तुम्हारा मन करेगा तब चोदना।
अब से मैं तुम्हारी असली पत्नी हूँ। अब चोदो मुझे। फिर उसने जोर से एक धक्का मारा और पूरा लण्ड मेरी चूत में समाँ

गया। क्योंकि रात में चुद चुकी थी तो मेरी चूत खुल गयी थी। उसका लण्ड मेरे अंदर जाते ही मेरी मुँह से जोर आह…. की
आवाज निकल गयी मैंने बोली धीरे से करो मुझे इतना लंबा लण्ड लेने की आदत नहीं हैं। वह बोला कोई बात नहीं तुमको
आदत हो जाएगी। कुछ देर बाद मुझे दर्द के साथ साथ आनंद सुख भी मिलने लगा था।

मैं सिसकिया ले रही थी, “आह….
आह…. चोदो मुझे दीपक…. चोद चोद के मेरी चूत का भोसड़ा कर दो.. और ज़ोर से चोदो….. आह…..आह……हह…यह
ह….आहहह……..! ” वह बोला धीरे धीरे आवाज करो शाम का टाइम है पड़ोसी लोग सुन लेंगे। मैंने बोली, सुनते हैं तो
सुनने दो! मैं तो अपने पति से चुद रही रही। कोई गलत काम थोड़ी कर रही हूँ।

मेरी बात सुनकर दीपक मुझे और जोर चोदने लगा। मैं फिर से झड़ गयी थी। उसने मुझे घोड़ी बनाया। तेल लगा के डॉगी स्टाइल में मेरी गांड मेरी। शुरू में मुझे
दर्द हुआ लेकिन बाद में मज़ा आया। मेरी गांड से खून निकल रहा था ।

खून देखकर दीपक ने कहा तेरी चूत की न सही तेरी गांड की वर्जिनिटी मेरे हाथों खत्म हुई। फिर कुछ देर बाद वह मेरी गांड में ही झड़ गया। और हम नंगे ही लेटे रहे।
कुछ देर बाद दरवाजे की घण्टी बजी और स्नेहा की आवाज आयी। मैं जल्दी से उठी औऱ नंगी ही बाथरूम की ओर भागी।
दीपक ने भी जल्दी से कपड़े पहने और दरवाजा खोला।

स्नेहा ने पूछी दीदी कहा हैं? उसने कहा सोनाली बाथरूम में हैं।
फिर मैं फ़्रेश होकर कपड़े पहनकर खाना बनाने लगी। दीपक पीछे से आया औऱ मुझे कस के पकड़ लिया औऱ बोला क्या
बना रही हो जान? मैं बोली क्या कर रहे हों स्नेहा घर पर हैं वो देख लेगी। फिर मैंने उसको धक्का दिया औऱ बोली जाओ
यहाँ से। फिर वो गुस्सा होकर जाने लगा। मैंने उसकी कॉलर पकड़ी और जोरदार किश की और बोली नाराज मत हो
मेरी जान रात को में तुम्हारी रातें रंगीन कर दूँगी।

वह खुश होके चला गया। रात को हमने खाना खाया औऱ सोने चले गए। रात को स्नेहा के सोने के मैं दीपक के रूम में चली गयी और दीपक ने मेरी जमकर चुदाई की। फिर सुबह होने से पहले मैं वापस अपने रूम में आ जाती। ऐसा ही हमारा रोज का काम बन गया था । कई बार दीपक लंच में घर आता
औऱ मुझे ठोककर चले जाता। ऐसा ही चल रहा था मैं भी खूब मज़े कर रहीं थीं एक दिन लंच में दीपक आया और मेरी
चुदाई कर रहा था उसने दरवाज़ा बन्द करना भूल गया था।

पता नहीं उस दिन स्नेहा जल्दी से कैसे आ गयी। मैं दीपक के ऊपर चढ़कर चुद रही थी। स्नेहा आयी और उसने दरवाजा खोला हमे हैरानी से देखा फिर मैं भी मुड़कर उसे देखी और दीपक के लण्ड से उतर गयी। इतने में वो वापस अपने रूम में चली गयी। मैंने भी जल्दी से अपनी साड़ी पहनी और उसके
रूम में आ गयी।

मैं उससे बोली जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ नहीं है तुम गलत समझ रही हो। वो बोली मैं कुछ गलत
नहीं समझ रही हूँ मैंने अपनी आँखों से देखी तुम मज़े चुद रही थी। मैंने बोली अरे ऐसा नहीं हैं। वो बोली ओ कम ऑन
भाभी अब ज्यादा बनो मत। मैं समझती हूँ जब 5-6 महीने पति से दूर हो और घर में एक गैरमर्द हो। तो वो कैसे भी कर
के चोद ही देता हैं।

और औरते भी मज़े लेती हैं यह सब नैचरल हैं। मुझे कोई प्रोब्लेम नहीं हैं तुम मज़े से चुदाई करो मैं
भैया को कुछ नहीं बोलूंगी। मैंने उसको गले लगायी औऱ बोली शुक्रिया मेरी बात समझने के लिए। और वह बोली, और
हाँ तुम्हें मेरे रूम में सोने की कोई जरूरत नहीं।

मैं शर्मायी और बोली जो हुकुम आपका । फिर मैं दीपक के पास गई औऱ ये बात बतायी वो खुशी से झूम उठा और स्नेहा को भी थैंक्यू बोला। फिर क्या था मै रोज दीपक के साथ ही सोती। दीपक रोज मेरी चुदाई करता मेरी गांड मारता। दीपक कभी कभी मेरे लिए नए नए गिफ्ट्स लाता। मुझे अब पूरी तरह से पत्नी
वाला सुख मिल रहा था।। नयी नयी सेक्सी ड्रेस खरीद कर लाता। अब मैंने तो साड़ी पहननी बन्द ही कर दी थीं हमेशा
सेक्सी ड्रेस में ही रहती।

दीपक कई बार किचन में आता और किचन प्लेटफॉर्म में मुझे बैठाकर चोद देता। मैंने अब पैंटी
ब्रा पहनना छोड़ ही दी थी। दीपक का जब मन करता मुझे गोदी में उठाके चोद देता ।घर के लगभग हर कोने में चुदाई
कर चुके थे कई बार रात में छत में गार्डन में मैं चुद चुकी।

मैं कई बार ऐसे ही बिना ब्रा पेंटी के टॉप स्कर्ट में ही घूमने चली जाती मुझे लोग घूरते लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता मैं बनके उनको अपनी गांड चूत के दर्शन कराती वो देख के पागल हो जाते। कई बार हम राहुल रिया के साथ घूमने जाते तो हम उनके सामने बहुत किस करते मैं दीपक लण्ड सहलाती वो
मेरी चूत में उंगली करता मेरे बूब्स दबाता।

वो लोग हमसे बहुत जेलस होते। कई बार हमने सिनेमा हॉल में अंधेरे का
फायदा उठा के चुदाई की। रेस्टोरेंट में टॉयलेट में जाके सेक्स किया। हमारा जहाँ मन करता हम वहाँ सेक्स करते। मेरी
जिंदगी बिल्कुल मज़े से चुदाई के सुकून में कट रही थी।

  • आपको मेरी देसी कहानी कैसी लगी मुझे email [email protected] में जरूर ईमेल करके बताये।
  • कहानी का अगला भाग भी आएगा जिसमें आप जानेंगे कि मैं किस तरह से एक रण्डी बन गयी। मैंने अपने रिश्तों की मर्यादा कैसे तोड़ी।

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