स्त्री और समाज -1

नमस्ते ! मेरा नाम सोनाली है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ। मैं दिखने में एक नॉर्मल टिपिकल इंडियन महिला हूँ, मेरा रंग गोरा और 5 फुट 4 इंच हाइट हैं मेरे ब्रेस्ट का साइज 38-40 है जो कि गोल मटोल उभरे हुये हैं मेरे का हिस्सा भी कमर में कर्व लेता हुआ उभरा हुआ है।

मुझे देखकर अच्छे अच्छे लोगो की नीयत ख़राब हो जाती हैं लेकिन इसमें मेरा क्या क़सूर मैं तो बस अपने आप को फिट ओर खुश रखना चाहती हूँ लेकिन ये समाज हमेशा लोगो को गलत नज़र से देखता है। और हर कोई सुंदर स्त्री को देखकर वासना के बारे में ही  सोचता है।

चलिए मैं अब मेरी हिंदी सेक्स कहानी में आती हूँ जो मेरे साथ घटित हुई हैं। मैं एक शरीफ फैमिली से बिलोंग करती हूँ और मैं भी सभी का  सम्मान करती हूँ।

कॉलेज के दिनों में मुझे एक लड़के से प्यार हो गया था और वो भी मुझसे बहुत प्यार करता था लेकिन कभी उसके साथ ऐसी हरकतें नही की जिससे मेरे या उसके परिवार की इज्जत पर कोई आंच आये उसने कई बार मुझसे शारिरीक संबंध बनाने की कोशिश की लेकिन मैंने अपने आप को काबू करके उसे समझाया यह सब गलत हैं हम यह शादी के बाद करेंगें चूँकि वह मुझसे प्यार करता था तो वह मान गया ।

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कॉलेज खत्म होने के बाद मैं मेरे पापा से मेरे प्यार के बारे में बात करने वाली ही थी उन्होंने मेरा रिश्ता फिक्स कर दिया था मैंने मम्मी से बात की तो उन्होंने बताया कि तेरे पापा ने तेरे पैदा होते ही तेरा रिश्ता अपने दोस्त के बेटे से कर दिया था ताकि दोस्ती रिश्तेदारी में बदल जाये और उनकी दोस्ती कभी न टूटे ।

मैंने मम्मी को अपने प्यार के बारे में बतायी तो उन्होंने कहा तेरे पापा ने 21 साल पहले ही अपने दोस्त को ज़बान दी अग़र वो ऐसा नही कर तो हमारी पूरे परिवार और समाज मे बदनामी हो जायेगी। तेरे बाप का सर हमेशा के लिए झुक जाएगा।

मैंने भी मम्मी की बात मान ली और शादी के लिए हा कर दी। मैंने अपने प्रेमी राहुल से अंतिम बार मुलाक़ात की वह बहुत उदाश हो गया और रोने लगा मैंने उसे समझायी कि हम एक न हो सके तो क्या हुआ मैं हमेशा तुमसे प्यार करती रहूंगी ।

तुम भी कोई अच्छी सी लड़की देख कर शादी कर लेना वो तुम्हारी अन्तर्वासना भी शांत कर देगी। । वो नही मान रहा था भागकर शादी करने के लिए कहा लेकिन मैंने कहा मैं अपने परिवार वालो को धोखा नही दे सकती। वो भी मुझसे प्यार करता था लेकिन वो भी परिवार की अहमियत समझता था।

उसने मुझे अंतिम बार गले से लगाया और कहा हमेशा खुश रहना और कुछ दिक्कत आये तो मुझे कहना क्योकि तुम खुश रहोगी तक मैं ख़ुश रहूंगा और अलविदा कहकर हम अपने अपने रास्ते चले गए ।

कुछ दिनों में मेरी शादी हो गयी और मैं ओर मेरे पति(रमेश) दूसरे शहर में रहने चले गए । मेरा ससुराल गांव में था लेकिन मेरे पति शहर में नॉकरी करते थे। कुछ बहुत बेकार गुज़रे क्योकि मुझे राहुल की बहुत याद आती थी । मेरी  परिवार और मेरी खुशी के लिए उसने मेरी बात मान ली ।

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मुझे बहुत बुरा लगता था उसके बारे में सोच के। कुछ और दिन बीत गए अब रमेश भी मुझे बहुत प्यार करने लगा मेरा बहुत अच्छे से ख़्याल राखता था हर जरूरत पूरी करता था। कहीँ न कहीं मैं भी अब उससे प्यार करने लगी थी। हमने अभी तक सुहागरात नही मानयी थी।

सुहागरात वाले दिन मैं अभी इसके लिए रेडी नही हूं बोलकर सो गई थी और वह मान गए थे लेकिन अब मुझे लगने लगा था मैं अपना पतिव्रता धर्म अच्छे से नहीं निभा रही हूँ मैं उनकी ख़ुशियों का ख्याल नही रख पा रही हूँ। बेशक वो मुझसे अपनी इक्षाएँ जाहिर नहीं करते हैं लेकिन उन्हें देखकर मैं समझ जाती हूं कि उन्हें भी अपनी पत्नी से उतने ही प्यार की जरूरत हैं जितना वह मुझसे करतें हैं।

इसीलिए मैंने भी सोच ली था कि अब पुरानी बातों को भुलाकर अपने पति के साथ नई जिन्दगी की शुरुआत करती हूँ। रोज़ की तरह सुबह ये अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे थे मैं भी किचन में लंच तैयार कर रहीं थी फिर तुरन्त मैंने टिफिन तैयार किया और उन्हें देने के लिए आयी ।

वे टाई बांध रहे थे मैंने उनसे पूछी मैं टाई बांधने मदद करू। उन्होंने मुशकुरा कर हा कहा, मैं उनकी टाई बांधने में मदद कर रही थी और वो मुस्कुराते हुए मुझे निहार रहे थे मैं भी उनकी आंखों में देखकर मुस्कुरा रही थी ।

 फिर उन्होंने मेरी मुलायम कमर में उंगली फ़ेरी मानो मेरी शरीर मे बिजली सी दौड़ गयी एक पल के लिए मेरी आँखें बंद हो गयी उस छुहन को महसूस करने लगी फिर मैंने  उनकी आंखों में देखा वो मुझे प्यार से घूर रहे थे मैं भी उन्हें नज़रे नीचे करके चोरी छिपे उनको वासनापूर्ण नज़रों से देख रही थी फ़िर उन्होंने मुझे कमर पर कसकर पकड़कर अपनी ओर खींचा। और मैं झटके से उनसे चिपक गयी मेरे स्तन उनकी छाती से जाकर टकरा गये।

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इस प्रकार मुझे पहली बार किसी पुरुष ने पकड़ा था। मैं बहुत ही अचंभित नज़रों से उन्हें देख रही थी। फिर उन्होंने एक हाथ से मेरी झुल्हफे ठीक करी ओर मुझे निहारने लगे और गर्दन में उंगली फेहने लगे फिर उनकी नज़र मेरे स्तनों पर गयी जो चिपकने के कारण खाफी  उठ गए थे। फिर वह वासना से मुझे देखने लगे और और गर्दन पे किस करने लगे और कान को दांतों हलके से काटने लगे शायद वो भी समझ गए थे कि मैं भी अब उनको पसंद करने लगी हूँ।

मैं उनके काटने ओर किश  करने से मोहक सिसकियाँ (आह,,,,..आहहहह) लेने लगी।  पता नहीं यह अपने आप ही हो रहा रहा था पर मुझे आनंदित कर रहा  फिर मैं भी उन्हें कसकर पकड़ कर साथ दे रही थी फिर मुझे याद आया इन्हें तो आफिस भी जाना है।

मैंने उनके कान में प्यार से ‘क्यो आज आपको ऑफिस के लिए लेट नही हो रही हैं’ फिर उन्होंने घड़ी की तरफ देखते हुए कहा हां डार्लिंग खाफी लेट हो गया हैं। फिर उन्होंने बैग  और टिफिन पकड़ा और मेरे गालों में किस किया ओर कहा शाम को मिलते हैं जान ! लव यू।

मैंने भी उन्हें लव यु टू कही और वो  गए। फिर मैंने दरवाज़े के जाकर कहा सुनिए..! शाम को जल्दी आना । वो फिर मुस्कुरा दिए और बाये कहकर चले गए ।

मैं भी घर के काम करने लगी और मै अपने पति को खुश देखकर अच्छा महसूस कर रही  पहली बार मैंने उनको इतना खुश देखा थी । फिर मैंने अपने घर का सारा काम निपटायी और फिर खाना खा सो गयी ।

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कुछ देर बाद घर की बेल बजी मैंने सोची इतने जल्दी शाम कैसे हो गयी फिर घड़ी की तरफ देखी तो दोपहर के 2 बज रहे हैं इस वक़्त कौन आ सकता हैं चूँकि रमेश अपने साथ टिफिन ले जाते हैं इसीलिए वह लंच टाइम में घर नही आते ।

और इस शहर में हमारे पहचान का भी कोई नहीं हैं । मैंने अपनी सूट ठीक करी चुनरी डालकर दरवाज़े की ओर बढ़ी। चूँकि घर में मैं ओर मेरे पति अकेले रहते ह इसीलिए मैं ज्यादातर सूट सलवारमें रहती हूँ। मैंने जैसे ही ही दरवाज़ा खोला दरवाज़े पे एक हैंडसम ओर सुडौल बॉडी का आदमी लगभग रमेश की उम्र का ही लग रहा रहा था हाथ में गिफ़्ट लिए खड़ा था।

वह मेरी ओर नीचे से ऊपर की घूर के देख रहा था फिर उसकी नज़र मेरे बूब्स की ओर आकर रुक गए जो कि कवर थे लेकिन साइज गोल आकर्षक थे और दोनों  बूब्स के मध्य की हल्की सी दरार साफ दिख रही थी । वो कहते है ना जो चीज़ छुपी रहती हैं उसे ही ज्यादा देखने की इक्षा होती हैं। फट से मैंने अपनी चुनरी नीचे की । और उनसे पूछाजी आप कौन ? वह मेरी और देखकर मुस्कुराते हुए कहा मैं रमेश का फ्रेंड हूँ दीपक।

कई महीनों से बिज़नेस के सिलसिले में शहर के बाहर था जिस कारण मैं शादी में नही आ पाया इसीलिये मैं आप लगो  लोगों से मिलने चला। फिर वह बोला आप अन्दर आने को नही बोलेंगी भाभी जी ! फिर मैंने कही नही आप अंदर आ जाइये ।

फिर मैंने दीपक को बैठने को कही फिर दो चार बातें की ओर फिर मैं चाय बनाने किचन की ओर चल पड़ी किचन की ओर जाते समय मेरी नज़र हाल में रखे आइने की पड़ी मैने देखी कि दीपक मेरी मटकती गांड को घूर घूर कर देख रहा हैं।

मैं किचन पर आ गयी और चाय बनाने लगी मुझे बहुत बुरा लगा जिस नज़र से दीपक मुझे देख रहा था। लेकिन वह मेरे पति का दोस्त था इसीलिए इन सब बातों को दिमाग से हटा दिया और सोची की वह पुरूष हैं और इन लोगों की नज़र महिलाओं के विशेष अंगो की तरफ चली ही जाती हैं और यह प्राकृतिक क्रिया का एक भाग है। चाय बनकर तैयार थी मैने चाय छनाई ओर दीपक की ओर चली आयी। मैं दीपक को चाय देने जैसे ही झुकी मेरी चुनरी एक तरफ से नीचे गिर गयी ।

दीपक की नज़र फिर से मेरे बूब्स की तरफ टिक गई और इस बार पहले से ज्यादा मेरे स्तनों का भाग दिख रहा था लगभग आधे गोल गोल बूब्स उसकी नज़रो के सामने थे ओर बीच की रार अलग ही खूबसूरती बिखेर रहे थे।

वो मेरे बूब्स को घूरे जा रहा था इस बार मेरे हाथों में चाय की ट्रे थी जिस कारण मैं अपनी चुनरी ठीक नही कर पा रही थी फिर मैंने उसको टोकते हुए कही आप चाय लीजिये !

फिर उसने चाय ली और मैंने अपनी चुनी ठीक की और चाय पीने सोफे पर बैठ गयी।फिर वह मेरी चाय की तारीफ़ करने लगा चाय अच्छी बनी हैं। मैंने भी जवाब में शुक्रिया कही। वह फिर से मेरे शरीर को निहार रहा था इस बार बार वह मेरी गांड की तरफ देख रहा था चूँकि में सोफे में बैठी थी इसीलिए अलग ही कर्व शेप में बहुत सेक्सी लग रही थी इसके बाद वह मेरी तारीफ़ करने लगा आप बहुत खूबसूरत हैं मैन आपकी फ़ोटो देखा रमेश के फ़ोन पे लेकिन रियल में आप फ़ोटो से भी ज्यादा खूबसूरत हैं।

रमेश बहुत लकी हैं जो उसको आप जैसी बीवी मिली। मैंने भी हँसके बोली  क्या आप भी कुछ ज्यादा ही तारीफ कर रहे हो। फिर उसने कहा नहीं मैं सही बोल रहा हु आप माशाअल्लाह बहुत खूबसूरत हैं।

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मैं भी इस बार हम्म करके जवाब दी। फिर चाय पी के हो गयी। फिर उसने कहा ठीक हैं भाभी जी मुझे देर हो रही मैं चलता हूँ और ये गिफ्ट लाया था मैंने आप दोनों के लिए । फिर मैंने कही इसकी क्या जरूरत  थी। वह बोला मैं शादी नहीं आ पाया था इसीलिए ये बतौर माफी स्वीकार कर लीजिये। फिर मैंने कही शुक्रिया। इसके बाद वह बोला ठीक हैं भाभी जी बाद में मिलते हैं अभी मैं चलता हूँ। और वह चला गया।

फिर मैंने घड़ी की तरफ देखी तो 5 बज रहे थे। खाफी देर हो चुकी थी बातों ही बातों पता ही नही चलाफिर मैंने शॉवर लिया और घर के काम करने लगी और दीपक के बारे में सोचने लगी। कितना अच्छा आदमी था बहुत विनम्रता से बात कर रहा था। कुछ चीजें अचानक से हो गईं। मेरी चुनरी भी उसके सामने गिर गयी थी पता नही मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा कहि मेरे बारे में कोई गलत इमेज न बना ले।

फिर मैंने अपने आप को समझाया मैं भी क्या सोच रही हूँ फ़टाफ़ट काम खत्म करना हैं अभी रमेश जी भी आते ही होंगे । और अभी डिनर भी रेडी नहीं हैं। शाम के 7 बज चुके थे। इनके आने का टाइम हो गया था।

मैं तुरंत बेडरूम में जाकर कपड़े बदली मैंने ब्लैक कलर की ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी और गेहरे गले वाली बैकलेस ब्लाउज पहनी। बैकलेस ब्लाउज होने की वजह से मुझे ब्रा पहने की जरूरत नही थी जिससे मेरे बूब्स बाहर की ओर उभरे हुए दिख रहे थे जो किसी भी वक्त बाहर आने कोशिश कर रहे थे। मैंने साड़ी भी नाभि के नीचे बाँधी थी जिससे मैं  पूरी तरह सेक्सी लग रही थी। मैं हल्का सा मैकअप भी करी थी।

दरवाजे की बेल बजी मैं समझ गयी वो आ गये हैं मैं दरवाजे की ओर गयी और दरवाजा खोला और उनका वेलकम किया। वह खाफी थके लग रहे थे। मैंने उनका बैग टिफिन लिया और उनको फ़्रेश होने के लिएकहि जब तक  मैं डिनर टेबल में रेडी करती हूँ। फिर वह फ्रेश होकर तैयार होकर आये और मुझे पीछे से आकर कसकर पकड़ लिया और बोले क्या बात हैं ? आज तुम ख़ूबसूरत लग रही हो।

मैंने भी मुस्कुराते हुए कही क्यो मैं रोज आपको खूबसूरत नहीं लगती ? उन्होंने कहा ऐसी बात नहीं हैं। तुम रोज  खूबसूरत लगती हो लेकिन आज अलग ही कहर ढा रही हो। फिर मैंने बात काटते हुए कही आप आप देर से आये हो और खाफी थक भी गए हो चलिए डिनर कर लेते हैं। फिर उन्होंने कहा तुमको देखकर मेरी सारी थकान दूर हो गयी हैं। फिर मैंने उनसे छुटते हुए कही मुझे तो बहुत भूक लगी हैं मैं तो चली खाना खाने ।

आप भी आ जाइये आपके पसंद का खाना बना है। फिर वह भी आ गए टेबल पे और हमने डिनर करना शुरू कर दिया। फिर हमने इधर उधर की बातें करना शुरू कर दी फिर मैंने कही आज आपका फ्रेंड दीपक आया था उन्होंने कहा हां मेरी बात हुई थी उससे उसने सोचा कि मैं भी घर पर ही होगा इसीलिए वह घर आया था। तुम मिली उससे? मैंने कहा हाँ मुलाकात हुई और हमने खाफी बातें भी और चाय भी पिये। 

फिर उन्होंने पूछा दीपक कैसा लगा तुम्हे? मैंने जवाब दिया वह खाफी अच्छे स्वभाव के है और बहुत विनम्रतापूर्वक बात करते हैं। लेकिन ये सब आप क्यो पूछ रहे रहे हैं। उन्होंने कहा बस ऐसे ही कॉलेज के दिनों में वह बहुत नॉटी हुआ करता था। मैंने कहा मुझे तो नहीं लगा। फिर वह बोले मेरा तो डिनर हो गया मैंने भी कही मेरा भी लगभग हो ही गया। फिर हम हाथ धो के टीवी पर रोमेंटिक मूवी देखने लगे। 

मैं उनके कंधे पर सिर रख कर टीवी देख रही थी उनका भी एक हाथ मेरे दूसरे कंधे पर था और एक हाथ मे विस्की के ग्लास पर था। फिर फिर उन्होंने विस्की का ग्लास नीचे रख दिया और मेरी झुल्हफे सुधारने लगे और मुझे निहारने लगे मेरी तारीफ करने लगे फिर उन्होंने कहा हमारे माँ बाप ने हमारा रिश्ता करके बहुत अच्छा काम किया जिससे तुम जैसी खूबसूरत बीवी मुझे मिली।

यह बात सुनके  राहुल (मेरे प्रेमी) की याद आ गयी और मैं झट से अलग बैठ गयी फिर उन्होंने पूछा क्या हुआ? मैने कही कुछ नहीं बस ऐसै ही थोड़ा अजीब लगा। फिर उन्होंने मुझे अपनी ओर खींचा बाहों में हाथ डालकर फिर से मूवी देखने लगे। मूवी में एक किसिंग सीन  शुरू हो गया था जिसे देखकर मेरे पति खाफी उत्तेजित हो गए थे और मुझे वासनापूर्ण नज़रों से देखने लगे फिर उन्होंने एक दम से मुझे अपनी ओर खींचा और गले को चूमने लगे ओर मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगे।

अब मैं भी गरम हो चुकी थी और उनको कस कर पकड़कर उनका साथ देने लगी अपनी ओर खींच रही थी। फिर वह गले से मेरे गाल पर फिर फिर बालों को पड़कर मेरे होंठो पर किश करने  मैं पहली बार किसी को होठों में किस दे रही थी मुझे बहुत आजिब लगा फिर मुझे मज़ा आने लगा वह अपनी जीभ से मेरे अपर लिप् और कभी लोअर लिप् को चूस रहे थे।

फिर वह जीभ को मेरे मुँह के अन्दर डालने के कोशिश कर रहे थे मैंने भी अपना मुँह खोल दिया और वह मेरी जीभ को अपनी से चाटने में लगे थे अब मुझे भी मज़ा आ रहा था पहली बार इस प्रकार के आनंद को अनुभव कर रही थी कभी सोचा नही था किश का करने में इतना मज़ा आता  हैं। साथ वह मेरे बूब्स भी दबा रहे थे जो मुझे अलग ही सुख प्रदान कर रहे थे।

10 मिनट बाद वह रुके मेरे मुझ से पूरा थूक टपक रहा था। फिर उन्होंने मुझे गोद मे उठाया और बैडरूम की ओर चल पड़े। जाते वक़्त वह बोल रहे थे मैं तुमसे बहुत प्यार करता मैं हमेशा तुमको खुश रखूँगा। इस पल का मैं दिनों से इंतज़ार कर रहा था। मैं भी उनको गले मे हाथ डाले प्यार से देख रही थी और बोली मैं भी  आपसे बहुत प्यार करती हूँ और आपकी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ फिर मैंने उनके गालों पे किश किया।

अब हम बेडरूम में पहुँच चुके थे। उन्होंने मुझे बेड पर लेटाया ओर मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़े। मुझे फिर से किस करने लगे धीरे धीरे वो नीचे की बढ़े और मेरे बूब्स को दबाने लगे मैं भी आनंद में सिसकियाँ लेने लगी आह.. हहहह,अअअअ ई और फिर मेरी कमर को चाटने  लगे मैं लगातार सिसकियाँ ले रही थी वो मुझसे पूछे तुम खुश हो न तुम्हे मज़ा तो आ रहा ह न।

मैंने सिसकियाँ लेते हुए कहा बहुत मज़ा आ रहा हैं ऐसा आनंदमय पल हमेशा बना रहे फिर उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और मुझे किस् करने ओर साथ ही मेरे ब्लाउज का हुक भी खोल दिया और ब्लाउज को अलग फेंक दिया। अब मैं पहली बार किसी के सामने ऊपर से आधी नंगी थी 

मैंने अपने हाथों से अपने बूब्स छुपाने की कोशिश की उन्होंने कहा हाथ हटाओ मैंने नही मुझे शर्म आ रही है उन्होंने हँसते हुए कहा अपने पति से कैसे शर्माना बोलते हुए खुद ही हाथ दिए और मेरे बूब्स देखने लगे और कहा तुम्हारे बूब्स खाफी आकर्षक और बड़े हैं कोई भी मर्द इन्हें चूसना चाहेगा। मैन बोलीछी आप किसी बात कर रहे हैं फिर वह बूब्स पर टूट पड़े और उन्हें दबा दबाकर चूसने लगे माने कोई आम हो।

मुझे शुरू में दर्द हुआ लेकिन मुझे भी अब मज़ा आने लगा था मैं भी अब सिसकियाँ ले रही थी और उनके सिर पर हाथ फेर रही थी पहली बार मैंने महसूस किया मेरी चूत गीली हो चुकी ह और अजीब सी खुजली हो रही हैं। फिर मैंने अपने दूसरे हाथ से अपनी चूत पर उंगली करनी शुरू कर दी। वह ये सब नोटिस कर चुके उन्होंने कहा साड़ी उतारो मैं तुम्हें जन्नत की सेर कराता हु।

मैंने कहा ठीक ह पहले लाइट बैंड कर लीजिए। वह हँसने लगे और बोले तुम बहुत भोली हो मैं तुम्हारा पति हूँ मुझसे कैसा छुपाना ।

 फिर मैं बोली ठीक आप खुद ही साड़ी उतार लीजिये मैं नहीं उतारूंगी। और फिर बेड से उठकर भागने लगी फिर उन्होंने मेरी साड़ी का एक सिरापकड़कर अपनी और खींचने लगे मैं गोल गोल घूमने लगी और दीवार से जाकर चिपक गयी वह मुझे पीछे से आकर कसकर पकड़ लिऐ और मुझे गले के पास चाटने लगे।

फिर उन्होंने एक हाथ मेरी गांड पर रख मसलने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा था फिर उन्होंने कब मेरी पेटिकोट का नाड़ा खोल दिया मुझे पता ही नहीं चला अब मैं सिर्फ पैंटी में थीं ओर वो मुझसे सटकर मेरे बूब्स दबा रहे थे अचानक से उन्होने मेरी पैंटी हाथ डाल चूत में उंगली करने लगे। मैं तिलमिला उठी और चिल्ला पड़ी आह….!! क्योंकि किसी ओर मेरी चूत पर उँगली नही की थी।

इस बात से वो थोड़ा गुस्सा हो गये की मैं कुछ ज्यादा ही नखड़े कर रही हूँ। लेकिन ये मेरा फर्स्ट टाइम हैं तो ऐसा होना स्वभाविक हैं फिर उन्होंने मुझे कमर में पकड़ कर बेड में फेंक दिया फिर मेरी पैंटी खींचकर निकल दी।

फिर उन्होंने मेरे पैरों को खींचा ओर इस प्रकार जमाया की चूत तक हिस्सा बेड पे ओर बाकी हिस्सा ज़मीन पर रहे। अब वो अपने बाहुबल का प्रयोग कर रहे थे मैं अपने हाथों से चूत छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उन्होंने हाथ हटाया ओर चूत को सूंघने लगे मेरी चूत में बाल थे जिनसे अब वह खेल रहे थे फिर उन्होंने मेरी चूत में एक उंगली डाली और मैं चिल्ला पड़ी अहह..!!

फिर उन्होंने कहा तुम्हारी चूत बहुत टाइट ह लगता तुमने कभी उँगली भी नही  की। ये बात सही हैं मैंने साल में एक हाथ बार ही अपनी छूट में उँगली की होगी मुझे अच्छे से भी याद नहीं। फिर वो मेरी चूत में उँगली अंदर बाहर करने लगे मैं सिसकियाँ लेने लगी.. आह अअअअअ अहह ई ई इ आ अअअअअ.. कुछ देर बाद वो दो उँगली से करने लगे इस बार थोड़ा दर्द हो रहा था के मज़ा भी बहुत आ रहा था।

इसके बाद वो मेरी चूत को चाटने लगे। अब मानो मैं सही में मैं जन्नत की सेर पर निकल गयी हूँ ऐसा लग रहा था।  मैं अब उनके सिर को दबा रही थी कुछ पल बाद मैंने पानी छोड़ दी और वो पूरा पानी पी गए। उन्होंने कहा तुम्हें मज़ा आया मैंने कही हाँ बहुत आया मैं सही में जन्नत की सेर पर निकल गयी थी। 

फिर उन्होंने मुझे बैठने को कहा और अपने सारे कपड़े उतारने लगे मैंने नज़र दूसरी तरफ कर ली।  फिर उन्होंने कहा डार्लिंग जरा इधर तो देख़ो। फिर मैंने देखा कि वे नंगे खड़े और उनका लंड तना हुआ है लगभग 5 या 5.5 इंच और 2 ढाई इंच मोटा।

मैं पहली बार किसी वयस्क पुरुष का ळंड देख रही थी। उसे देखकर मुझे अजीब सा आकर्षण हो रहा था । मेरी इक्षा उस मोटे लंड के साथ खेलने की हो रही थी लेकिन घिन भी आ रही थी। उन्होंने लंड को चाटने को कहा मैंने शुरू में मना करी लेकिन उनके बार बार कहने पर मां गयी।

अब मैं उनके लंड को हाथ मे पकड़ गोल गोल अंडो को चाट रही थी फिर मैंने धीरे से सुपड़े को चाटी  अब वो सिसकियां लेने लगे और मेरे सिर को पकड़ कर अपनी ओर धक्का देने लगे जिससे उनका आधा लंड मुँह के अंदर आ गया था उनके लंड का स्वाद खट्टा नमकीन से था जो मुझे अच्छा लग रहा था फिर वह मेरे बाल को पकड़ आगे पीछे करने लगे। 

अब उनका लंड मेरी गर्दन तक आ रहा था मैं भी मज़े से चूस रही थी वो भी सिसकियां ले रहे थे (आह अअअअ आह।..) फिर उन्होंने मेरे मुंह पे ही अपना सारा रस छोड़ दिया और पी गयी स्वाद अजीब था लेकिन अच्छा लगा।

फिर वह बिस्तर पर मेरे ऊपर गिर गए और मुझे किस करने लगे और साथ ही मेरे बूब्स भी दबा रहे थे। मैं भी उनका एक हाथ से लंड सहला रही थी। कुछ देर बाद उनका लंड फिर से टाइट हो गया। फिर उन्होंने मेरी गांड के नीचे तकिया रखा और अपने लंड से मेरी चूत को सहलाने लगे। मुझे बहुत तड़प हो रही थी मैंने कही अब और मत तड़पाइये मुझे अब कली से फूल बना दीजिए। फिर उन्होंने एक धक्का मारा और आधा लंड मेरी चूत में घुस गया मैं जोर से चिल्ला पड़ी आह..!  और कहा धीरे कीजिए दर्द हो रहा हैं।

फिर उन्होंने कहा शुरू में दर्द होगा लेकिन बाद में बहुत मज़ा आएगा। वह धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर कर रहे और मैं दर्द के मारे चिल्ला रही थी। आह ई अ.अअ एइउ उ आ आई। फिर वो एक दम से जोर से धक्का मारे ओर उनका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया।

इस बार मैं ज्यादा जोर से चिल्लाई आह! ओर बिस्तर को कसके पकड़ी इस बार आँसू भी आ रहे थे। फिर उन्होंने कहा मुबारक हो तुम कली से फूल बन चुकी हो तुम्हारी सील टूट चुकी है।

मैंने देखी मेरी मेरी चूत के आसपास खून ही खून और उनका लंड भी खून से लथपथ हैं लेकिन वो  फिर भी नहीं रुके लगातार चोदे जा रहे थे। अब मुझे भी मज़ा आने लगा था मैं भी उनका साथ देने लगी थी और गांड उठा उठा के चुद रही थी और सिसकिया ले रही थी आह.. आह.. और चोदो मुझे आह ई आ उ हह…. मज़ा आ रहा है कुछ देर बाद मैं झड़ गई और वो भी कुछ सेकंड बाद झड़ गए और पूरा माल मेरी चूत में छोड़ दिये।

और मेरे ऊपर आकर लेट गए कुछ देर ऐसे मेरे ऊपर लेटे रहे फिर हम दोनों किस करने लगे और फिर हमने प्यार भरी बातें की और उनको नींद लग गयी। मैंने भी नाइटी पहनी ओर उनके पास आकर लेट गयी और उनको प्यार से निहारने लगी फिर मैं करवट बदल कर सोने लगी और सोचने लगी आज ये बहुत खुश थे और चैन की नींद सोये मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

फिर एक दम से मुझे राहुल की याद आयी और सोचने लगी यदि मेरी राहुल से शादी हुई होती तो आज मैं राहुल के साथ मज़े कर रहीं होती फिर मैंने अपने आप को संभाला और कही ये क्या सोच रही हूँ मैं? अब मैं रमेश जी की पत्नी हूँ और वो मुझसे बहुत प्यार करते है और मैं भी उनसे प्यार करने लगी हूँ। किसी पराये मर्द के बारे में सोचना भी पाप हैं। और फिर मुझे नींद आ गयी ।

  • इस स्टोरी के अगले भाग में आप जानेंगे कि इस समाज मे मेरे साथ कुछ ऐसी घटना हुई जो आपने शायद ही सोची होगी।
  • मेरी कहानी का अगला भाग पड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे ” स्त्री और समाज- 2
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