उछल उछल के सौतेली माँ की चुदाई

लखनऊ के शिवू ने उछल उछल के की अपनी माँ की चुदाई। शिवू ने अपनी कहानी में बताया की वो अपनी सौतेली माँ को पसंद नहीं करता था। शिवू अपनी सौतेली माँ को सेक्सी निगाहों से देखता था। इसलिए जब शिवू को मौका मिला तो उसने उछल उछल के सौतेली माँ की चुदाई कर डाली। शिवू ने अपनी कहानी में बताया की उस रात माँ हस्तमैथुन कर रही थी ये सब देख वो भी कामुक हो उठा और कमरे में घुस कर अपनी सौतेली माँ की चुत गांड चोदने लगा। 

मैं अपनी सौतेली माँ से काफी नफरत करता था। वो काफी खडूस थी और पापा के पैसे पर नजर गड़ाए रखती थी। पर साथ ही वो कामुक भी थी। जब चलती तो उनकी गांड ऐसे मटकाती जैसे कही की मॉडल हो। उनके स्तन काफी बड़े और लटके हुए थे पता नहीं पापा से पहले किन किन मर्दो से उन्होंने अपने स्तन चुसवा रखे थे। 

पर वो व्यवहार में जैसी भी हो मैं उनके शरीर का बस एक हवसी दीवाना था। 

पापा एक व्यापारी थे और मेरी माँ के जाने के बाद उनका काम अच्छे से चल पड़ा था इसलिए वो कई रात तो घर ही नहीं आते थे। मेरी सौतेली माँ को कोई फर्क ही नहीं पड़ता था वो बस अपनी चुगलखोर सहेलियों के साथ घूमती फिरती रहती थी। 

उस रात भी पापा घर से बाहर थे और मैं उस वक्त अपने दोस्त से मिल कर वापस घर जा रहा था। घर के अंदर घुसते ही मुझे भुख लगी तो रसोई में चला गया। 

पर वहा कुछ नहीं था। माँ से पूछने के लिए मैं उनके बेडरूम की तरफ गया तो मुँह अहह !! की आवाज आने लगी। 

ये सुन कर मैं अपने कदम धीरे धीरे आगे बढ़ाने लगा। मैंने दरवाजे के ताला लगाने के छेद से अंदर देखा तो मेरा लंड खड़ा हो गया। 

अंदर सौतेली माँ बेड पर अपने दोनों पैर फैला कर लेटी थी। वो धीरे धीरे अपनी चुत में ऊँगली दे रही थी और खुद ही अपने स्तन चूस रही थी। 

मैं उन्हें देखता रहा और अपनी पैंट में हाथ डाल कर लंड पकड़ लिया। माँ तो कामुक थी ही साथ ही उन्होंने मुझे और पागल कर दिया। 

मैं अपनी sauteli maa ki chudai के सपने वही खड़ा देकने लगा और अपना लंड हिलाता रहा।

कुछ 5 मिनट तक मैं वही से माँ को हस्तमैथुन करता देखता रहा और अपना लंड धीरे धीरे हिलाता रहा। उसके बाद मेरी गर्दन और पीठ में दर्द होने लगा। 

मैं वहा से जाना भी नहीं चाहता था क्यों की लंड की मजबूरी थी। मैं खतरा मोल ले कर कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खोल दिया। 

माँ काम वासना से भरी थी तो उन्हें पता नहीं चला। उसके बाद मैं खड़ा हो कर दरवाजे से देखता रहा और अपने खड़े लंड को मसलता रहा। 

मेरा लिंग ऊपर से सूखा था तो मैं उसके ऊपर थूक दिया। थूक कर जब मेरी नजर वापस माँ पर गई तो वो मुझे देख रही थी। 

ये देख मैं डर गया क्यों की दरवाजे से मेरा लंड भी उनको दिख रहा था। पर उन्होंने कुछ नहीं किया और उल्टा मुझे देखते देखते अपनी दोनों चूची चूसने लगी। 

मैं भी वही खड़ा उन्हें देख अपना आगे पीछे हिलाता रहा। माँ की सेक्सी आँखे मुझे और कामुक कर रही थी। उनकी नजर मेरे शरीर से एक पल के लिए भी नहीं हटी। 

वो पल मेरी जिंदगी का सबसे कामुक पल था। कुछ देर बाद माँ ने अपने दोनों पैर फिर से खोले और अपनी चुत फैला कर मेरे लंड को देखने लगी। 

ये देख मुझ से और सब्र नहीं हुआ मैं दरवाजा जोर से खोला और भाग कर सौतेली माँ के ऊपर चढ़ गया। 

माँ ने मेरी आँखों में देखा और मेरी छाती पर हाथ रख कर कहा बड़े कमीने हो बेटा। उनके ऐसा कहते ही मैंने अपने लंड को उनकी गीली चुत में घुसा डाला। 

माँ के कूल्हे काफी चौड़े थे और मैंने उनपर हाथो से अच्छी पकड़ बना रखती थी। माँ मुझे अपनी काजल वाली सुंदर आँखों से और कामुक कर रही थी। 

मैं तभी तेजी से उछल उछल के सौतेली माँ की चुदाई करने लगा। मेरा लंड और माँ की चुत दोनों ही काफी लसलसे होने लगे।  

मैं माँ की जांघो को हाथो से पकड़ रखा था और उनकी चुत में अपना लंड अंदर बाहर रगड़ रहा था। 

मेरे शरीर में बिजली दौड़ रही थी। सौतेली माँ का शरीर और चेहरा मैं बार बार छू कर और मजे ले रहा था। 

माँ भी मेरे शरीर को बार बार हाथ लगा रही थी और मेरी गांड पर नाखून भी मार रही थी। थोड़ी देर और उनकी चुत चोदने के बाद माँ का शरीर गर्म जो गया और मुझे लगे लगा कर चूमने लगी थी। 

मैं भी उन्हें होठो पर चुम रहा था और साथ से साथ उनके स्तन भी दबा रहा था। उनके लटके स्तन आगे पीछे उछाल रहे थे। 

मैं अपने बाप से छुप कर माँ के साथ देसी चुदाई कर रहा था और मुझे काफी मजा आ रहा था। घर का माल काफी सेक्सी था और मैं अपनी वासना को बंस मिटाने वाला था। 

सौतेली माँ की चुदाई करते रकते मेने उसकी काली चुत को गीला कर दिया था। मैं अपना लंड उनकी चुत में अंदर बाहर अंदर बाहर कर रहा था जिस वजह से माँ ने चुत से अपना माल छोड़ दिया। उनकी चुत और मेरा लंड गाढ़ा सफ़ेद पानी में लथपथ हो गया। 

उसके बाद माँ शांत हो गई पर मैं उनकी चिपचिपी योनी को अपने हथौड़े से पीटता रहा। 

माँ – अहह मैं बेटा तेरा लंड बड़ा मजबूत है !!

मैंने कहा – गांड में लंड दू क्या ?

माँ – अहह अहह उह !! हाँ !!

उसके बाद मैंने उनकी गांड में अपना चिकना लंड दे दिया और मजे से चोदने लगा। 

माँ की आँखे लंड के नशे से नशीली हो गई। गांड में लंड उन्हें और दर्द देने लगा और वो मजे से कामुक सुख का आनंद लेने लगी।

उनकी गांड का छेद और छूट इतने करीब से देख कर मैं भी बोखला गया था इसलिए उनकी उछल उछल कर चुदाई कर रहा था। 

उसके बाद मैंने सौतेली माँ को उठया औरअपनी गोद में बैठा कर उनका चेहरा चुम चुम कर गांड चोदता रहा। 

माँ की पतली कमर को अपनी बाहो में ले कर मैंने उन्हें अपने शिकंजे में जकड़ रखा था। उनके लटके स्तन मेरी छाती से चिपके थे और होठ मेरे होठो से। 

इस तरह बैठ कर मेरी सौतेली माँ अपनी गांड अपगे पीछे हिला कर मेरा लंड अपनी गांड में ले रही थी। 

मेरा लंड उलटे सीधे तरीके से उनकी गांड की चुदाई कर रहा था। मैं माँ की गर्म सासे अपने मुँह पर महसूस करने लगा और मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे। 

अंत में मैं और रुक नहीं पाया और मैंने उनकी गांड में अपना माल भर दिया। माल निकलते ही मेरा लंड नरम हो गया और लसलसा भी। 

माँ चुदाई से तक गई तो वो वापस लेट कर गहरी सांस लेते हुए मुझे देखती रही। लंड माँ माल निकलने के बाद मुझे समज आया की मेने चुदाई के जोश में क्या किया। 

मैं वहा से भाग गया। ये थी मेरी सेक्स स्टोरी हिंदी में अगर आपको अच्छी लगी तो बताना जरूर। अगले दिन सौतेली माँ भी शर्म के मारे मुझ से नजरें चुराती रही और पापा यही पूछते रह गए की तुम दोनों को हुआ क्या है?