Antarvasna Hindi Sex Kahani – पड़ोस की आंटी को किया ब्लैकमेल कामुक अरमानो की संतुष्टि के लिये

उनका शरीर इतना आश्चर्यजनक और सुंदर था जैसे किसी हीरोइन का हो। उनका फिगर एकदम सविता भाभी जैसा था। मैंने आंटी को किसी और  आदमी के साथ पकड़ा। और उनकी वीडियो बनाली, फिर बादमे मैंने उन्हें ब्लैकमेल किया। और वो बादमे मेरे साथ कामवासना लिए मान गई। यह मेरी की पूरी Aunty Sex Story in Hindi है, जोकि बहुत मज़ेदार हैं।  

मेरा  नाम रोहन है और मैं मुंबई में नालासोपारा में रहता हूँ। और ये मेरी Hindi Sex Story हैं, जिसे में आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ। मैं यहां अपने परिवार के साथ रहता हूँ, और पढ़ाई करता था। मैंने बस पिछले साल ही 12वीं पास करी थी, और कॉलेज में एडमिशन के लिए मेहनत कर रहा। लेकिन हर जवान लड़के की तरह मेरे अंदर भी बहुत सारे कामुक इच्छाएं थी। मैं अक्सर रात को पोर्न वीडियो देखा करता था और अपने लंड को मसल रहा था। 

और सोचता था, काश मुझे ऐसी औरत मिल जाए जिसके साथ में ऐसी पोर्न वीडियो जैसी हरकतें कर पाऊ। और वह लड़की कितनी सुंदर हो कि, मैं उसे बोलूं तो मेरा लंड चूसे। इस चुदाई कहानी में आप जानो गे की कैसे मेने पड़ोस की आंटी को किया ब्लैकमेल कामुक अरमानो की संतुष्टि के लिये। 

मेरे अंदर ठरक इतनी बड़ी हुई थी, की मैं Antarvasna story पड़ा करता था, और सोचता था कि भले ही मुझे लड़की ना मिले आंटी भी मिल जाए तो मैं काम चला लूंगा। और मानों, जैसे मेरी यह आवाज भगवान स्वयं ही सुन रहे हो। 

एक दिन एक फैमिली हमारे पड़ोस में रहने के लिए स्विफ्ट हुई। पहले तो मैंने सोचा कास इस फैमिली में कोई सुंदर लड़की हो। जिसे मैं पटा सकूं और उसके साथ खूब मस्ती कर सकूं, उसे अपनी गर्लफ्रेंड बना कर। 

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भगवान ने मेरी दूसरी वाली भी बात सुनली और उस गाड़ी मैसे एक बहुत ही सुंदर आंटी बहार आई। उनकी शादी को बस 5 साल ही हुए थे, और उनके एक ही लड़का था। उन्होंने हमारी तरफ देखा और मुस्कुराए बदले में हमने भी मुस्कुरा दिया। 

कुछ दिन हो गया फिर मैंने मम्मी से बोला वह जो पड़ोस में न्यू फैमिली आई है। चलिए उनसे मिलने चलते हैं। 

मम्मी ने बोला तुम्हें – क्यों मिलना है? मैंने कहा – अरे! अच्छे पड़ोसी होने का फर्ज निभाना चाहिए। दूसरों से मेलजोल रखना चाहिए, कोई किसी भी वक्त काम आ सकता है। 

मम्मी मेरी बात मान गई और अगले दिन हम उनका वेलकम करने के लिए उनके घर गए। हमने काफी सारे वेलकम गिफ्ट भी लिए थे। क्योंकि हम हाई -मिडल क्लास फैमिली को बिलोंग करते थे। और आंटी भी अच्छी खासी हाई-मिडल क्लास फैमिली से ही थी, साथ ही में बहुत ही सुंदर भी थीं। 

जब मैंने आंटी को पहली बार उनके घर पर आमने सामने देखा। तो मैं बस दंग रह गया! उनका शरीर इतना आश्चर्यजनक और सुंदर था जैसे किसी हीरोइन का हो।

उनका फिगर एकदम सविता भाभी जैसा था। उनके बड़े-बड़े स्तन और मोटी-मोटी गांड थी। उनका चेहरा बहुत ही सुंदर बड़ी-बड़ी आंखें और मोटे मोटे होंठ जो कि मानों रस से भरे हो। 

आंटी का सेक्सी शरीर देख मैं उनका देवना हो गया। बड़े बड़े लटकते स्तन और उनपर बड़ी काली चूचिया मैं अपने ही दिमाग में कल्पना करने लगा। जब से मेरा लिंग खड़ा होना शुरू हुआ था तब से ही मेरी इच्छा है की किसी बड़ी औरत के सेक्सी स्तनों को लगातार चूस चूस कर लाल करदु।

आंटी की सेक्सी नरम गांड काफी मस्त थी। मुझे पता था की उनकी गांड से सामने मेरा लिंग छोटा है और मैं उन्हें चोदने से ज्यादा चाटना चाहता हूँ।

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मैं बस उनको ही देख रहा था और आंटी ने मुझे देख कर बोला बेटा क्या देख रहे हो। अब मैं आंटी को कैसे बताऊं, कि आंटी मैं आपके बड़े-बड़े चूची देख रहा हूं। 

मैं आपके सुंदर होठों को देख रहा हूं, जिनको मैं खा जाना चाहता हूं। लेकिन फिर भी मैंने अच्छे आदमी होने का फर्ज निभाया और बोला कुछ नहीं आंटी, आप बहुत ब्यूटीफुल हो। आंटी ने बोला थैंक्यू बेटा, आप भी काफी हैंडसम हो। 

आंटी की यह बात सुनकर मैं अंदर ही अंदर रोने लगा और बोला – साला आज तक किसी लड़की ने हैंडसम नहीं बोला, लेकिन इन आंटी ने मुझे हैंडसम बोल दिया। 

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बस उसी दिन से मैं आंटी के ऊपर फिदा हो गया, और बस, आंटी की लेना चाहता था।

अंकल बहुत ही बिजी आदमी थे,और हमेशा काम के सिलसिले में बाहर ही रहते थे। आंटी उसे हमेशा बोलती थी, कि कुछ वक़्त अपने बच्चे के लिए और मेरे लिए भी तो निकालो। 

इस बात पर अंकल और आंटी का झगड़ा होता था, अंकल कहते थे, कि काम करूं – या तुम सबको देखूं। 

आंटी कहती थी – यह काम अपनी जगह है, और परिवार के साथ समय बिताना अपनी जगह है। यह सब बातें मैं सुनता रहता था, आंटी के घर के पास में खड़ा होकर खेलने के बहाने। 

मैंने सोचा अरे आंटी छोड़ो अंकल को, और मुझे पटा लो, मैं आपको खुश कर दूंगा तन और मन दोनों से। लेकिन मुझे पता था, यह कभी सच नहीं होने वाला है, यह बस मेरी काल्पनिक इच्छाएं हैं।

लेकिन मानो मेरे सितारे बहुत ही बुलंदी पर हो, और मेरी किस्मत बहुत अच्छी चल रही हो। 

मैंने देखा एक दिन, एक आदमी आंटी के घर में गया। पहले मैंने सोचा होगा कोई अंकल का दोस्त, तो फिर मैं आंटी के घर चला गया। 

आंटी ने बोला – अरे! बेटा रोहन तुम क्या कर रहे हो? मैंने बोला – कुछ नहीं आंटी, बस आपके बेटे के साथ खेलने आया हूं। 

आंटी ने कहा – बेटा बहुत अच्छा किया, क्योकि अर्जुन (आंटी का बेटा) बोर हो जाता है, और तुम्हारे अंकल भी काम से बाहर ही रहते हैं। 

मैंने कहा – आंटी तभी तो मैं यहां आया हूं, ठीक है, आंटी में जा रहा हूं, खेलने आपके बेटे के साथ।

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फिर मैंने देखा वह आदमी और आंटी दोनों मिलकर काफी देर तक बात कर रहे थे और बहुत ही खुश थे। जब वह आदमी चला गया तो मैंने आंटी से पूछा यह कौन थे। 

आंटी ने बोला – यह तुम्हारे अंकल के दोस्त हैं, जो बस ऐसे ही मिलने आए थे। 

लेकिन मेरा खुराफाती दिमाग चला क्योंकि मैं बहुत ही हारामी था। और मैंने आंटी के घर पर नजर रखना और जासूसी करना शुरू कर दिया। 

यह उस दिन की बात है, जब मैं आंटी के बेटे के साथ उसके रूम में खेल रहा था। और अचानक वह आदमी आ गया, और मेरे कान बस खड़े हो गए। मैंने चुपके से देखा कि आंटी और वह आदमी दोनों गले लगे हुए हैं। 

और आंटी उसे किस कर रही हैं, और दोनों जुटे हुए हैं। यह दृश्य देखते ही, मैंने अपना मोबाइल निकाला और सारी रिकॉर्डिंग कर ली। और मौका लगते ही अपने घर भाग गया जल्दी से।

मम्मी की जवानी भाग 1

अगले दिन, 

मै आंटी के घर पर पहुंचा और मैंने यह वीडियो आंटी को दिखा दी। 

वह औरत भड़क गई, और बोली – यह क्या मजाक है? तुमने यह क्या किया? 

मैंने बोला – आंटी मैंने तो कुछ किया ही नहीं, जो किया आपने किया है। 

वह औरत बहुत ही समझदार थी, और उसने सीधे ही बोला, तुम क्या चाहते हो? 

मैंने भी सीधे-सीधे बोल दिया, आंटी मैं आपकी लेना चाहता हूं। आंटी एकदम से भड़क गई,

और बोली – मै सोच भी नहीं सकती, तुम ऐसे लड़के हो, मैं तो तुम्हें शरीफ समझती थी। 

मैंने कहा – आंटी जो जैसा होता है वैसा दिखता नहीं है, और मेरी आप पर बहुत ही ठरक है। 

पता नहीं कैसे आंटी ने हां बोल दिया! 

यह शब्द सुनते ही मैंने बोला चलो आंटी कमरे में। मेरा लंड तो पहले ही पूरा खड़ा था, आंटी के हॉट फिगर को देखकर। आंटी ने धीरे-धीरे अपनी साड़ी खोली और अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी। 

उनके बड़े बड़े स्तन को देखकर मेरे हाथ रुके नहीं। और मैंने बस जल्दी से उठ गए चूचियों को दबा दिया और जोर जोर से मसलने लगा। 

मैं अपने शैतानी हाथो से उनकी नरम छाती को अलग अलग तरह से दबाने लगा। मेरे नाखुनो से आंटी की छाती पर निशान पर गए। मैं कभी उनकी छाती दबाता तो कभी उछाल कर उनके वजहं का अंदाजा लगता।

आंटी बोली – यह क्या कर रहे हो? थोड़ा धीरे करो दर्द हो रहा है। 

मैंने कहा – कोई बात नहीं धीरे-धीरे मजा भी आएगा और ऐसा ही हुआ। 

आंटी शांत हो गई और शरारती आवाजें निकालने लगी। फिर मैंने एकदम से आंटी को किस कर दिया और बहुत ही जोर से चूमा। आंटी एकदम से हैरान हो गई, फिर उन्होंने मेरा सिर पकड़ कर मुझे भी चूमने लगी, और हम दोनों लिपट गए। 

हम दोनों में ऐसे चिम्के थे जैसे मानो, दो बदन एक आत्मा हो। फिर मैंने आंटी के ब्लाउज खोल दिया, और उनके बड़े-बड़े मोटे-मोटे चुंचो को देखकर, मेरे लंड से पानी टपकने लगा। मैं आंटी के दोबारा लिपट गया और उनके स्तनों को दबाने लगा साथ ही उनको चूमने भी लगा।

फिर मैंने आंटी की साड़ी खोल दी और अपने लंड को उनकी चूत में डालने ही वाला था। फिर आंटी ने रोक दिया, और बोला अलमारी में अंकल का कंडोम रखा है, वह लगा लो। 

घर का मजदूर और मेरी गांड ! भाग 1

मैंने अंकल का चॉकलेट फ्लेवर कॉन्डम निकाला और आंटी के हाथों में दे दीया। और फिर आंटी ने उस कॉन्डम को अपने ही हाथों से मेरे लंड पर चढ़ाया। उनके हाथों का मेरे लंड को छूना – मुझे अनंत आनंद दे रहा था। 

फिर बस, मैंने कुछ ना सोचा और जल्दी से आंटी की दोनों टांगे उठाई और अपने लंड को घुसा दिया। आंटी एकदम से चीख़ पड़ी, 

और बोली –  अरे! मैंने काफी समय से यह नहीं किया है। यह सुनकर, मैं अपनी कमर को और जोरसे हिलने लगा और आंटी को जोर-जोर से ठोकने लगा। आंटी के चूँचे भी जोर-जोर से हिल रहे थे, 

और आंटी आवाजें निकाल रही थी – “मजा आ रहा है”। 

यह सुनकर मैं और जोश में आ गया, और मैं उस औरत को और जोर-जोर से धकाधक चोदने लगा। मेरी जितनी भी कामुक अपेक्षाएं थी, वह सारी मैंने आंटी के ऊपर उतार दी। 

फिर मैंने आंटी को डॉगी पोजीशन में आने के लिए बोला। आंटी ने अपने बड़े-बड़े चूतड़ को हिलाया और डॉगी पोजिशन में आ गई। उनकी गोल मटोल गांड देखकर, मैंने जल्दी से अपना लंड घुसा दिया। और उन्हें जोर-जोर से पीछे से ठोकने लगा। 

उनकी गांड भी वैसी ही प्रतिक्रिया कर रही थी, जैसे-जैसे मैं उन्हें ठोक रहा था। उनकी गांड जोर-जोर से हिल रही थी, जैसे मानो मैं पंचिंग बैग को मार रहा हूं। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से आंटी के चुचे पकड़े और मैं उन्हें और चोदने लगा। 

चुत पर झापड़ भाग – 2

आंटी की आवाजें सुनकर लग रहा था, उन्हें बहुत ही संतुष्टि मिल रही है। फिर मेरा बस झड़ने ही वाला था, कि मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और कंडोम को हटा दिया। और आंटी के स्तनों पर अपना सारा वीर्य झाड़ दिया। 

आंटी और मैं, हम दोनों जोर-जोर से सांस ले रहे थे, क्योंकि इस कामुकता हरकत ने हमें थका दिया था। फिर आंटी मुस्कराने लगी, 

और बोली – सच में मजा ही आ गया! 

मैं यही तो चाहती थी – कि मुझे कोई संतुष्टि दे पाए, आंटी बोली। 

मैंने बोला – अगर आंटी आप चाहो तो हम यह रोज-रोज कर सकते हैं। जवान और बलशाली लड़का हूं, जिसकी बहुत सारी कामुक और गंदी इच्छाएं हैं। 

और मैं आपको आपके मन के हिसाब से संतुष्टि दे सकता हूं। और वह समझदार औरत मेरी बात मान गई। और हमारा यह सिलसिला या फिर रिलेशनशिप चालू हो गया।

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