मोटी आंटी फंसी वॉशिंग मशीन में!!

मैं अपने दोस्त के घर गया हुआ था, उसके साथ में गेम खेलने के लिए। वही मैंने, उसकी मम्मी को देखा जो बहुत ही मोटी होने के साथ सेक्सी भी थी। आंटी का शरीर इतना सेक्सी और हॉट होने के साथ सही जगह से मोटा भी था। आंटी साड़ी में बहुत ही सुंदर और हॉट लगती थी। 

जब मैंने उनको पहली बार देखा था तो मेरे लंड से पानी टपकने लग गया था। आंटी के बड़े-बड़े स्तन ब्लाउज में इस तरह तंग हुए थे कि दबाने को मन करता था। उनकी साड़ी पहनने का अंदाज और उनका बल खाया हुआ दिखता पेट, बस मेरी वासनाओं को जगा देता था। 

मैं अपने दोस्त की मम्मी को चोद देना ही चाहता था किसी भी तरीके से। परंतु मुझे पता था यह मौका मुझे कभी नहीं मिलेगा यह सिर्फ मेरे ख्याली पुलाव है। और मुझे कभी Aunty Ki Chudai करने को नहीं मिलेगी।  

लेकिन लगता है भगवान मेरा साथ दे रहे थे और मुझे उस दिन एक ऐसा मौका मिला जिस दिन मैंने आंटी की गांड चोदी और उनको पता भी नहीं चला

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एक दिन जब मैं अपने दोस्त के घर गेम खेलने के लिए गया था। मेरे मन में यही विचार थे, अपने दोस्त के साथ गेम तो खेलूंगा लेकिन काश उसकी मम्मी के साथ चुदाई गेम खेलने को भी मिल जाए।

मैं जब अपने दोस्त के घर पहुंचा तो आंटी ने मेरा स्वागत किया और उन्होंने एक लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी। 

उसमें आंटी का बल खाता हुआ बदन और भी ज्यादा सेक्सी लग रहा था। मेरा लंड तो बस वही पर ही खड़ा हो गया था।

और मैंने बोला – आंटी! आज आप बहुत ही सुंदर लग रही हो!!

आंटी – अव्व्व!! शुक्रिया बेटा!!

अच्छा तुम दोनों जाकर गेम खेलो और मैं जरा घर के काम कर लूं, क्योंकि आज रविवार है।

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मैं और मेरा दोस्त ठीक है,

हम दोनों लिविंग रूम में बैठकर गेम खेल रहे हैं और आंटी अपना काम कर रही थी।

परंतु मेरा ध्यान गेम से ज्यादा आंटी के बड़े बड़े स्तनों पर था। वह पोछा लगा रही थी कमरे में और उनका पल्लू नीचे गिरा हुआ था। ब्लाउज का गला इतना बड़ा था कि आंटी के लगभग आधे बड़े-बड़े बलखाते के स्तन दिख रहे थे। उनका फिगर एकदम Desi Sex Stories की वेलम्मा जैसा मनमोहक था।      

उनके स्तन आटे की लोई की तरह बाहर आ रहे हैं जिन्हें दबाने को जी करता था।

आंटी जीतना झुक के काम करती थी, उनके चुँचे उतना ही नीचे लटकते थे और दिखते हैं।

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मेरा ध्यान आंटी के सेक्सी फिगर के ऊपर होने की वजह से, और मेरा दोस्त साला, आज सारी गेम जीत रहा था।

फिर आंटी हमारे पास आई और उन्होंने खाने पीने का सामान रख दिया और कहा – मैं कपड़े धोने के लिए अंदर जा रही हूं अगर तुम दोनों को कुछ चाहिए हो तो बता देना।

“मैं अपने मन में आंटी आपकी गांड चाहिए!!”

और हमारी मोटी सेक्सी आंटी कपड़े धोने के लिए अंदर चली गई और वॉशिंग मशीन में कपड़े डालने लगी।

मैं और मेरा दोस्त, हम दोनों बहुत ही देर से गेम खेल रहे थे। तो मेरा दोस्त थक गया और वह गेम खेलते-खेलते ही सो गया

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इसी बात का फायदा उठाते हुए, मैंने यह देखना चाहा कि आंटी क्या कर रही है!

जब मैं आंटी को देखने के लिए पहुंचा, तो.. मैंने यह देखा कि आंटी वाशिंग मशीन में घुसी पड़ी है

पहले तो मुझे लगा वह कपड़े निकाल रही होंगी हाथ नहीं पहुंच रहा होगा।

परंतु वह वॉशिंग मशीन के अंदर अटक गई थी – हा! हा! हा! हा! “में मन ही मन खुश होने लगा”। 

आंटी का आधा बदन वॉशिंग मशीन के अंदर था और गांड वाला हिस्सा वॉशिंग मशीन के बाहर था

वह बोल रही थी – कोई मुझे बाहर निकालो… कोई मुझे बाहर निकालो…  रोहन!! (आंटी का बेटा और मेरा दोस्त)

परंतु अच्छा हुआ वह साला सो रहा था और वॉशिंग मशीन के अंदर से ठीक से आवाज नहीं आ रही थी, बाहर तक।

मैं बिना कुछ बोले चुपके से आंटी के पास गया।

और मैंने उनकी साड़ी ऊपर उठा दी।

आंटी – कौन है? बेटा रोहन तुम हो क्या??!

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परंतु मैं कुछ ना बोला और मैं आंटी की बड़ी गोल गांड को दबाता रहा अपने हाथों से।

आंटी – अरे! कौन है? कोई कुछ बोलता क्यों नहीं है?! बताओ कौन है? मुझे बाहर निकालो!!!

परंतु मैं आंटी की गांड बहुत जोर-जोर से दबा रहा था और उनकी गांड दबाते-दबाते मैंने अपना लंड बाहर निकाला।

मैंने एक गहरी सांस ली और सोचा यह मौका कभी नहीं मिलेगा और फट से मैंने अपना लंड आंटी की गांड में घुसा दिया।

आंटी एकदम से चीख पड़ी और बोली – कौन है… यह क्या कर रहा है…. आह.. आह… दर्द हो रहा है!!

“कौन मेरी गांड मार रहा है?!!”

मैं आंटी को घचाघच चोदने लग गया और मैं उनकी गांड की चुदाई जबरदस्त कर रहा था।

आंटी – मत करो ना… कौन है?? मैं शादीशुदा औरत हूं…..!!

आंटी अपनी टांगें हिला रही थी और अपनी गांड को इधर-उधर कर रही थी ताकि मेरा लंड निकल जाए।

परंतु मैं भी बहुत हारामी था और मैंने उनके कांड जोरसे पकड़ी, और उनकी गांड की प्रचंड चुदाई करने लगा बहुत ही तेजी से। 

मैं खचाखच, थप्पड़-थप्पड़ आंटी की गांड चोद रहा था। जितनी बार मैं आंटी को चोदता था, उतनी बार उनकी गांड बहुत तेजी लहराने लगजाती थी। उनकी गांड बहुत ही जोर से हिलने लग जाती थी मानों किसी “गद्दे में मुक्का मार दिया हो”।

यह देखकर मैं और भी और ऊर्जा से भर जाता था और मैं उनकी गांड पर थप्पड़ मार मार के उन को चोद रहा था।

आंटी – आ.. आ.. आ… अरे!! धीरे से करो ना… मुझे मारो तो मत!!!!

इतनी जबरदस्त चुदाई तो मेरे पति ने भी नहीं करी कभी मेरी गांड की।

और आंटी मुझे लात मार के हटाने की कोशिश करने लगी। 

लेकिन मैंने आंटी के दोनों टांगों को पकड़कर खींचा और अपना डंडे जैसा लैंड मैंने पूरी जान से आंटी की गांड में घुसा दिया। मेरा लंड मेरे तत्तो तक आंटी की गांड में घुसा हुआ था।

और मैंने अपना पूरा लंड घुसा रखा था और मैं बिल्कुल भी फील नहीं रहा था। जिससे आंटी को बहुत ही ज्यादा दर्द हो रहा था और वह अपनी कांड को दाएं-बाएं हिला रही थी।

आंटी – कौन है? जो मेरी इतनी बेहरेहमी चुदाई कर रहा है….!!

मुझे बहुत ही दर्द हो रहा है…. और मेरी वासना बहुत ज्यादा बड़ती जा रही है… चोदो मुझे.. बस जल्दी से यह सब खत्म करो!!

तुम कौन हो, मैं नहीं जानती.. लेकिन यह बात मैं किसी से भी नहीं कहूंगी, बस जल्दी से यह चुदाई खत्म करो!!!

और यह सुनते ही मेरे अंदर घोड़े की ताकत आ गई। और मैं बड़ी ही तेजी से किसी घोड़े की तरह आंटी को दबा दबा कर चोदने लगा।

मैं आंटी को अपना पूरा दम लगा कर चोद रहा था बस मैं उनकी गांड फाड़ देना चाहता था चोद-चोद कर।

और आंटी अंतर्वासना के दर्द से चिल्ला रही थी – आह! आ! आ! आ! आ!! ऊह… ऊह…!

और बस कुछ ही देर में मेरा झड़ने वाला था तो मैंने अपनी रफ्तार दोगुना तेज कर दी।

और जैसे ही मेरा सारा माल झड़ने वाला था, मैंने अपना लंड आंटी की गांड में पूरा डाल कर अपना सारा माल निकाल दिया।

मैंने बूंद-बूंद तक आंटी की गांड में निचोड़ दी जिससे मेरे टट्टे हल्के हो गए हैं।

अपना काम खत्म करने के बाद मैंने अपने दोस्त को जगा दिया।

और बोला – वहां अंदर से आंटी के चिल्लाने की आवाजें आ रही है?!

मेरा दोस्त उठा और उसने जाकर आंटी को वॉशिंग मशीन में से निकाला।

आंटी थक गई थी और पसीना-पसीना हो गई थी और वह बहुत जोर-जोर से सांसे भर रही थी।

मेरा दोस्त – मम्मी क्या हुआ, तुम ठीक तो हो ना??!!!

आंटी – हां…. मैं… ठीक… हूं..!

क्योंकि मैंने आंटी की इतनी जबरदस्त चुदाई करी थी तभी आंटी इतनी ज्यादा थक गई थी और एक दम टूट गई थी।

क्योंकि चुदाई के दौरान आंटी का कई बार चरमसुख हुआ था जिससे उन्हें अलग ही स्तर का वासना आनंद प्राप्त हुआ था।

और मेरा सपना सच हो गया और मैं हंसते हुए अपने घर चला गया।

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