मेरे पड़ोस के लड़के गे थे

दिल्ली की कविता जब शादी कर के अपने पति के साथ लखनऊ जा कर रहने लगी तो उसने पहली बार गे लड़को को सेक्स करता देखा। कविता का कहना है की उसके पड़ोस में कुछ कॉलेज के लड़के किराये का मकान ले कर रह रही थे। जब कविता उनके घर किसी काम से गई तो उसे पता लगा की उन लड़को की साथ रहने की वजह पढाई नहीं बल्कि चुदाई थी। कविता अपनी कहानी मेरे पड़ोस के लड़के गे थे से हमें ये बताना चाहती है की लड़के चाहे कितने भी मर्दाना दीखते हो अंदर से कोई न कोई समलैंगिक होता ही है। 

मैं शादी के बाद से ही अपने पति के साथ लखनऊ जा कर रहने लगी। शादी के बाद से ही मेरी जिंदगी में अच्छी बदलाव आना शुरू हो गए। पर कुछ दिनों बाद मैंने कुछ ऐसा देखा जिसे देख मेरी आंखे बाहर आ गई। 

जो मैंने देखा उसी को मैं आज इस वेबसाइट पर बड़ी हमत कर के बताने जा रही हूँ। अगर आप गे लड़को की तरफ आकर्षित होते है तो आपको मेरी Gay Antarvasna Kahani काफी पसंद आने वाली है। 

 उस दिन मैं अपने पति को दुकान पर खाना दे कर घर आ रही थी। घर आते ही मैंने देखा की जहा मैं अपनी स्कूटी खड़ी करती हूँ वहा किसी और ने अपनी गाड़ी खड़ी कर रखी है। 

मैंने आस पास के लोगों से पूछा तो किसी को नहीं पता था की गाड़ी किसकी है और कौन खड़ी कर के गया। तभी गली में खेलने वाले बच्चो ने बताया की ये गाड़ी कोई लड़का खड़ी कर के गया था और वो जतिन भइया के घर में चला गया। 

जतिन मेरे पड़ोस का लड़का है जो यहाँ किराये के मकान में अकेला रहता है। घर वालो से मनमुटाव होने के बाद वो अकेला रहने लगा और अपना सारा ध्यान उसने अपनी जॉब और कॉलेज में ही लगा दिया। 

वो काफी पैसे वाले परिवार से था इसलिए उसे अकेले रहने में कोई दिकत नहीं थी ऊपर से उसकी माँ उसकी मदद भी करती रहती थी। जतिन के साथ एक और लड़का था जिसका नाम अनुराग था। वो भी उसे के साथ रहता था जिसके बारे में मुझे ज्यादा कुछ नहीं पता था। 

वो गाड़ी काफी महंगी थी मुझे लगा की कोई अमीर लड़का ही मिलने आया होगा आखिर जतिन भी तो अमीर ही है। 

मैं उसके घर गई तो अंदर से काफी तेज गानो की आवाज आ रही थी। मैंने गेट जोर जोर से बजाई और जतिन का नाम भी पुकारा पर अंदर से कोई वजब नहीं था।

बाहर का दरवाजा पहले से खुला था शायद वो भूल गया होगा। मैं दरवाजा खोल कर अंदर गई तो सबसे पीछे वाले कमरे से तेज झापडो की आवाज आ रही थी। 

बिल्कुल ऐसी आवाज आ रही थी जैसी मेरी गांड से अति है जब मेरा पति मुझे चोदता है। मैं धीरे धीरे घर के अंदर गई तो मैंने जो देखा उसे देख मेरी योनी सुलगने लगी। 

अंदर बिस्तर पर अनुराग लेटा था और और नया लड़का उसकी गांड में अपना लिंग डाल रखा था। लंड घुसा कर वो उसे चोदे जा रहा था और ऊपर से जतिन के साथ चुम्बा चाटी भी कर रहा था। 

ये सब देख पहले तो मुझे घिन आने लगी क्यों की मैंने पहली बार गे सेक्स अपनी आँखों से देखा था। 

मैं वही छुप कर उन्हें जरवाजे के कोने से देकने लगी और थोड़ी देर में मेरी योनी से पानी टपकने लगा। 

अनुराग और जतिन काफी पतले लड़के थे पर वो नया लड़का बॉडीबिल्डर जैसा तगड़ा था। जिसे देख मैं भी वही कामुक होने लगी। 

जतिन किसी लड़की की तरह उसकी मर्दाना छाती को छूते छूते उसे होठो पर चुम रहा था। 

मुझे अपने पति के साथ रहते हुए 6 महीने हुए थे और आज पहली बार मैंने जतिन का ये रूप देखा। 

जतिन उसके होंठ चूमते चूमते उसकी छाती और पेट चूमने लगा और वो लड़का अपनी कमर हिला हिला कर अनुराग की गांड में लंड देता रहा।

अनुराग -अहह अहह और अंदर कर !! 

अनुराग बिस्तर पर घोडा बना हुआ था और अपनी गांड चुदवा रहा था साथ ही नीची हाथ देकर वो अपना ढीला और लटका लंड भी हिला रहा था।

तभी जतिन अनुराग के नीचे हाथ देकर उसका लंड हिलाने लगा। वो उसे ऐसे खींच रहा था जैसे किसी गाय का दूध निकाल रहा हो।   

जतिन लंड हिलाते हिलाते अनुराग के नीचे लेट गया और उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगा। उसके बाद वो बॉडीबिल्डर लड़का जतिन का लंड हाथ में लिया और उस की मुठ मारने लगा।

जतिन का लंड पतला और लम्बा था साथ ही उसके लिंग का ऊपरी हिस्सा काफी मोटा था। जिसे मैं अपनी चुत में लेने के सपने देखने लगी। मैं यही सोचने लगी की अगर जतिन का लंड मेरी चुत में होता तो उसके मोटे टोपे की रगड़ किसी होती। 

वो तीनो एक दूसरे की गांड ले रहे थे और अंदर से चुदाई की तेज आवाजे आ रही इसलिए उन्होंने तेज गाने बजा आँखे थे। 

कुछ देर बाद वो बॉडीबिल्डर भी अपनी गांड में लंड लेने लगा। उसकी गांड जतिन चोद रहा था। जतिन उसकी गांड पर जगतार हाथ फेर रहा था और कभी कभी लंड निकाल कर गांड में ऊँगली भी कर रहा था। 

साथ ही अनुराग जतिन के निपल्स चाटने लगा और अपने लंड से मुठ मरता रहा। तीन खड़े लोडे देख मैं भी कामुक हो गई और मेरा मन चुत में ऊँगली करने का करने लगा। 

पर वो जगह और वक्त सही नहीं था इसलिए मैं बस उहे एक दूसरे की चुदाई करते हुए देखती रही। मेरा वहा से हटने का दिल नहीं कर रहा था। 

जतिन बॉडीबिल्डर की गांड चोद रहा था। बॉडीबिल्डर की मर्दाना गांड भी काफी अच्छी गोलाई थी। अनुराग उन दोनों को सेक्स करता देख अपना लंड हिताला रहा और तभी जतिन ने अनुराग के गोटे पकड़ लिया। 

गोटे पकड़ कर जतिन उन्हें उलटे सीधे तरीके से मसलने लगा जिस वजह से अनुराग ने अपने लंड से पानी छोड़ दिया। अनुराग के लंड का माल सीधा बॉडीबिल्डर की गांड पर गिर गया। 

कुछ देर चुदाई करने के बाद जतिन ने भी अपना माल उसकी गांड में छोड़ दिया। अब बॉडीबिल्डर सीधा लेता और जतिन और अनुराग दोनों उसका लंड चूसने लगे और उसे चरम सुख तक लेजाने लगे। उसका तना लंड देख मैं भी कामुक होने लगी और मजबूर होकर मैं साड़ी के ऊपर से अपनी योनी सहलाने लगी। 

अनुराग उसके टटे मुँह में ले कर चूसने लगा और जतिन उसका लंड हिला हिला कर चुस्त रहा। 

बॉडीबुलडेर – अहह बस ऐसे ही चुसो दलों !!

उसके बाद जतिन ने उसका माल अपने गले से नीचे उतार लिया और बस तीनो एक दूसरे को गले लगा और लेटे रही। 

तीनो के लिंग लटक गए और माल से लसलसे हो रखे थे। उनका मुँह भी लंड के पानी से गन्दा था और वो तीनो वैसी ही हालत में सो गए। 

अब मैं क्या करती पैसे वाले लोगो के तो शोक ही अलग होते है। 

मैं धीरे से बाहर निकली  अपनी स्कूटी कही और खड़ी कर के घर चली गई। 

उस घटना के बाद कुछ देने तक मेरे दिमाग में वही सब घूमता रहा जो मैंने देखा। 

तो दोस्तों ये थी मेरी आँखों देखि हिंदी सेक्स कहानी अगर आपको अच्छी लगी तो कमेंट करना और www.antarvasnastory.net को अपना प्यार देना।