Indian Sex Story: स्त्री और समाज – 4

शायद उसने सेक्स पावर की गोली ली थी, फिर उसने मुझे टेबल में बैठा दिया और मेरी एक टांग ऊपर करके चोदने लगा। फिर मेरी ऐसी चुदाई पहली बार हो रही थी मुझे चरमसुख प्राप्त हो रहा था। इस Indian Sex Story को पूरा पढ़े कहानी में अश्लीलता, सेक्सी चुदाई, और गालिया भड़ी हुई है तो पूरा मज़ा लेना है तो कहानी को पूरा पढ़ना। ऐसी कहानी तुमने आज तक नहीं पढ़ी होगी।

हैल्लो दोस्तों उम्मीद करती हूँ आप सभी लोग ठीक होंगे स्वस्थ होगें। आपसे मैं क्षमा चाहती हूँ कि कहानी अपलोड करने में देरी हो कुछ पर्सनल कारणों से। यह स्त्री और समाज – 4 Part है, यदि आपने कहानी के पिछले तीन भाग नहीं पढ़े है तो उन्हें जाकर पढ़ ले, जिससे आपको स्टोरी पढ़ने में मज़ा आये।

🧡 स्त्री और समाज – 1

🧡 स्त्री और समाज – 2

🧡 स्त्री और समाज – 3 

तो चलिए ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए कहानी स्टार्ट करते हैं।

जैसा कि आपने देखा मैं बहुत खुश थी मुझे जिंदगी के सारे सुख मिल रहे थे दीपक मेरी हर जरूरत ख्याल रखता था।

दीपक रोज़ मेरी मस्त चुदाई करता था और मुझे चरमसुख तक पहुँचाता था। ऐसे ही एक दिन दीपक ऑफिस से घर

आया मैंने और मैंने दरवाजा खोली और बोली आइये पतिदेव। उसने तुरंत समान टेबल पर रखा और मुझे खींचकर

दीवार से सटा दिया और जोरदार किस करने लगा। मैं भी मदहोश होने लगी थी। जैसे तैसे मैंने खुद को छुड़ायी और

बोली थोड़ा सब्र तो करो यार अभी रात होने में टाइम हैं वो बोला जिसके पास इतनी सुन्दर बीवी हो भला वो सब्र कैसे

कर सकता है। मैंने बोली अच्छा जी ! वैसे हमारी शादी कब हुई बताए जरा ? 

वो बोला शादी तो नहीं हुई मेरी जान

लेकिन मैं तुमको दिल से बीवी मानता हूँ तुमको सच्चे मन से चाहता हूँ और तुमसे सच्चा प्यार करने लगा हूँ अब मैं

तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता आई लव यू सोनाली। इतना बोलकर उसने मुझे गले से लगा लिया। कहीं न कहीं मैं भी

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दीपक से प्यार करने लगी थी मैंने कहा- मैं भी तुमको पसंद करने लगी हूँ। 

फिर हम दोनों रोमांटिक हो गए और एक

दूसरे को किश करने लगे। इतने स्नेहा आ गयी क्योंकि दरवाजा खुला था तो सीधे अंदर आ गयी और हमको किश

करते हुए देख लिया। और वो बोली – ओह सॉरी ! लगता हैं गलत टाइम में आ गयी। फिर हम झट से अलग हुये और इधर उधर देखने लगे फिर दीपक बोला- मैं कपड़े बदलकर फ्रेश हो कर आता हूँ। ठीक है जी, मैं भी डिनर की तैयारी करती हूँ। फिर स्नेहा बोली रूको तो दीदी आप कहा जा रही हो थोड़ी देर रूको तो। फिर मैं और स्नेहा सोफ़े पर बैठ गये।

स्नेहा बोली- क्या भाभी आपके तो फुल मज़े है। 

मैं बोली- क्या कुछ भी बोल रही है तुम। स्नेहा- हाँ सही हैं बोल रही हूँ मैं। 

मस्त चुदाई होती हैं तुम्हारी चीख़ें मेरे कमरे तक सुनायी देती हैं। स्नेहा की बातें सुनकर मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी

स्नेहा बोली- अरे भाभी आप तो शरमा रही हैं शर्माने की जरूरत नहीं हैं। मैं बोली- स्नेहा, सच कहूँ तो मैं बहुत खुश हूँ।

दीपक मेरी हर जरूरत की पूर्ति करता हैं। मैं शारिरिक रूप से ही नहीं मानसिक रूप से भी बहुत खुश हूँ।

स्नेहा बोली – हाँ भाभी वो तो आपके चेहरे की मुस्कान बता रही है। मैं मुश्कुरायी और काम करने किचन चली गयी।

कुछ देर रमेश का कॉल आया मैंने बोली – हेलो कितने दिनों बाद कॉल कर रहे हो ? 

वो बोला – क्या करूँ डार्लिंग काम मे बहुत व्यस्त था तुम भी तो कॉल कर सकती हो तुमको मेरी याद नहीं आती क्या? 

मैं मन में बोली- ( तुम्हारे दोस्त के साथ रंगरेलियां मनाने से फुरसत मिले तो तुम्हारी याद आये न ) 

मैं बोली- वो मैं इसलिये फ़ोन नही लगती की आप काम में व्यस्त होंगे आपको डिस्टर्ब हो जाएगा। 

फिर वो बोला- रात तो कर सकती हो जान! मैं सोची- (रात में तुम्हारा दोस्त मेरी इतनी मस्त चुदाई करता है कि तुम्हारा ख्याल ही नहीं आता।) 

मैं बोली- रात में आप थक जाते होंगें इसलिए कॉल नहीं करती। रमेश बोला- ओह मेरी जान! तुम मेरे बारे में कितना सोचती हो मैं कितना लकी हूँ कि तुम्हारी जैसी बीवी मुझे मिली। 

खैर अब ये झेलने की जरूरत नहीं मेरी कंपनी का प्रोजेक्ट कम्पलीट हो गया है मैं आज रात ही यहाँ से निकल रहा हूँ। कल सुबह तक वहाँ पहुँच जाऊंगा। 

मैं आश्चर्य से बोली- क्या? रमेश बोला- क्यों तुमको मेरा आना अच्छा नहीं लगा क्या? मैं बोली- नहीं, ऐसी बात नहीं हैं मैं तो खुशी से बोली मुझे यकीन नही हो रहा कि आप आ रहे है। वो बोला- सच में आ रहा हूँ डार्लिंग ! ठीक है अब फ़ोन रखो कल में ढेर सारी बात करेंगे ठीक है गुड नाईट! 

मैं भी बोली गुड नाईट और फ़ोन रख दी। मैं बहुत उदास हो गयी समझ नहीं आ रहा था कि दीपक के बिना कैसे रहूँगी इतने महीनों में जो खुशी मिली वो पहले कभी नही मिली थी। फिर मैं डिनर रेडी करके स्नेहा से बात करने लगी उसको बतायी की कल तेरे भैया वापस आ रहे हैं वो खुश हो गयी और बोली- ये तो अच्छी बात है अब हमको और ज्यादा नाटक करने की जरूरत नहीं हम वापस अपने घर चले जायेंगे। 

मैं थोड़ी उदास थी स्नेहा पूछती है आप खुश हो न भैया वापस आ रहे हैं 

मैं बोली- हाँ, खुश तो हूँ लेकिन इतने दिनों से इस घर में रह रहे हैं यहाँ की याद तो आएगी। वो बोली घर की या दीपक की? कहीं आपको दीपक से प्यार तो नहीं हो गया। 

अब मैं स्नेहा को नहीं बता सकती थी दीपक से मुझे सच मे प्यार हो गया है नहीं तो उसे लगेगा मैं उसके भैया को धोखा दे रही हूँ स्नेहा ओपन माइंड की जरूर थी लेकिन वो प्यार और सेक्स को अलग अलग नज़रिये से देखती थी। मैं बोली- नहीं ऐसा कुछ नहीं है। 

वो बोली- तो फिर ठीक है मैं नहीं चाहती कि भैया और आपके रिश्ते में किसी प्रकार दरार आये वो आपसे से सच्चा प्यार करते हैं चलो अब डिनर कर लेते हैं। फिर हम डिनर करने लगे और दीपक भी हमारे साथ डिनर करने लगा। दीपक को मैं बतायी की रमेश का कॉल आया था वो कवो कल सुबह आ रहा हैं। 

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दीपक भी थोड़ा उदास हो गया स्नेहा का मन रखने के लिए उसने बोला- ये तो अच्छी बात है बहुत दिनों से उससे मुलाकात नहीं हुई है। 

हमारा डिनर हो गया फिर मैंने अपना सारा सामान स्नेहा के रूम में ला ली। फिर मैं स्नेहा के ही साथ बेड पर लेट गयी। कुछ देर में स्नेहा को नींद लग चुकी थी। मुझे नींद नहीं आ रही थी फिर फ़ोन में एक मैसेज आया। वो मैसेज दीपक का था। मैसेज में लिखा था मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है मेरे कमरे में जल्दी से आ जाओ। 

मैं नाइटी पहनी हुई थी और अन्दर कुछ नहीं पहना हुआ था। मैंने देखी स्नेहा सो चुकी हैं मैं धीमे पाओ रूम से बाहर निकली और दीपक के रूम में चली गई। मैंने देखी दीपक ने खाफी शराब पी रखी है। 

दीपक उठा और मुझे बैठने को कहा – और मैं बैठ गई। फिर उसने दरवाजा बंद किया और मेरे पास आकर बैठ गया। यार मैं बहुत दुःखी हूँ मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा मुझे तुमसे प्यार हो गया है। 

मैंने बोली – मैं भी बहुत उदास हूँ मुझे भी बहुत बुरा लग रहा हैं। लेकिन हमारा साथ यही तक था मुझे अब चलना चाहिए। इतना बोलकर मैं जाने लगी। फिर दीपक ने मेरा हाथ पकड़ लिया और घुमाकर अपनी खिंचा। हमारा मुँह एक दूसरे के सामने था मेरी नज़रे झुकी हुई थी । 

मैंने बोली – दीपक अब ये हम लोग नहीं कर सकते कल रमेश आने वाला है स्नेहा को अच्छा नहीं लगेगा। 

दीपक बोला- मेरी आँखों में आँखे डालकर बोलो कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती तुम मेरे बिना खुश रह सकती हो, मैं तुम्हें जाने दूँगा। मैंने नज़रे ऊपर की मेरे आँखों से आँसू आ रहे थे। 

मैं चुप बस देख रही थी, दीपक बोला- चुप क्यों हो बोलो सोनाली।पता नहीं कैसे मेरे मुँह से अचानक से निकल गया कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुम्हारे बिना ख़ुश नहीं रह सकती। शायद ये दिल की आवाज थी जो ज़ुबाँ में आ गई थीं। इतना सुनते ही दीपक ने मुझे जोरदार किश किया और पागलों की तरह होंठ चूसने लगा। 

मैं भी Antarvasna गरम होने लगी थी मैं अब उसका साथ देने लगी थी उसकी पीठ पर हाथ फेर रही और वो अपने दोनों हाथों से मेरी गांड मसल रहा था। थोड़ी देर बाद उसने मुझे गोदी में उठा लिया और पलँग में पटक दिया और अपने सारे कपड़े उतारने लगा और बोला आज तेरी ऐसी चुदाई करूँगा कि जिंदगी भर याद रहेगा। 

दीपक चुदाई करते वक़्त जानवर बन जाता हैं गन्दी गलियाँ देता हैं जिससे मैं और ज्यादा उत्तेजित हो जाती हूँ। फिर मैंने भी अपनी नाइटी खोल दी और पूरी नंगी हो गई। 

मुझे नंगी देखकर दीपक और पागल हो गया और बोला आज तेरी खेर नहीं तुझे कच्चा चबा जाऊँगा। और मेरे ऊपर आकर। लेट गया और होंठ चूसने लगा चूसते चूसते उसने दाँत से होंठ काट दिया जिससे खून निकलने लगा…

उसने उसे भी चूस लिया। फिर गर्दन पर किश करने लगा और हाथों से बूब्स दबा रहा था। मैं उसका सर पकड़कर

सहला रही थीं और जोर -जोर से सिसकियां ले रहीं थीं। इस पर दीपक बोलता हैं, क्यों मेरी रण्डीजान मज़ा आ रहा हैं न?

मैं बोली- हाँ जानू बहुत मज़ा आ रहा हैं। उसनें एक दो बार मेरी गर्दन में काट दिया था। मेरे भी नाखूनो के निशान

उसकी पीठ पर बन गये थे। काफ़ी रफ़ सेक्स चल रहा था हमारे बीच। वो फिर बूब्स पर टूट पड़ा और जबरदस्त चूसने लगा, 

और बोला – क्या मस्त बूब्स हैं छिनाल तेरे मन करता हैं जिंदगी भर चूसता ही रहूँ। मैं बोली- चुसो राजा आह आह! वो बोला आवाज कम निकाल रंडी स्नेहा जाग जायेगी। 

मैं बोली – जागती है तो जगने दो उसे भी पता चले उसकी भाभी की कितनी मस्त चुदाई हो रही है। वो जोश में आ गया और फिर नीचे जाते हुए मेरी चूत चाटने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था मैं झड़ने वाली थी और थोड़ी देर में दीपक के मुँह में ही पानी छोड़ दी। उसने मेरा पूरा रस पी गया।

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फिर उसने कहा- चल उठ मेरा लंड चूस साली। फिर मैं उसका लण्ड चूसने लगी उसका लण्ड पहले से ज्यादा टाइट हो गया फिर उसने मुझे रोक दिया और पलँग में धकेल दिया और मेरी टाँगों को उठाकर कंधे पर रख लिया। और मेरी चूत में लण्ड रगड़ने लगा और, 

बोला- और मेरी रखैल बोल रमेश चूतिया हैं। 

मैं बोली – रमेश चूतिया हैं वो बोला- बोल तू हमेशा मुझसे चुदाई करवाएगी। 

मैं बोली – हाँ मेरे राजा! तुमसे चुदती रहूँगी अब और मत तड़पाओ मेरी चूत में लण्ड डालो।

फिर एकदम से अपना लौड़ा उसने मेरी चूत में डाल दिया। मेरी मुँह से चीख़ निकल गयी। 

मैं बोली – धीरे राजा! 

लेकिन,

वो कहा सुनने वाला था उसने वाला था उसने मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करना शुरू कर दी। मेरे आँसू निकल रहे थे और मेरी चीखों से पूरा कमरा गूँज रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे मज़ा आने लगा और मैं भी उसका गांड उठाकर साथ देने लगी थोड़ी देर बाद मै फिर से झड़ गयी। 

लेकिन दीपक ने मेरी चुदाई जारी रखा और फिर हमने पोजीशन चेंज करी दीपक बिस्तर में लेट और मै उसके लण्ड में बैठकर उचक उचक के चुद रही थी। 20 मिनट बाद मेरा फिर से पानी निकल और मैं दीपक के ऊपर लेट गयी और उसको किस करने लगी। मैं तीन बार झड़ चुकी थी और बुरी तरह से थक चुकी थी लेकिन दीपक का अभी तक पानी नहीं निकला था शायद उसने सेक्स पावर की गोली ली थी।

फिर उसने मुझे टेबल में बैठा दिया और मेरी एक टांग ऊपर करके चोदने लगा। फिर मेरी ऐसी चुदाई पहली बार हो रही थी मुझे चरमसुख प्राप्त हो रहा था थोड़ी देर में मैं फिर से झड़ लेकिन वो मुझे चोदे जा रहा था फिर वो गोदी में उठाकर खड़े खड़े चोदने लगा और काफी तेजी से धक्के मार रहा था अब वो झड़ने वाला था। 

मैं बोली – नहीं राजा अंदर नहीं। लेकिन उसने एक झटका मारा और सारा वीर्य चूत में ही छोड़ दिया। और अपना लन्ड अंदर ही डाले रखा और बिस्तर पर गये। और फिर उसने लण्ड बाहर निकाल लिया उसका लण्ड पूरा वीर्य से भरा था। मैं बहुत थक चुकी थी। मैं अब जाने लगी थी, 

उसने बोला – अरे मेरा लण्ड तो साफ कर दो जानू।

फिर मैंने उसका लण्ड चूस के साफ़ कर दिया लेकिन उसका लण्ड फिर से खड़ा हो गया। मैं बोली ठीक है अब मुझे

चलना चाहिए। 

वो बोला- अभी कहा बहन की लौंडी? अभी तो तुझे पूरी रात पेलूँगा। 

और मेरे बूब्स दबाने लगा!!!

मैं बोली – नहीं राजा मैं वहुत थक चुकी हूँ और मेरी चूत में दर्द हो रहा है। 

वो बोला – तो क्या हुआ अभी तो तेरे पास एक और छेद हैं फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और जोर से थप्पड़ मारा और, 

बोला – चल मेरा लण्ड चूस रण्ड। फिर वो मेरे बाल पकड़कर लण्ड चूसवाने लगा। थोड़ी देर में उसका लन्ड टाइट हो गया मैं भी गरम हो गयी थी। फिर वो उठा और मेरे चूतड़ को मार मार कर लाल कर दिया फिर अपना लण्ड गांड में पल दिया मैं दर्द के मारे चिल्ला रही थी और वो मेरे चूतड़ पर हाथ से मारते हुए मेरी गांड मार रहा था। 25 मिनट बाद वो झड़ गया। ऐसी चुदाई तो मेने सिर्फ Desi Sex Stories  में पढ़ी और वो मुझे सचमे किसी रंडी तरह चोड रहा था।    

और मुझे किस करने लगा और आई लव यू बोलने लगा। मैं भी उसे आई लव यू बोली। वो मुझसे चिपक के लेट गया और प्यार भरी बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं बोली- कल मैं चली जाऊंगी तुमको बहुत मिस करूँगी। वो बोला- तुम कही नहीं जाओगी तुम मेरे साथ रहोगी मेरी बीवी बनकर, मैं कुछ करता हूँ। मैं क्या ऐसा सच में हो सकता हैं। वो बोला – हाँ मेरी जान! 

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फिर मैं उसको किस करने लगी। इतने में उसका लण्ड फिर से खड़ा हो गया। वो बोला- मेरा साँप बड़ा हो गया है अब इसे बिल में डालना होगा। 

फिर मैं बोली- डालो किसने रोका हैं। उसने मेरी चुदाई फिर से शुरू कर दी। सुबह के चार बजे तक उसने मुझे कई बार चोदा। दीपक सो गया और मैं भी नाइटी पहन कर स्नेहा के रूम में आ गयी मुझसे चला भी नहीं जा रहा था।

मैंने देखी स्नेहा सोई हुई हैं। मैं जाकर लेट गयी। फिर मुझे आवाज आई, आ गयी गांड मरवा के। वो आवाज स्नेहा की थी वो जगी हुई थी।

मैं बोली – दीपक मुझसे बहुत रिक्वेस्ट कर रहा था, प्लीज आखरी बार मुझे चोदने दो,

कल रमेश आएगा तो मैं तुम्हें चोद नहीं पाऊंगा। मैं सोची दीपक ने हमारे लिए बहुत कुछ किया है तो उसकी एक विश तो पूरी कर ही सकती हूँ। वो बोली- ठीक है लेकिन आगे से तुम उससे नहीं चुदूँगी। तुम सिर्फ मेरा भाई चोदेगा। नहीं

तो मैं भाई को सब बता दूँगी कि किस तरह तुम उसके दोस्त से चुदती थी। मैं बोली ठीक है। और हम लोग सो गए।

आगे आप देखोगे की मेरी जिंदगी में क्या नया मोड़ आता है।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे जरुर बताये। आप मुझसे मेरे नंबर या एड्रेस के बारे में न पूछे। सिर्फ कहानी के

बारे में ही पूछे। मैं रिप्लाई जरूर करूँगी।

आप मुझे [email protected] मेल कर सकते हैं।

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