गांडू गे की गांड चुदाई

पटना के रहने वाले रवि ने पहली बार एक गे इंसान की चुदाई की। उसने अपनी कहानी में बताया की जब पार्क में एक गे आदमी ने उसे बहलाया तो वो वही उसकी गांड चोदने के लिए मजबूर हो गया। गांडू गे की गांड चुदाई कहानी हम सभी को ये बताती है की कभी पार्क में अकेला न बैठे। 

मैं उस दिन अपने घर से भाग गया था। बीवी की रोज की कीच कीच और घर की जिम्मेदारी की वजह से मैं काफी निराश था। मैं अकेला घर से निकला और सुबह सुबह एक पार्क में जा कर अपने आप को शांत करने लगा। 

जाड़े का मौसम था और मैं अकेला एक बेंच पर बैठा अपनी किस्मत कोस रहा था। तभी एक लड़का मुझे देखने लगा। वो काफी गोरा था और दिखने में ठीक ठाक था। 

वो मुझे देखता हुआ मेरे पास आने लगा। चलते चलते वो मटक भी रहा था। वो मेरे पास आया और मुझे ऊपर से नीचे देखने लगा। 

गांडू गे – क्या हुआ काफी गुस्से में बैठे हो ?

मैंने कहा – आपकी तारीफ!

गांडू गे – मेरा नाम अजमर है और तुम्हारा ?

मैंने उसे अपना नाम बताया और अगले दो पल बाद हम दोनों बाते करने लगे। मुझे कुछ पल तो पता ही नहीं लगा की वो साला गे था। 

थोड़ी देर यहाँ वहा की गलतु बाते करने के बाद वो लड़का मेरी जांघ पर हाथ रख दिया। 

गांडू गे – तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है ?

मैंने कहा – नहीं मेरी बीवी है। 

गांडू गे – उसे मेरे लिंग को देखते हुए कहा मजा देती है ?

वो लड़का धीरे धीरे अपनी ओकात पे आ रहा था। 

मैंने कहा – मतलब ?

गांडू गे (मेरे लिंग पर हाथ रख कर) – नहीं देती तो मैं हु न !!

मैंने कभी गे सेक्स नहीं किया था और उस वक्त मैं निराश तो था ही साथ साथ यौन असंतुष्ट भी था।   

तो मैंने उसके हाथ पर हाथ रख कर कहा सुच में ?

गांडू गे मेरे पास आया और मुझे होठो पर चुम कर बोला हाँ बिलकुल। 

उसके चूमने से मुझे उलटी आने लगी। मुझे उसके साथ कोई रिश्ता नहीं बनाना था बल्कि अपनी हवस मिटानी थी। 

इतनी सर्द सुबह पार्क में कोई नहीं था। इसलिए मैंने अपनी पैंट की जीप खोली और अपना लिंग निकाल कर बेथ गया। 

मेरा लिंग खड़ा नहीं था। मेरे लूले के साथ साथ दोनों गोटे भी जीप से बाहर थे। ये देख वो गांडू गे खुश हो गया। 

वो मेरे पुरे लिंग पर हाथ मारने लगा। 

वो अपना पूरा दम लगा कर मेरा लिंग ऊपर नीचे हिलाने लगा। लिंग खड़ा तो हुआ नहीं बल्कि ढीला और लम्बा हो गया। 

अंत में उसने मेरा लिंग चूसना शुरू किआ तो तब कुछ बात बनी। मैं बैंच पर बैठा था और वो नीचे मेरे बेरो के बीच बैठ कर मेरा लिंग चूस रहा था। 

उसे लिंग चूसने की कला अच्छे से आती थी इसलिए मेरा लिंग खड़ा हो गया। 

कभी लंड पर चूसे मरता तो कभी गोटो पर। मैं अपनी आंखे बंद कर के अपना लिंग चुसवाते रहा। 

फिर अचानक वो रुक गया और जब मैंने अपनी आंखे खोली तो देखा की वो अपनी पैंट उतार कर घोडा बना हुआ था। 

वो मटक कर अपनी गांड खोल कर मेरे लंड को बुला रहा था। 

पार्क में मेरा ये सब करने का कोई मन नहीं था पर जब वो गांडू गे अपनी जेब में हाथ डाल कर कंडोम निकला तो मैं रुक न सका। 

कंडोम पहन कर मैं अपनी गे अन्तर्वासना को मिटाने के लिए उसकी गांड चोदने लगा। 

उसकी गांड छोड़ छोड़ कर मैं अपनी बीवी को याद करने लगा। मेरे दिमाग में वो जब आ रहा था जो मैंने अपनी बीवी के साथ जवानी में किया था। 

गांडू गे तेज सासे लेने लगा और मुझे उसकी गांड और अपनी बीवी की गांड में कोई फर्क नहीं दिखा। 

मैं मजे से उसकी चुदाई करने लगा और गांड की अच्छी पिलाई करता रहा। 

गांडू गे – अहह अहह अहह !!

हम दोनों हाफ्ते रहे और मजे से गे सेक्स का आनंद लेते रहे। मैंने अपनी आँखे बंद कर राखी थी और बस कामुक लड़कियों के सपने लिए जा रहा था। 

उस लड़के की गांड मैं अपने हाथो से जोर दार तरीके से दबा दबा कर चोद रहा था। उस लड़के ने अपना हाथ पीछे किया और मेरे टटे प्यार से मसलने लगा। 

तभी मुझे और मजा आने लगा। कुछ देर मैं मैंने लड़कियों के बारे में सोचना छोड़ दिया और उस लड़के के शरीर को गन्दी वासना से देखने लगा। 

अब मुझे गे सेक्स में काफी मजा आ रहा था। मैंने भी आगे हाथ बढ़ाया और नीचे से उसका लिंग पकड़ कर हिलाने लगा। 

गे इसी बात पर खुश हो गया और वो तेज आवाजे करने लगा। उसका लंड काफी कड़क हो गया और मुझे अपने हाथो पर उसके लिंग की नसे महसूस होने लगी। 

चुदाई करते करते मैं अपनी चरम सीमा तक पहुंच गया मैंने अपनी कमर की रफ्तार बढ़ा दी और साथ ही साथ हाथ की भी। उसका लंड हिलाते हिलाते मेरे हाथो में दर्द होने लगा था। 

हम दोनों के ही लिंग अपनी सीमा से ज्यादा सख्त हो चुके थे। बस अगले ही पालो मी मेरा माल कंडोम में निकल गया और उसका माल घास पर बिखर गया।

मुझे ऐसा लगा रहा था की जैसे मैं किसी गाय का दूध निकाल रहा हु। उस गांडू के गोटे काफी लटके हुए थे और उसने काफी सारा माल झाड़ा था। 

मेरा माल निकलते ही मुझे खुद पर गुस्सा आया की मैं ये क्या कर रहा हूँ। 

मैं वहा से उठा और जल्दी से भाग गया। गांडू गे मुझे पीछे से आवाज लगता रहा पर मैं नहीं रुका। ये थी मेरी गे सेक्स स्टोरी अगर अच्छी लगी तो जरूर बताना।