दुश्मन की माँ चोद दी भाग-1

स्कूल मैं कुछ लड़को से लड़ाई हो जाने पर गौरव ने एक सच्चा जाट होने का फर्ज निभाया और अपने दुश्मन की माँ चोद दी। ये चुदाई कहानी एक स्कूली लड़के की है जो दिल्ली का रहने वाला है। गौरव का कहना है किसी की गांड में ऊँगली ना करो और अगर कोई दूसरा करे तो उसकी माँ चोदो। 

मेरा नाम गौरव डबास है और मैं बारवी कक्षा में दूसरी बार फ़ैल हो गया था। शर्म के मारे मेने स्कूल बदल लिया और अपने पुराने दोस्तों को बोल दिया के मैं पास हो गया हूँ और अब मैं बिज़नेस में अपने पिता की मदद करूंगा।

जब मैं दूसरे स्कूल में गया तो वह मेरी किसी से कुछ खास बनी नही। पर स्कूल में एक खूबसूरत लड़की थी जो मुझे भाव देती थी। उसकी आँखों से पता लग जाता था की कब वो मुझे कामुक नजरो से देख रही है। 

उसका नाम निधि था। धीरे धीरे निधि और मेरी बात आगे बढ़ी और हम हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए। 

पर स्कूल के कुछ लोंडो को ये बात पसंद नहीं आई। उन्होंने मुझे और निधि को परेशान करना शुरू कर दिया। 

निधि पर उनमे से एक लड़के की गन्दी नज़र थी। ये जान कर मुझे गुस्सा गया और मेने उस लड़के को छूटी होने पर कस के चाटा जड़ दिया। 

उसके कान से खून निकलने लगा और तभी उसने चीला चीला कर अपने दोस्तों को बुला लिया। 

मेरा कोई दोस्त नही था और ना कोई मेरा साथ देने आया। उन्होंने मुझे बोहोत मारा। 

घर पोहचा तो मेरी हालत बोहोत ख़राब थी। मेरे कपडे फाटे हुए थे और कही जगह से खून निकल रहा था। 

उस दिन के बाद निधि ने खुद मुझ से बात करना छोड़ दिया। वो काफी डर गई थी। 

मेने उस लड़के के बारे में जानकारी इकठा करना शुरू कर दिया। एक जाट होने के नाते मैं चुप नही बैठ सकता था। मैं उसे अकेले पीटना चाहता था ताकि कोई उसे बचा ना सके। 

स्कूल के कुछ लड़को से बात करने के बाद मुझे पता लगा उसका नाम ऋषभ जैन है और उसका बाप बोहोत पैसे वाला है। वो काम के लिए महीने में कई बार दिल्ली से बहार जाता है। और ऋषभ अपने माँ बाप का एकलौता बेटा है। 

फिर मेने कुछ दिन उसके घर पर नज़र राखी और जब उसका बाप घर से बहार काम के लिए निकला तो मैं उसके घर उसे पीटने घुस गया। मेने सोचा की अगर मैं उसे उसके घर में पीटकर स्कूल जाउगा तो सब मुझ से डरेंगे। 

अंदर जाते ही पहले कमरे में उसकी माँ टीवी देखते हुए चाय पी रही थी। मुझे लगा था वो हर रोज़ की तरह आज भी पार्लर जायगी पर नही। मुझे दूसरे कमरे में नींद की गोलिया मिली तो मेने आंटी की गरमा गर्म चाय में डाल दी। 

गर्म चाय में वो गोली पूरी घुल गयी और आंटी पे जल्दी असर कर गई। फिर मेने पूरा घर छान मारा पर ऋषभ कही नही मिला। 

पर जब मेरी नज़र उनकी कामुक माँ पर पड़ी तो मैं सब कुछ भूल गया। 

पैसा कुछ भी कर सकता है। आंटी काफी सेक्सी दिख रही थी। मेरा मन मोके का फायदा उठाने का कर रहा था। मेने आंटी का ब्लाउज उतार दिया और उनके गोर स्तनों पर हाथ फेरने लगा। 

फिर मेने उनके सामने कुर्सी राखी और सामने बैठ कर अपना हिलाने लगा। आंटी का गोरा और सुडोल शरीर देख कर मेरा मन कर रहा था की उन्हें वही चोदना शुरू करदु। पर ऐसा करना सही थे था। मैं करीब आधे घंटे अपना लण्ड धिरे धिरे हिला कर आंटी को देखता रहा। 

तभी मेने देखा आंटी ने एक पल के लिए आंखे खोली और वापस बंद कर ली। मुझ लगा आंटी जग गई है पर सोने का नाटक कर रही है। 

मेने वह से जाने का सोचा पर ऋषभ की माँ को देख मेरे अंदर मानो नई अन्तर्वासना जाग उठी। और मेने सोचा क्यों ना पूरा मुठ मार कर काम ख़त्म ही किया जाये।  

मेने हिमत करके आंटी की ब्रा भी उतार दी और उनके गोर मोटे स्तनों को हलके हाथ से सहलाने लगा। 

फिर वापस मैं उन्हें देखता हुआ अपना लोडा हिलाने लगा। मेने आंखे बंद की और आंटी को चोदने का सपना देखने लगा। कुछ देर में मेरी सांसे तेज हो गई और मेरा माल निकलने वाला था।

तभी किसी ने मेरा हाथ रोक लिया और जब मेने आंखे खोली तो देखा। 

ये थी मेरी आंटी की चुदाई कहानी का पहला भाग। दूसरा भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे (दुश्मन की माँ चोद दी भाग-2) और कमेंट में बताये की आपको क्या लगता है ऋषभ की माँ अब मेरे साथ क्या करेगी ?

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