दोस्त की बहन के साथ जबरदस्ती चुदाई

ये कहानी बिहार के रहने वाले आदित्य की तरफ से है। जिसमे वो बता रहे है कैसे उन्होंने की दोस्त की बहन के साथ जबरदस्ती चुदाई। आदित्य ने बताया की उसकी दोस्त की बहिन देती थी उसे गंदे इशारे पर चुदाई के लिए नही थी राज़ी। दोस्त की बहिन का सुडोल और कामुक शरीर देख आदित्य से रहा नही गया और उसने दोस्त की बहिन से की ज़बरदस्ती और धीरे धीरे वो ज़बरदस्ती बदल गई प्यार में। 

इस कहानी को पढ़ कर असल दुनिया में एसा कुछ भी ना करे। ये कहानी केवल कामुक मनोरंजन के लिए है। हम लड़कियों के साथ जबरदस्ती और बतमीज़ी करने का बढ़ावा नही कर रहे है। 

मेरा दोस्त रिहान काफी पैसे वाला था। वो एक बिगड़े बाप की औलाद था। उसकी एक बड़ी बहिन भी थी जिसका नाम शाज़िया था और वो बड़ी खूबसूरत थी। ये कहानी तब की है जब मैं 20 साल का था।

मुझे कंप्यूटर गेम्स का बड़ा शोक था पर मेरे पास कंप्यूटर नही था। मेरे पिता मुझे कंप्यूटर दिलाना नही चाहते थे। 

रिहान के पास मेरी औकात से कही ज़्यादा महंगा कंप्यूटर था। कभी कभी वो मुझे अपनी नई गेम देखने अपने घर भी लेजाया करता था। 

एक दिन जब मैं उसके घर पे उसकी नई गेम देख रहा था तो उसकी बहिन मुझे मुस्कुराते हुए देख रही थी। शाज़िया के गुम्बज़ तो बड़े थे ही साथ ही साथ उसके होंठ किसी बड़े गुलाब के फूल जैसे थे। मैं उसके होंठ किसी भूखी मधुमक्खी की तरह देखने लगा।

मेरा दिर कहने लगा की उसके गीले होठो पर अपने अपने होंठ लगा कर पूरी जिंदगी गुजार दू। शाज़िया अपनी मासूम आँखों से मेरी छाती देख अपने होठ चबाने लगी। मेने मर्दाना अंदाज़ में अपनी शर्ट का एक बटन खोल दिया और अपनी बलवान छाती का दर्शन करा दिया। 

शाज़िया ने सुंदर सलवार कमीज पहनी थी। मैं अपनी आँखों से उसके जिस्म की बनावट और सही गोलाई की मन ही मन प्रसंशा करने लगा। शाज़िया ने अपने सुंदर हाथ अपने मुलायम स्तनों पर रखा और उन्हें हल्का सा ऊपर उठा लिया ताकि मुझे उनकी गहरी दरार दिखने लगे जहा हर कोई डूबना चाहता है। 

वो मेरी तरफ बढ़ी और पानी का गिलास रखते हुए मुझे अपनी तिजोरी में छुपे अनमोल रतन की झलक दिखाने लगी। उसी पल मैं शाज़िया के नरम पर्वतों की चोटियों पर कब्जा करने का ख्वाब देखने लगा। 

इतने करीब से उसकी बड़ी आँखों की गहराइयो में मेने वो हवस की जलती छोटी सी लो देख ली। उस लो को भड़काने और एक आग में बदलने के लिए मेने शाज़िया का हाथ पकड़ा और ऊके नरम होठो को चूमने धीरे से आगे बढ़ा जैसे कोई शेर चुपके से अपने शिकार पर वार करता है। 

पर शाज़िया के मन में कुछ और था। उसने मुझे अपनी सास की मीठी सुगंध सुंघाई और अपनी चमकीली आँखों से देखते हुए पीछे हट गई। 

वो हस्ते हुए अपने कमरे में चली गई और मैं उसे एक नाकाम भूखे जानवर की तरह देखता रह गया। रिहान को कुछ नही पता था की उसकी पीठ पीछे क्या हो रहा था। वो तो बस अपने महंगे कंप्यूटर और गेम्स का दिखावा करने में लगा था। 

मेने रिहान को कहा मुझे कुछ काम है मैं घर जा रहा हूँ। ये बोल कर मैं जल्दी से शाज़िया के कमरे में भागा और देखा की शाज़िया अपने फ़ोन पर किसी से बात कर रही थी। 

मुझे देख शाज़िया ने फ़ोन रखा और मुझ से नाराज़ हो कर कहा तुम मेरे कमरे में क्या कर रहे हो ?

मेने कहा – वो ? वो सब क्या था जो तुम अभी कर रही थी ? मैं कुछ समझ नही पाया !!

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शाज़िया – क्या ? मैं क्या कर रही थी ?

मेने कहा – वही जो तुम मुझे पानी देते हुए कर रही थी। 

शाज़िया – क्या बेतुकी बाते कर रहे हो तुम रिहान के पास जाओ ना यहाँ क्या कर रहे हो ?

उसका ये अनजान बना मुझे पसंद नही आया। शाज़िया का गन्दा मज़ाक मेरे सर चढ़ गया और मेने उसके मुँह पर हाथ रख उसका मुँह बंद कर दिया और उसकी सलवार में हाथ डाल कर उसकी चुत सहलाने लगा। 

मैं शाज़िया के ऊपर चढ़ गया और उसका मुँह बंद रखा और दूसरे हाथ से रिहान को झूठा मैसेज कर दिया जिसमे मेने उसको पार्क में खेलने को बुलाया है। 

रिहान जब घर से चलाया गया तो मेने शाज़िया की कमीज में हाथ डाल कर उसके बड़े और गुलाबी स्तन को छूने लगा। शाज़िया को मेरा जबरदस्ती छूना पसंद नही आया पर उसकी गीली होती चुत इस बात का इशारा थी की वो कामवासना चाहती है।  

घर में कोई नही था जिसका मेने फयदा उठाया। मेने शाज़िया को चूमना शुरू कर दिया। मेने पहली बार इतनी खूबसूरत और मासूम दिखने वाली लड़की को चूमा। 

उसके काले घने बाल और गुलाबी गाल मुझे और कामुक कर रहे थे। उसके पुरे शरीर से एक अलग ही खुशबु आ रही थी जो मुझे पागल कर रही थी। 

मेने ज़बरदस्ती शाज़िया को बिस्तर पर उल्टा लेटाया और उसकी सलवार उतार दी। 

शाज़िया – बतमीज़ क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे !! रिहान कहा है यहाँ देख तेरा दोस्त क्या कर रहा है। 

वो मुझे धका तो दे रही थी पर मेरे पास भी आना चाहती थी। 

वो चाहती तो मुझे जोर दार चटा मार सकती थी पर उसने ऐसा नही किया। उसने तो अपना कुरा शरीर बेजान छोड़ दिया। 

मैं उसकी गांड में अपना मुँह दे कर उसको अच्छे से चाट रहा था। फिर मेने अपना लिंग निकाला और उसके अंदर घुसा दिया। 

शाज़िया ऐसे चीला बड़ी के जैसे मेरा लिंग हद से ज्यादा बड़ा था। लंड डालते ही वो दर्द से छटपटा उठी और पहली चुदाई के दर्द का मज़ा लेने लगी। 

शाज़िया – ये क्या डाल दिया तुमने मुझ में !! अहह काफी दर्द हो रहा है अहह !!

मेने शाज़िया की एक नही सुनी और उसे चोदने लगा। 

उस दर्द ने शाज़िया का बदन इस कदर तोडा की वो मेरे लंड के नशे में खो गई। 

उसने मेरा विरोध करना छोड़ दिया और मेरी साथ चुदाई के मज़े लेने लगी। 

उसका जवान शरीर मेरे कब्ज़े में था। मैंने उसके नरम पर्वतों पर अपना झंडा गाड़ दिया। 

मेने उसको पलटा और उसके पैर खोल दिए और दोस्त की बहिन की जबरदस्त चुदाई करने लगा। 

शाज़िया ने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और मेरी आँखों में एक बल देखने के बाद मुझे होठो पर चूमने लगी। कभी मैं उसके मुँह में अपनी जीभ डालता तो कभी वो। 

फिर मेने उसकी चुत पर थूका और उसमे अपनी ऊँगली डाल कर शाज़िया को चोदने लगा। 

शाज़िया का नरम और गर्म शरीर मेरी वासना को और बढ़ावा देता जा रहा था। उसके मुँह से निकलने वाली सांसों को मैं अपने अंदर खींच रहा था। 

मेने उसकी चुत में फिर अपना भरा लिंग घुसाया और अपने कूल्हे तेज़ी से हिलाने लगा। 

जितना तेज़ झटका मैं शाज़िया को देता उतनी तेज़ शाज़िया के मुँह से मेरा नाम निकलता। 

उसकी योनी मेरे लिंग की मर से लाल हो गई। 

वासना से भरी शाज़िया मुझे कहने लगी ” यह और तेज़ !! थोड़ी देर और ऐसे ही करते रहो !! “

मैं चाहता था की पहले शाज़िया चरम सुख की प्राप्ति करें ताकि वो खुश हो कर मुझे चुदाई के लिए फिर बुलाये। 

शाज़िया की फूली हुए चुत से चिपचिपा पानी निकलने लगा। वो पानी सफ़ेद और गाढ़ा था जो उसकी योनी को और मुलायम बना दिया। 

पानी निकलते ही शाज़िया थक गई और उसने अपने आप को बेजान छोड़ दिया पर मैं अभी भी उसकी जबरदस्त चुदाई कर रहा था। 

उसकी चुत की मलाई से सना लंड बस दो काम कर रहा था अंदर बाहर अंदर बाहर। 

इतनी चिकनी चुत को चोदते हुए मैं अपनी चरम सीमा तक पहुंच गया और मेने अपना लंड बाहर निकाल कर उसकी चुत पर डाल दिया। 

उसकी चुत की मलाई पर मेरे लंड की लस्सी देख मैं मन ही मन काफी खुश किस्मत महसूस कर रहा था। Dost ki Behan ke Sath Jabardasti Chudai करना सही नही था पर जब दोस्त की बहिन खुद ऐसा मुझे से चाहे तो ये करना गलत भी नहीं था। और आखिर मैं शाज़िया भी खुश और मैं भी। 

शाज़िया ने मुझे चुदाई के बाद अपना नंबर दिया और मुझे गले लगा कर कहा ” आज मैं बहुत खुश हूँ। मुझे तुम्हारे साथ ऐसा मज़ाक नही करना चाहिए था। ” 

हम दोनों को कामवंसा संतुष्टि मिल गई थी। आज भी शाज़िया मेरी प्रेमिका है। उस दिन के बाद से हम चुदाई करते रहे और इस बात की रिहान को भनक तक नही लगी। ये थी मेरी Indian Sex Story अगर आपको अच्छी लगी तो कमेंट में जरूर बताये। 

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