आम की बगिया में देहाती मां बेटे की चुदाई

रामलाल ने दूसरी शादी करी थी क्योंकि पहली बीवी किसी और के साथ भाग गई थी। उसका एक बड़ा बेटा भी था जो आम की बगिया में ही काम करता था। और रामलाल अपने बाकी गीत खेती-बाड़ी देखता और संभालता था। श्याम लाल की दूसरी बीवी बहुत ही ज्यादा सेक्सी हॉट आकर्षक और एक नंबर की कामुक व्यक्तित्व वाली औरत थी। 

इस Maa beta Sex Story में पढ़े एक माँ कितनी कामुक हो सकती है और अपनी वासना मिताने के लिए कितना कुछ कर सकती है। उसने रामलाल से सिर्फ पैसों के चक्कर में शादी करी थी क्योंकि रामलाल थोड़ा उम्र में ज्यादा था।

उम्र में ज्यादा होने की वजह से रामलाल उसको शारीरिक संतुष्टि नहीं दे पाता था। और साथ में वह अपने खेती-बाड़ी में ही लगा रहता था वह अपनी बीवी वंशिका के ऊपर बहुत ही कम ध्यान देता था।

तो वंशिका की कामुक चरित्र ने यह सोचा – बाप नहीं तो बेटा ही सही

रामलाल का बेटा काफी हट्टा कट्टा और एक जवान आदमी था। की शादी अभी नहीं हुई थी और वह अपना ज्यादातर टाइम अपनी आम की बगिया में ही बिताता था।

वंशिका ने अपने डोरे रामलाल के बेटे श्यामलाल के ऊपर डोरे डालना चालू कर दिया। क्योंकि वंशिका एक बहुत ही सुंदर आकर्षक और कामुक औरत थी तो श्यामलाल भी उसकी तरफ बहुत ही जल्दी आकर्षित हो गया।

परंतु कामुकता से भरी वंशिका श्यामलाल को और भी ज्यादा उत्तेजित करना चाहती थी और उसको अपने इरादे महसूस कराना चाहती थी।

जब श्यामलाल नहाता था तो वंशिका उसके पास आकर उसके लिए नल चलाती थी। अपने नरम नरम हाथों से श्यामलाल को साबुन लगाती थी उसकी पीठ रगड़ तिथि। इन सब चीजों से श्यामलाल का लंड खड़ा हो जाता था क्योंकि वंशिका थी ही इतनी ज्यादा आकर्षक

वंशिका जानबूझकर अपना पल्लू गिरा दे दे दे ताकि श्यामलाल उसके प्यारे प्यारे सुंदर स्तनों के ऊपर अपनी अश्लील नजरें मारे।

इन सब चीजों से श्यामलाल और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाता था और वह कुछ भी करके अपनी मां की चुदाई करना चाहता था। और देहाती माँ बेटे की चुदाई जैसे क्रिया कांड को अंजाम देना चाहता  था।

उसने कुछ भी नहीं सोचा और अपनी अंतर्वासना की मानी और उसने वंशिका को अपने गले लगा लिया।

श्यामलाल का दिल बहुत ही तेजी से धड़क रहा था जैसे वंशिका महसूस कर पा रही थी।

वंशिका बोली – कोई बात नहीं शामलाल बेटा.. तुम जवान हो.. और मुझे तुम्हारी जरूरत है पता है!

एक अच्छी मां की तरह मैं तुम्हारी सारी जरूरतों का ख्याल रखना चाहती हूं तुम्हें जी भर कर प्यार देना चाहती हूं।

श्यामलाल बस वंशिका की आंखों में ही देखता रहा और इन दोनों की कामुक इच्छाएं मेल खा रहे थे।

और शामलाल ने वही नहाते नहाते हैं वही सीधा मां को चूमने लगा और उनके दूध पीने लगा

मैं अपनी मां की जबरदस्त चुम्मा चाटी करने लगा और उनकी कांड और उनके पूरे बदन को चूमने लगा।

परंतु वंशिका ने उसको रुकने को कहा और बोली – हम यहां यह सब नहीं कर सकते हैं। तुम नहा लो शाम को मैं तुम्हारी बगिया में आ जाऊंगी!!

श्यामलाल – क्यों तड़पा रही हो इतना ज्यादा मां… यहीं पर काम खत्म कर देते हैं ना..!!

वंशिका – हम यहां नहीं कर सकते वही बगिया में करेंगे

और जैसे ही शाम हुए श्यामलाल बेसब्री से अपनी वंशिका मां का इंतजार कर रहा था।

शाम होते ही वंशिका एक सुंदर साड़ी में वहां पर पहुंच गई।

उसको देखते हैं शामलाल ने गले लगा लिया और उसके होंठों को चूसना चालू कर दिया। मैं उसकी जबान को चूस रहा था और वंशिका श्यामलाल की जबान को चूस रही थी। फिर शाम लालू ने उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए और उनके बड़े बड़े स्तनों को पीने लगा और साथ में दबाने भी लगा।

वंशिका – आ! आ! आ! ओह… बेटा!!!

फिर शाम लाल ने वंशिका को चारपाई पर लेटा दिया और उनकी पेटीकोट भी उतार के सुंदर वंशिका को नंगा कर दिया

फिर उसके पैर तक पहुंचा फिर वह वंशिका की योनी तक पहुंच गया। वंशिका की चूत को चाटने लगा और अपनी जबान उसकी चूत में घुसाने लगा

उसके एक आम लिया और वंशिका की चूत पर निचोड़ दिया। वंशिका की चूत पर आम का मीठा रस जिसे श्यामलाल आनंद के साथ पी रहा था।

अंशिका – ओह!! श्यामलाल.. तुम तो बहुत ही ज्यादा प्यारे हो.. तुम तो एकदम दिलबर जानी हो।

काश तुम्हारे बापू भी तुम्हारी तरह अच्छे होते।

श्यामलाल ने अपना लंड निकाला और वंशिका भाभी की चूत में घुसा दिया और उनकी जबरदस्त चुदाई करने लगा।

अपनी सुंदर सेक्सी देहाती मां की चुदाई बहुत ही जबरदस्त तरीके से कर रहा था और देहाती माँ बेटे की चुदाई चालू हो गई।

वंशिका – माँ… आ! आ! आ! आह.. आह… आ.. आ.. आ..

हाँ बेटा.. ऐसे चोदो अपनी माँ को….

शामलाल और भी तेजी से और जबरदस्त तरीके से वंशिका भाभी की चूत की चुदाई करने लगा। वो देसी चुदाई कर रहा था, भाभी की बुर को चोदे जा रहा था अपने डंडे जैसे मजबूत लंड से और उसके बड़े बड़े स्तनों को भी दबा रहा था।

माँ – हाँ! हाँ! यही तो चाहिए मेरी कामुकता को बेटा….

फिर शामलाल ने वंशिका को घोड़ी बनाया और चारपाई के ऊपर से उनकी जबरदस्त चुदाई करने लगा।

दोनों में धकापेल जुदाई हो रही थी, “घचाघच-घचाघच, खपाखप-खपाखप” जुदाई चल रही थी।

श्यामलाल ने वंशिका के दोनों हाथों को पकड़कर खींचा और आधी हवा में लटकी वंशिका को चोदने लगा

मुझे इतना दम लगाके वंशिका की चूत की ठुकाई करता था उतना ही वंशिका के बड़े-बड़े स्तन ऊपर नीचे हिलते थे।

फिर कुछ देर में शामलाल का झड़ने वाला था तो उसने वंशिका को अपनी गोदी में उठा लिया।

और वंशिका को अपनी गोदी में उठाकर वह घपा-घप अपनी मां की चुदाई कर रहा था।

श्यामलाल थप्पड़-थप्पड़ अपनी मां की चुदाई करे जा रहा था।

माँ – हां ऐसे ही यही आनंद मुझे चाहिए बेटा… चोदो अपनी मां को… जितना दम है उतना दम लगा कि चोदो अपनी मां को

और श्यामलाल पागलों की तरह भाभी को चोदता ही रहा और बस कुछ ही क्षण में दोनों का चरम सुख होने वाला था।

उसने वंशिका को नीचे उतारा और उसके मुंह में अपना लौड़ा घुसा के सारा माल झाड़ दिया।

श्यामलाल – आह!! आह!!!

भाभी – हाँ! हाँ!! अपनी माँ को सारी मलाई पिला दो… बेटे…

और शामलाल ने अपने लंड की बूंद-बूंद अपनी मां के मुंह में निचोड़ दी।

इतनी जबरदस्त वासना क्रिया कर्म और कांड करने के बाद दोनों चारपाई पर एक साथ बैठे रहे।

शामलाल अपनी मां की जांघों पर सिर रखकर सो गया और वंशिका उसे ऊपर से आम चुसा रही थी। इसके बाद दोनों के रिश्ते और भी ज्यादा ताकतवर हो गए और दोनों की चुदाई भी और भी ज्यादा बढ़ गई।

दोनों का जीवन काफी अच्छा बीतने लगा और दोनों में काफी रोमांच और रोमांस भी था।