बड़े भाई को शीघ्रपतन, तो छोटे भाई ने चोदा भाभी को

बड़े भाई को थी शिग्रपतन की समस्या और छोटे भाई ने उठाया इसका फायदा। बड़े भाई को भेज दिया इलाज के शहर, और घर पर भाभी को पता के चोदना शुरू कर  दिया। यह एक बढ़िया Bhabhi Sex Story हैं, जिसको पड़के आपको मज़ा आ जायेगा। कहानी का नाम “बड़े भाई को शीघ्रपतन, तो छोटे भाई ने चोदा भाभी को” जान कर आप समझ गए हो गए की ये चुदाई कहानी किस बारे में है।

यह Antarvasna Story यूपी के एक शहर अलीगढ़ की है, जहा दो भाई रहते थे, बड़ा भाई गांव में ही बिजनेस करता था। और छोटा भाई शहर से पढ़ाई करके अपने गांव लौटा था। छोटा भाई अपने गांव लौट आया था क्योंकि उसे अपना पारिवारिक व्यवसाय संभालना था। दोनों भाइयों में काफी प्यार था और दोनों भाई एक दूसरे के लिए जान सकते थे। और बहुत ही जल्द दोनों भाइयों की शादी की भी बात होने लगी।

उनके मां-बाप बस जल्दी से उनके हाथ पीले कर देना चाहते थे। इसी बीच बड़े भाई को पहले से ही किसी और से प्यार था। और उसने उनसे शादी का भी मन बना लिया था। उनके मां-बाप भी काफी खुले विचारों वाले थे, उन्होंने इसका विरोध नहीं किया। और उन दोनों की खुशी मंगल अच्छे से शादी करा दे। जिस लड़की से बड़े भाई ने शादी करी वह लड़की बहुत ही सुंदर और काफी आकर्षक थी।

वो इतनी सुंदर और आकर्षक थी कि सब बोलते थे कि रमेश (बड़ा भाई) की तो किस्मत खुल गई। और छोटे भाई (सूरज) को भी भाभी बहुत ही अच्छी लगती थी क्योंकि उनका फिगर बहुत ही जबरदस्त था। सूरज अक्सर भाभी से मजे लिया करता था जैसे एक आम देवर-भाभी मज़ाक करते हैं। 

और उनसे खूब हंसी मजाक भी करता रहता था। एक दिन सूरज ऐसे ही मजाक-मजाक में बोल दिया – और भाभी आप की पहली सुहागरात कैसी रही? 

क्योंकि भाभी सूरज से बहुत ही दोस्ताना थी और अपनी सारी बातें बताया करती थी। तो उन्होंने बताया – उनको सुहागरात के दिन कुछ खास मजा नहीं आया। 

तो सूरज ने उनसे पूछा क्यों? भाभी ऐसा क्या हुआ? भैया तो मेरे बहुत ही अच्छे हैं।

भाभी ने बोला – भैया तो आपके अच्छे हैं, लेकिन उनमें वह दम नहीं है। 

सूरज बोला – क्यों भाभी ऐसा क्या हो गया? 

तो भाभी ने बताया – सुहागरात के दिन, मैं बहुत ही खुश थी क्योंकि मेरे मन की शादी हुई थी। 

मैं जिससे प्यार करती थी मेरी उससे शादी हो गई इससे अच्छी बात क्या हो सकती है। और तुम्हारे भैया भी मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं और वह मुझे बहुत ही खुश रखना चाहते हैं। 

शादी से पहले भी हम दोनों काफी मिला करते थे और प्रेमी जोड़े की तरह वह सब कुछ करते थे। जो एक अच्छा रोमांटिक प्रेमी जोड़ा कर सकता है। लेकिन तुम्हारे भैया ने कभी भी मेरे साथ सेक्स नहीं किया। 

अगर मैं पूछती थी, क्यों आम लड़के तो बहुत ही उतावले रहते हैं सेक्स करने के लिए। लेकिन आप में इतना सब्र कैसे है। तो रमेश बोलते थे कि मुझ में बहुत सफर है और हम यह सब शादी के बाद अच्छे से करेंगे। 

लेकिन जब सुहागरात आई और मैं (भाभी) बहुत खुश थी और, 

मैंने बोला – कि अब तो हम कुछ भी कर सकते हैं। 

और तुम्हारे भैया भी काफी उत्सुकता से भरे हुए थे। और फिर हम दोनों में चुम्मा-चाटी चालू हो गई और वह मुझे प्यार से चूमने लगे। हम दोनों ने खूब ज्यादा एक दूसरे को चूमा, गले लगाया, मानो जैसे हम एक बदन एक जान हो। 

और फिर तुम्हारे भईया ने मेरे साथ सुहागरात मनाना शुरू कर दिया। लेकिन मुश्किल से 1 मिनट नहीं हुआ होगा और तुम्हारे भैया ठंडे पड़ गए। 

सूरज ने पूछा – क्यों ऐसा क्या हो गया, क्या उनका पेट खराब था?  

भाभी बोली – नहीं उनका पेट खराब नहीं था, लेकिन पता नहीं क्यों वह अचानक ठंडे पड़ गए सारा जोश उनका खत्म हो गया।

फिर मैंने अगले दिन भैया से एकांत में बात करी। और बोला भैया क्या हुआ था सुहागरात के दिन, क्या आपने मजे नहीं लिये? 

भैया मुझसे बोले – अरे कहां यार, जैसे ही मैं अपना लिंग डालने जा रहा था, वैसे ही मेरा झड़ गया। 

मैंने बोला – कोई बात नहीं भैया दोबारा ट्राई कर लेना। 

लेकिन भैया बोले – अरे तुम समझ नहीं रहे हो! मुझे शीघ्रपतन की समस्या है। 

यह सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई, और मैं बहुत ही ज्यादा हैरान हो गया। मतलब यह था, भैया, भाभी को संतुष्टि नहीं दे पा रहे थे। 

वोभी शारीरिक संतुष्टि नहीं दे पा रहे थे जो भाभी चाहती है। इसी वजह से भाभी अक्सर मुझसे गंदे-गंदे मजाक किया करते थे जिनको सुनकर मुझे बहुत मजा आता था।

वैसे तो रमेश का छोटा भाई सूरज अपने भैया से बहुत ही प्यार करता था। लेकिन यह सुनहरा मौका कौन छोड़ सकता था, जब उसके भाभी इतनी आकर्षक हो। 

छोटे भाई ने बड़े भाई से बोला – कोई बात नहीं भैया ऐसा तो होता रहता है यह सिर्फ एक बीमारी है। और हम इसका कुछ ना कुछ इलाज ढूंढ लेंगे। 

तब तक आप कहीं बाहर चले जाओ अपना इलाज कराने के लिए। भैया सूरज पर बहुत ही विश्वास करते थे, और वह बाहर जाने के लिए मान गए अपना इलाज कराने के लिए। ये सूरज के लिए सुनहरा मौका था, और उसने इसका फायदा भी उठाया। जब भैया बाहर चले गए। और उसे पूर्ण संतुष्टि हो गई कि वह वापसी नहीं आएंगे और अपना इलाज करवा कर ही घर लौटेंगे। 

तब सूरज ने अपने डोरे डालने भाभी पर चालू कर दिए और उनसे बात करना शुरू। सूरज उनसे बोला – मुझे पता है, भैया आपको संतुष्टि नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि उनको एक समस्या है। 

भाभी बहुत ही मासूम थी और वह डर गई उन्होंने सोचा यह क्या हो गया अब हमारे भविष्य का क्या होगा। 

सूरज बोला – डरने की बात नहीं है, भैया की यह समस्या ठीक हो सकती है, और वह जल्द ही घर आ जाएंगे, अपना इलाज करवा के। 

सूरज बोला – मैं भाभी आपको बहुत ही पसंद करता हूं और आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। 

पहले तो भाभी ने नखरे दिखाए और बोली देवर जी यह क्या बोल रहे हो? यह सही नहीं है। 

सूरज ने कहा – भाभी मुझे भी पता है आप क्या चाहती हो और भैया आपको शारीरिक संतुष्टि नहीं दे पा रहे हैं। 

लेकिन आप फिकर मत करो मैं आपको शारीरिक संतुष्टि दे सकता हूं। और यह बोलते ही मैंने झपट के भाभी को चूम लिया उनके होठों पर। भाभी ने भी इंकार नहीं किया और हम दोनों दो जिस्म एक जान हो गए। 

सूरज भाभी के नरम-नरम होठों को हमेशा चूमना चाहता था, इसलिए सूरज बहुत जोर-जोर से चूम रहा था भाभी के होठों को। 

भाभी कह रही थी – अरे! रुक जाओ मुझे सांस नहीं आ रही है, 

लेकिन वो फिर भी उनको बहुत जोर से चूम रहा था। फिर सूरज ने अचानक से भाभी के ब्लाउज के बटन खोल दिए। और उनके सुंदर-सुंदर, प्यारे-प्यारे चूचियों को दबाने लगा। उनके स्तन इतने सूंदर और नरम थे कि मानो जैसे रुई का गद्दा दबा रहा हूं।

और भाभी बहुत ही आकर्षक होने के साथ-साथ गोरी भी थी। 

“तो उनके स्तन के निप्पल का रंग गुलाबी था”। 

यह देखकर सूरज और भी ज्यादा जोश में आ गया। और भाभी के ऊपर कूद पड़ा और उन्हें जोर-जोर से चूमने लगा, साथ ही, उनके स्तनों को भी जोर-जोर से दबाने लगा। उसके बाद सूरज ने बिना कुछ देखे भाभी को पेटीकोट खोल दी। 

और झटके से अपना लंड घुसा दिया। भाभी जोर से चीख पड़ी, 

और बोली – देवर जी धीरे करो। 

लेकिन, 

सूरज नहीं माना और उसने उनके दोनों हाथों को पकड़कर और जोर-जोर से चोदने लगा। सूरज इतना जोर से चोद रहा था कि बेड बहुत हिलने लगा। फिर सूरज ने उनकी दोनों टांगों को पीछे करा और अपना पूरा दम लगा कर ठोकने लगा। 

भाभी की शक्ल देख कर और ज्यादा उत्सुक हो रहा था। और भाभी भी आवाजें निकाल रही थी, नॉटी-नॉटी, इनके इन शरारती आवाजों को सुन कर सूरज का लंड और खड़ा हो रहा था। 

सूरज ने भाभी को खूब चोदा और जैसे ही उसका झड़ने वाला था। उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और भाभी के स्तन पर झाड़ दिया। 

भाभी ने बोला – देवर जी मजा आ गया! 

तो सूरज बोला – यह हम रोज-रोज कर सकते हैं जब तक भैया नहीं आते। आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है और मैं भी आपको खुश रखना चाहता हूँ। 

अगले दिन सूरज ने भाभी को डॉगी पोजीशन  में सहवास करने को कहा। पहले तो भाभी हिचकिचाई फिर वह मान गई। 

सूरज यह इसलिए बोला, क्योंकि भाभी की गांड बहुत ही मोटी और गोल-गोल थी। उनकी गांड को देखकर हमेशा उसका लंड से पानी टपकने लग जाता था। 

“उनकी गांड देखते ही सूरज ने फट से अपना लंड घुसा दिया”। 

और उनको जोर-शोर से ठोकने लगा, साथ में उनकी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था। 

भाभी बोली – देवर जी बहुत मजा आ रहा है, और जोर-जोर से करो, “मुझे और मजा चाहिए”। 

भाभी की यह बात सुनकर सूरज उनको चोदते चोदते उनकी गांड के छेद में अपना अंगूठा डाल दिया। और भाभी एकदम से चीख पड़ी, 

और बोली – ये क्या कर रहे हो? “लेकिन जो भी कर रहे हो मजा आ रहा है”। 

यह सुनकर सूरज जोश से भर गया और घपाघाप जोर-जोर से भाभी की गांड को ठोकने लगा। और फिर जैसे ही उसका झड़ने वाला था उसने लंड बाहर निकाल लिया और भाभी कि गांड के ऊपर अपना सारा माल झाड़ दिया। 

इसके बाद सूरज भाभी को बहुत जोर-जोर से चूमने लगा। 

भाभी बोली – अब तो शांत हो जाओ देवर जी कितना करोगे। 

सूरज ने कहा – अरे भाभी क्या करू? होही आप इतनी आकर्षक की आप को देखकर कोई शांत कैसे हो सकता है। 

और जब तक भैया घर ना लौटे, लगभग 1 महीने तक तब तक. सूरज अपनी भाभी के साथ मजे लेता रहा। 

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