चलती गाड़ी में भाभी की चुदाई भाग-2

तभी मेरे पति ने गाड़ी पहचान ली और हमरी तरफ बढ़ने लगा। मेने जल्दी से गाड़ी भगा दी वह से भाग गई। गाड़ी चलाते हुए मैं भरे बाजार में जा पहुंची। 

ये मेरी चुदाई कहानी का दूसरा भाग है। अगर अपने पहला भाग नही पढ़ना तो यहाँ क्लिक करे (चलती गाड़ी में भाभी की चुदाई भाग-1) और दूसरे भाग के लिए यही बने रहे। 

मैं नंगी गाड़ी चला रही थी और मेरा देवर मेरे स्तनों पर चाटे मारने लगा। 

मेने कहा – बदतमीजी क्या कर रहे हो !! दीखता नही अभी पकड़े जाते तो पता नहीं क्या होता।

देवर – पता है भाभी जी मगर आपके इतने बड़े और लटकते स्तन देख मेरा दिल मचल रहा है। 

मैं शर्मा कर मुस्कुराने लगी और कहा – थोड़ा सब्र करो कोई अच्छी और खली जगह मिलने दो बस फिर मेरे स्तनों से सारा दूध निकाल लेना। 

मेरे ये कहने पर मेरा देवर नही माना और मेरी चुत मैं ऊँगली डालने लगा। उसने मेरे अंदर पूरी ऊँगली डाल दी और मैं ककुछ नही कर पाई। 

गाड़ी रोकती तो ट्रैफिक जाम होजाता और गाड़ी के पास खड़े लोग मुझे नंगा बैठे देख लते। मैं पूरी तरह फस चुकी थी। 

मेरे पास गाड़ी चलाने के अलावा और कोई चारा नही था। मेरा देवर बोहोत बतमीज़ी कर रहा था। मुझे लगने लगा की अपने देवर के साथ गंदे काम करके मेने काफी बड़ी गलती की है। 

मेरा देवर अचानक पीछे वाली सीट पर बैठा और अपने दोनों हाथ मेरे पीछे से निकाल कर मेरे स्तन पकड़ लिए। उसने मेरे स्तन इतनी जोर से दबोचे की मेरी अहह निकल पड़ी। 

देवर की इस हरकत से मैं गाड़ी नही चला पा रही थी। मेने जल्दी से कोई सुनसान कार पार्किंग खोजी और गाड़ी वह कड़ी कर दी। 

फिर देवर जी ने मुझे पीछे खींच लिया और मुझे हर जगह चूमने लगे। कभी वो मुझे कही चूमते तो कभी चूसते। 

गुसा होने के बाद भी मेने उनके बड़े लिंग के सामने घुटने टेक दिए। 

उन्होंने मेरे मुँह के सामने अपना लंड रखा और उसे टपकता पानी मेरे चेहरे पर गिरने लगा। मेने अपने आप पर काबू किया और देवर जी के लंड पर जोर से झापड़ मार दिया। 

देवर जी – अहहह भाभी क्या कर रही हो ?

मेने कहा – मेरा मन बदल गया है अब हम ये नही कर रहे। 

देवर दी को अचानक गुस्सा आया और उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ कर मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांड के छेद मैं अपना लंड डाल दिया। 

मेने कहा – अहह !!! मेरे अंदर से अपना लिंग बाहर निकालो मुझे दर्द हो रहा है। 

देवर – ना ना भाभी जी अब नही हो सकता ! आपकी चुदाई तो मैं कब से करना चाहता था। 

देवर जी मुझे घोड़ी बना कर जोर जोर से धके मारने लगे और गाड़ी हिलने लगी। 

उनका सख्त लिंग मेरी मुझे ऐसा एहसास देने लगा जो मेरी चुत को और गिला कर दिया। 

मेने खिड़की से बाहर देखा तो कुछ लोग हमारी गाड़ी को ही देख रहे थे। वो लोग ऐसे देख रहे थे जैसे वो गाड़ी के आरपार देख पा रहे हो। 

तभी कुछ जवान लड़को का समूह गाड़ी में बैठ कर आया और उन्होंने हमरी गाड़ी हिलती देख ली। 

वो लड़के जोर जोर से हसने लगे और गाड़ी की वीडियो बनाने लगे। पर मेरा देवर कुछ नही किये। 

उसे बहार देखने का वक्त कहा वो तो मेरे सुडौल शरीर से अपनी नजर ही नहीं हटा रहा था।

इतनी जोर दर गांड चुदाई से मेरे मुँह से तेज आवाजें निकलने लगी और बाहर जोर जमा होने लगे। 

फिर मेने देवर जी की आँखों में देखा। उनकी आँखों में इतनी हवस और चुदाई का भूत आज तक मेने अपने पति की आँखों में नही देखा था। 

मेने बाहर के लोगो को  नज़रअंदाज़ किया और देवर के लंड को अपने रोम रोम में बसा लिया। 

फिर देवर जी ने मुझे उठाया खुद सीट पर लेट गए और मुझे अपनी गांड उनके मुँह पर रखने को कहा। 

गांड रखने के बाद वो मेरी चुत चाटने लगे और मैं उनका लंड। जैसे ही मेने उनका लिंग मुँह में लिए उन्होंने अपने कूल्हे हिलना शुरू कर दिया। 

वो मेरा मुँह किसी चुत के छेद की तरह चोदने लगे और मेरी पूरी गांड पर मुँह मारते रहे। 

वो मेरे शरीर का पूरा लुत्फ उठाना चाहते थे। मेरी चुत से पानी बहने लगा और उनके पुरे मुँह पर जा गिरा। 

गाड़ी की सीट मेरी चुत के पानी से आधी गीली हो गई पर उनके लंड से बस हल्की से लार टपक रही थी। 

मैं तभी समझ गई की आज मेरी चुत की खेर नही। 

देवर जी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया और मुझे चूमते हुए पीठ के बल लेता दिया। 

फिर मेरे पैर खोल कर मेरी चुत में अपना लिंग डाल कर उछलने लगे। गाड़ी भी जोर जोर से हिलने लगी और सरे लोग हसने लगे। 

देवर जी जब भी मेरे हिलते स्तन देखते तो और जोशीले हो जाते और यही तो मेरी सेक्सी कहानी का सबसे अच्छा भाग है। 

फिर देवर जी का झड़ने वाला था तभी उन्होंने मेरी गांड पिलाई और ज्यादा करना शुरू कर दिया। 

और जब उनका झाड़ा तो मेने उनको धका दे कर पीछे हटा दिया। फिर मेने देखा की उनके लंड से काफी सारा माल निकलने लगा और देवर जी कापने लगे। 

उनका कांपना मेरी हवस की सबसे बढ़ी वजह थी। 

देवर जी बेजान हो कर मेरे ऊपर गिर गए और गहरी सासे लेने लगे। मेने उन्हें सही से बिठाया और उन लिंग पर जोर दर चूसा चूसा मार कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। 

मेने जल्दी से गाड़ी स्टार्ट की और वह से भगा कर कही और ले गई। 

अँधेरी जगह पर गाड़ी खड़ी कर के हमने कपडे पहने और वापस घर चले गए। ये थी मेरी चलती गाड़ी में भाभी की चुदाई भाग-2 अगर आपके रोंगटे खड़े हो गए हो तो कमेंट करना ना भूले। 

उस दिन के बाद मेने अपने देवर के साथ चुदाई तो क्या कभी बात नही की। मैं जान चुकी थी की वो काफी ज्यादा बदतमीज है। उनके साथ और चुदाई करना मतलब उनकी बदतमीज़ी को और बढ़ावा देना है। 

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