आधी रात में चाचा को छोड़कर चाची आई मुझसे चुदवाने

हेलो दोस्तों, मैं वरुण आपके लिए लेकर आया हूं अपनी सेक्सी स्टोरी जो की मेरी चाची और मेरे बीच अभी हाल ही के कुछ बीते दिनों में हुई है।

तो चलिए अब ज्यादा टाइम वेस्ट न करते हुए कहानी पर आता हूं। थोड़ा सा सिचुएशन और लोकेशन का परिचय जरूरी है तो जल्दी से शुरू करते है।

मेरा घर पुराने समय का बना हुआ है। हमारा घर एक तरह से ज्वाइंट फैमिली है जहा हमारे 3 दादा दादी का परिवार रहता है(मेरे दादा और उनके भाइयों का) पूरा घर 2 फ्लोर में है बस हमांरा घर 3 फ्लोर में है जो हमें बाद में बनवाया है। मेन गेट से घर में पीछे आंगन तक गलियारा है जिसके आजू बाजू रूम बने हुए है। पीछे आंगन में दोनो ओर बाथरूम है। दाहिने हाथ में छोटे दादा जी की फैमिली रहती है और उनका बाथरूम है और बाए हाथ पर हमारा और बीच आंगन में एक कुआं है। मेरा रूम ग्राउंड फ्लोर पर गलियारे के बाई ओर है और मेरे चाचा चाची(दादा जी के भाई की बहु और बेटे) का रूम जैसे मेरे रूम के सामने है। मेरे रूम की खिड़की उनके गेट के सामने खुलती है और मेरा गेट उनके खिड़की के सामने। मेरे रूम से जुड़ा हुआ मेरी सगे चाचा चाची का रूम है। उनको भी मैं चोद चुका हूं उनकी कहानी बाद में। तो आप लोग लोकेशन समझ चुके होंगे मुझे आशा है। तो अब चलते है कहानी पर।

मेरी चाची को शादी कम उम्र में हो गई थी जब वो 20 साल की ही थी। वो दिखने में सुंदर है गोरी है भरे हुए दूध, गांड ज्यादा बड़ी नही पर अच्छी है। उनके हसबैंड यानी मेरे चाचा ड्रिंक बहुत करते है। आए दिन उनकी लड़ाई होती रहती है। उनकी दो बेटियां है। पिछले कुछ सालों से उनके झगड़े कुछ ज्यादा ही बढ़ गए थे दोनो एक दूसरे से दूर ही रहते थे पर कुछ महीनो से चाचा ने पीना कम कर दिया कुछ शांति रहती है। रात में जब सन्नाटा रहता है तो मेरे घर में चारों ओर की आवाज साफ सुनाई देती है अगर थोड़ा ध्यान से सुना जाए। तो हुआ यूं कि एक दिन में रात में 1 बजे मैं सेक्स स्टोरीज पढ़ रहा था। स्टोरी पढ़ते पढ़ते मैं गरम हो गया और लंड रगड़ रहा था और मेरा माल निकल कर लंड साफ करने के लिए बाथरूम में जाना था तो जैसे ही मेने दरवाजा खोला तो देखा सामने चाचा के रूम की लाइट जल रही थी और खिड़की भी पूरी खुली थी पर खिड़की पर नेट लगा हुआ था। मुझे कुछ आवाज़ आ रही थी कुछ खनखनाने की। चूड़ी और पायल की।मेने अंदर झक कर देखा तो मजा ही आ गया। चाची जमीन पर लेटी हुई थी और उनका पेटीकोट उनके पेट पर था और चाचा का लंड उनकी चूत में। वो चाची की चूत मार रहे थे तेज़ तेज़। उनके हिलने से चाची की चूड़ियों और पायल की आवाज़ आ रही थी। देखते देखते मेरा हाथ खिड़की पर लगा बस चाची ने बाहर की तरफ देखा लेकिन सभी जानते हो रोशनी से अंधेरे की तरफ दिखाई नहीं देता है। 2 मिनट के अंदर ही चाचा झड़ गए और अपना लंड निकाल कर लेट गए। उनका लंड बहुत छोटा था। चाची उठी और पेटीकोट से चूत से बह रहे चाचा के माल को पोंछा। मेरा ये सब देख कर फिर खड़ा हो गया था। मैं बाथरूम हो कर वापस आ रहा था की तभी चाची भी अपने बाथरूम से बाहर आ रही थी। मेने उन्हें देख कर आंखे नीची कर ली। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे रूम के गेट के बाहर आ गई। मेने बोला चाची क्या कर रही हो।

चाची: तूने देखा न?

मैं: मतलब? कुछ समझा नहीं।क्या देखा।

चाची:अंदर जो हो रहा था वो देखा न?

मैं: मुस्कुराते हुए, हुआ ही क्या। शुरू होते ही खत्म हो गया।

चाची: वही तो प्रॉब्लम है। एक तो तेरे चाचा नशे में रहते है मेरे साथ कुछ करते नही। कभी मैं ही तैयार कर लूं उन्हें तो बस 2 मिनट में 2 बूंद टपका देते है।

मैं: हां, देखा मैने। पर क्या कर सकते है अब इसके लिए। बहुत बुरा लगा चाची ये जानकर।

चाची: रूम का दरवाजा खोलो और अंदर चलो।

मैं: मेरे रूम में? इतनी रात को? पर क्यूं?

चाची: चलो तो जल्दी।

फिर हम रूम पर आ गए। चाची और मैं बेड पर बैठ गए। चाची ने कहां।

चाची: देखो वरुण मैं जो कहना चाहती हूं उससे तुम मुझे गलत मत समझना। मैं कई सालों से तड़प रही हु। मुझे संतुष्ट होना है। मैं किसी से कुछ भी कह नहीं सकती थी पर आज तुमने मुझे ऐसे देखा तो मैंने हिम्मत की। तुम्ही हो जो मुझे सुख दे सकते हो।

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मैं: मेने कहा चाची पर मैं केसे?
चाची: वो जैसे करना है कर और कैसे करना है वो खुद ही होता जायेगा।

चाची ने बिना देर किए फटा फट साड़ी निकाली और ब्लाउज खोल दिया। में देख रहा था तो चाची बोली अभी क्या सोच रहा जल्दी से अपने कपड़े निकालो। टाइम कम है काम ज्यादा।उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रखा तो मेरे दिमाग में भी सनसनी छा गई।
अब मेने भी फटाफट अपनी बनियान और शॉर्ट निकल दिया।

चाची सिर्फ ब्लैक ब्रा और पेंटी में थी। वो मुझसे चिपक गई और तुरंत मेरे होठों को चूसने लगी।

क्या बातों दोस्तो, इतने गर्म और नर्म होठ थे चाची के मजा ही आ गया यार। हम जोर दार किसिंग किए जा रहे थे। उनके हाथ मेरी नंगी पीठ पर दौड़ रहे थे। मैं भी उनके होठों को चूसते और काटते हुए एक हाथ से उनकी पीठ सहला रहा था और दूसरा हाथ उनकी गांड पर फेर रहा था। होठ चूसते हुए वो घुटनो के बल होकर मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही मसलने लगी। मेरा लन्ड तो पहले ही खड़ा हो चुका था चाची के दबाने कारण लंड बिल्कुल फटा जा रहा था।

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मेने चाची की ब्रा का हुक खोला और उनकी ब्रा निकाल कर साइड में रख दी और उन्हें एक झटके में पलट कर बेड पर लिटा दिया और अपना मुंह उनके मुलायम रस भरे गोरे गोरे बूब्स में घुसा दिया। मेने अपने दोनो हाथो से दोनो बूब्स हो पकड़ा और बीच में मुंह लगा कर जोर जोर से दूध मसलने लगा और अपने मुंह पर घिसने लगा। चाची की सिसिकरिया छूट गई।

चाची: आह…. ओह हो…. सी. … खाजाओ इन्हे। और जोर से दबाओ। इतने साल से आज तक किसी ने इन्हे नही छुआ है।

मैं एक एक करके उनके दूध को मुंह में लेता और दूसरे को मसलता। चाची कसमसा जाती। मसलते मसलते उनके दूध लाल हो गए थे। उनके बूब्स को दबाते हुए मैं किस करते करते उनके पेट पर पहुंचा। उनके पेट पर कट मार्क्स थे।

दोस्तों में आपको बताना चाहूंगा की चाची के दोनो बच्चे ऑपरेशन से हुए थे। इसलिए उनके पेट पर कट मार्क्स थे। मेने अपनी जीभ उनकी नाभि में घुसाई तो चाची ने एक दम से अपना पेट ऊपर उठा दिया।
मेने उनके बूब्स छोड़ उनकी कमर के नीचे हाथ ले जा कर उनकी कमर वैसे ही पकड़ कर ऊपर रखी और पेट चूमता रहा।

दोस्तो चाची का शरीर एकदम गर्म हो चुका था। उनकी आंखे बंद थी और बस आह……..हूं …….ओह…… की कामुक आवाजें निकल रही थी।

मेने कर से चाची की पेंटी पकड़ कर नीचे कर दी और पैरों से निकल कर देखा तो वो हल्की गीली हो गई थी। मैं समझ गया की चाची की चूत गर्म हो चुकी है और लार टपका रही है।

मैंने चाची को बेड पर अच्छे से लिटाया और में उनकी टांगों के बीच सर करके लेट गया। मेने उनके दोनो पैरों को फैलाकर अपना मुंह उनकी चूत पर जैसे ही रखा चाची इतनी जोर से झटपटाई की पलंग हिल गया।

मेने चाची से कहा शोर मत करो चाची ज्यादा। अभी तो कुछ हुआ भी नही है और आप इतना शोर करोगी तो कोई सुनेगा तो सब गड़बड़ हो जायेगा। फिर चाची ने खुद पर कंट्रोल किया। वो इतने सालो से प्यासी थी कभी चाचा ने उनकी चूत की न तो सहलाया था और न ही खाया था। ये सब उनके लिए नया था। वो एकदम मदहोश हो रही थी। मैं उनकी चूत खाने में लगा हुआ था।

दोस्तो, क्या मस्त फूली हुई चूत थी यार। उनका छेद काफी टाइट था जो तो होना ही था। चाचा की लुल्ली इतनी छोटी थी की उससे कुछ तो होना नही था और दूसरा ये भी, की वो उन्हें चोदते भी न के बराबर थे।

5 मिनट में ही चाची अकड़ गई और 1 मिनट तक तो वो झड़ती रही। उनकी चूत झरने की तरह बहने लगी। मेने उनकी पैंटी से उनकी चूत का पानी साफ किया।

चाची की सांसे बहुत तेज तेज चल रही थी। पूरा फेस लाल हो चुका था। उनका गला सुख रहा था । रुक रुक कर थूक गटक रही थी।

मेने एक उंगली उनकी चूत में डालने की कोशिश की तो दोस्तो, मेरी उंगली अंदर भी नही जा रही थी इन टाइट थी उनकी चूत। वो फिर कसमसाने लगी। मेने अपनी उंगली को चाची के मुंह में डाल कर उन्हे चूसने को कहा। चाची में चंटकर मेरी उंगली गीली की मेने धीरे से उंगली चूत में दबा दी। जैसे जैसे उंगली अंदर जा रही थी चाची तड़पती जा रही थी। मेने जल्दी जल्दी उनकी चूत फेंटना शुरू कर दिया।

चाची: आह …………………………..आह……………… ..आह ……….आह…….उई …मां …….सी …….सी ………सी….. सी ….आई ………..आऊ धीरे वरुण, जल रहा है बहुत। आह…

मैंने चाची की चूत से उंगली निकाली तो चाची उठी और मुझे चूमने लगी। वो मेरे होठों को खाए जा रही थी। उन्होंने मेरा अंडरवियर निकला तो 7 इंच लंड सलामी देता हुआ सामने आया। चाची देख कर हड़बड़ा कर पीछे हो गई। उनकी आंखे फट गई।

मैं: क्या हुआ चाची?

चाची: इतना बड़ा? मर जाऊंगी मैं। ये नही जाने वाला अंदर।
तुम्हारी एक उंगली में तो मेरी जान हलक में आ रही थी। ये गया अंदर तो जान बाहर आ जायेगी मेरी।

मैं: चाची, लंड ऐसे ही होते है। आप जो ले रही थी अबतक वो लुल्ली है। आप ही आई है मेरे पास और आप ही ने सब शुरू किया है।

मुझे कोई प्राब्लम नही है चाची। आप नही चाहती तो आप बिलकुल जा सकती है। पर आप सोच लीजिए आप असली लंड लेकर असली औरत बनना चाहती है। सुख भोगना चाहती है या जिंदगी भर वही लुल्ली से 2 बूंद डलवा कर जिंदगी काटना चाहती है।

चाची थोड़ा सोचने लगी। वो लगातार मेरे खड़े लंड को देख रही थी। मैं उनके सामने ही धीरे धीरे लंड की चमड़ी ऊपर नीचे कर रहा था। सुपाड़ा फूल रहा था।

चाची लंड देखते हुए लंबी लंबी सांसे ले रही थी। उन्होंने आगे बढ़कर लंड को छुआ और मुठ्ठी में भर लिया। लंड पूरा उनकी मुठ्ठी में नहीं आरा था। वो लंड को ऊपर नीच करके मुठ्ठ मरने लगी।

दोस्तो इतने सॉफ्ट हाथ उनके इस लग रहे थे जैसे कॉटन की कोई डॉल मेरी मुठ्ठी मार रही हो। चाची की हिचक कुछ काम हुई और वो तेज़ तेज़ लंड हिलाने लगी।

मैं: ओह.. चाची। आह.. मजा आ गया आह. ऐसे ही।

फिर मैने चाची को लेटने का इशारा किया तो वो तुरंत लेट गई। पर अभी भी उनकी आंखों में डर दिख रहा था।

मैं: क्यों चाची, तैयार हो?

चाची: सोच कर तो यही आई थी। पर तुम्हारा वो देख कर लग रहा की ये आखरी बार न हो जाए मेरा। फट जाए मेरी और मैं ही मर जाऊं।

मैं: चाची आप तो कुंवारी लड़की के जैसे घबरा रही हो जैसे कभी कुछ किया ही न हो। डरो मत बस अब मजे लो।

मैंने अपना लंड चाची की चूत पर रखा और झटका देकर सुपारा अंदर किया तो चाची अपनी गांड बिस्तर पर पटने लगी जिससे बेड से आवास आने लगी। मैं तुरंत रुका और लंड बाहर निकाला। मेने कहा चाची मरवा दोगी आप हम दोनो को। आपकी चूत मारे न मारे हम दोनो की गांड मर जायेगी।

फिर मैने चाची को बिस्तर से उठने को बोला और गद्दे को उठाकर जमीन पर बिछा दिया। फिर चाची को गद्दे पर लिटा कर एक तकिया उनकी गांड के नीचे लगाया और उनकी पेंटी उनके मुंह में घुसा दी।
लंड को चूत के छेद पर दबा कर चाची के ऊपर लेट गया और उनके दोनो हाथ पकड़ कर ऊपर कर लिए। और जोर से धक्का मरा और सुपाड़ा अंदर गया ही था की चाची तड़पने लगी । मैं उनके ऊपर था इसलिए इस बार वो हिल नहीं पा रही थी। में उनके चाहे को देखा तो आंसुओ की धार लगी थी। मेने मुंह से पेंटी निकाल दी और उन्हें चूमते हुए उनके बूब्स पकड़ लिए और मसलने लगा। वो थोड़ा शांत हुई तो मैंने धक्का मारा और स्वाहा। पूरा लंड चूत के अंदर चाची की आंखे बाहर।मैने उनके मुंह में मुंह लगाए रक्खा। और धका पेल लंड ठोकता रहा। 5 मिनट बाद चाची की कमर हिलने लगी तो मैने उनके होठ छोड़े और चाची के दोनो साइड अगल बगल हाथ टिका कर लंड अंदर बढ़ करने लगा। चाची ने अपने पैरों के मेरी कमर को जकड़ लिया और आहें भर रही थी।।

मै: चाची चिल्लाना मत जोर से।

चाची: इतनी तेज चूत मार रहा है और बोलता है चिलाना मत। फट गई है मेरी चूत। इतना बड़ा लंड होता है किसी का। और ऐसे चोदा जाता है।

मैं: अभी तो डाला ही है चाची जान। अभी तो चुदाई हुई ही कहा है।
और ऐसे लंड नसीब वालियों को ही नसीब होते है। बहुत नसीब वाली हो आप।

चाची: आह ……चल अब मेरा नसीब अच्छे से जागा दे। जितना दर्द दे सकता है दे। बस खूब प्यार करो मुझे। खूब चोदो मुझे आज रात औरत बना दो।

बस फिर क्या था धक्कम धक्के चालू हो गए। 30 मिनट मेने चाची को इस ही चोदा इस बीच में चाची ने तो गंगा एक बार बहा दी थी और दूसरी बार भी बहने वाली थी और 5 6 घक्को मैं फिर उनका विसर्जन हो गया।

चाची: अब बस अब बस अब और नहीं। मर गई मेरी चूत। फूल गई है ये तो। अब नही ले पाऊंगी।

मैं: चाची, अभी 30 मिनट ही हुए है। और सिर्फ आपका हुआ है मेरा तो बाकी है।

चाची: जो भी हो। मेरी हिम्मत जवाब दे गई है अब नही हो पाएगा मुझसे और न मेरी चूत से।

मैं: ऐसे कैसे। आप की आग शांत हो गई तो में खड़े लंड पर लात मार रही।

बस इतना कह कर मैने उन्हे घोड़ी बनने को बोला। न नुकुर करते हुए जैसे ही वो घोड़ी बनी मैने फिर से उनके मुंह में उनकी पेंटी ठूस दी और उनकी दोनो टांगे पकड़ कर अपने कमर पे फसा दी। अब चाची सिर्फ अपने दोनो हाथो के बल झुकी हुई थी।

मैंने अपना लंड चूत पे रखा और एक ही शॉट में पूरा अंदर। अब उनकी आवाज निकलने का डर नहीं था तो तेज़ तेज़ कमर हिला कर लंड को जड़ तक ठोक रहा था। चाची के मुंह से गूं गूं की आवाज बस आ रही थी।

5 मिनट बाद मैंने उनके पैर छोड़ कर अच्छे से घोड़ी बनाया और लंड चूत में फसा कर चोदने लगा। 15 मिनट में चाची फिर झड़ गई। फिर चाची को साइड में करवट लेकर लिटाया और पीछे लेट कर चाची की एक टांग ऊपर उठ कर लंड चूत में डाल दिया।

दोस्तो मैं समझ गया था की चाची को चुदना तो था तभी वो मेरे पास आई थी पर मेरे बड़े लंड को पहली बार चूत में लेने से दर रही थी इसलिए मैं जान बूझ कर उन्हे कोई मौका न देते हुए जल्दी जल्दी चोद रहा था ताकि उन्हें ये डर खत्म हो जाए की इतने बड़े लंड से दर्द तो होता है लेकिन उससे ज्यादा मजा मिलता है ताकि अगले बार से वो खुल कर चुदने के लिए तयार रहे।

साइड से लगभग 10 मिनट चोदने के बाद अब मैं भी बारिश करने को तयार था। अपना सारा पानी चाची की चूत में भर दिया और एक एक बूंद अंदर ही निचोड़ कर वैसे ही पड़े हुए थे हम दोनो।

मैंने चाची के मुंह से पेंटी निकाली और उनके दूध दबाने लगा।

मैं: बोलो चाची जान, कैसी रही?

चाची: यार बहुत जबरजस्त, कसम से आज पूरी औरत होने का एहसास करा दिया तुमने। चुदाई किसे कहते है आज पता चला। क्या गजब चोदता है तू यार।

मैं: अरे चाची जान, अब तो आप जब चाहो चली आना या मुझे बुला लेना। हमारे बीच कौनसी ज्यादा दूरियां है बस 2 कदम का फासला।

हम दोनो हंसने लगे। चाची की चूत सहलाते हुए में कहा

मैं: एक बार और करोगी?
चाची: यार मन तो है की अब जिंदगी भर तेरा लंड बाहर न निकलूं चूत से, लेकिन आज इतनी बुरी तरह से चूत को कुचला है की न उसकी हिम्मत है और न मेरी।

मैंने कहा ठीक है। कल देखते है फिर।

चाची बोली देखना क्या है। मजे करेंगे। लंड चूत को दोस्ती हो गई है खूब खेलेंगे अब ये दोनो।

फिर हम दोनो थोड़ी देर लेटे रहे। 3:30 बजे चाची कपड़े पहन कर अपने बाथरूम गई फिर कमरे में चली गई। फिर तो हमारी चुदाई का सिलसिला रोज ही चल पड़ा। कभी कभी तो दिन मैं भी हमारी वासना का नंगा नाच हो जाता था।

एक दिन मेरी दूसरी चाची( सगी चाची, जो मेरे बगल वाले रूम में रहती है) ने मुझसे पूछ लिया की रात मैं क्या आवाज आती है तेरे रूम से। उसके बाद मैने चाची को क्या बताया और केसे वो भी मुझसे चुद को बेताब हुई ये सब दिए किसी का कहानी मैं बताऊंगा।

उम्मीद है आपको कहानी पसंद आई होगी। अपनी राय जरूर दें।

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