आंटी की बुर चाटी भाग-2 👅

आंटी सोफे पर अपनी सेक्सी टांगे खोल कर लेटी थी और मैं उनकी चुत पर थूक कर अपने लिंग को अंदर डालने लगा। दोस्तों आपका अपना बड़े लंड वाला दोस्त राकेश अपने सामने हाजिर है आंटी की बुर चाटी कहानी का दूसरा भाग लेकर। अगर अपने मेरी चुदाई कहानी का पहला बहग नहीं पढ़ा तो आप यहाँ क्लिक करके उसे पद सकते है (आंटी की बुर चाटी भाग 1) और दूसरे भाग का यहाँ आनंद ले।

जैसा की आपको पता है की पहले भाग में आंटी मुझे कैसे और कहा मिली। आंटी से मिलने के बाद मैंने उनकी बुर चाटी और उन्हें चोदने से पगले संतुष्ट कर दिया। अब उसके बाद की chudai ki kahani काफी ज्यादा सेक्सी होने वाली है इसलिए अपने लिंग को धीरे धीरे हिलाना दोस्तों। 

चुत की मलाई खाने के बाद मैं खड़ा हुआ और आंटी मुझे हस्ते हुए देखने लगी। मैंने आज तक कासी सारी चुदाई कहानी और sex story hindi font पढ़ी है जिसमे मर्द चुत और थूक लगा कर चोदता है। आज मुझे मौका मिला तो मैंने भी वही किया। मैंने आंटी की काली चुत पर थूका और अपने लिंग को अंदर डालने लगा। 

तभी आंटी ने मेरी छाती पर पैर रख कर मुझे रोक दिया। 

आंटी – नहीं मैं बस ओरल सेक्स करना चाहती थी अब ये ज्यादा हो रहा है बेटा !!

मैंने कहा – नहीं आंटी चुत तो मैं आपकी मारकर रहुगा। 

ये सुनकर आंटी खड़े हुई और मुझे हल्का सा धका देकर बोली ” नहीं तुमने सुना नहीं अब इतना ही काफी है मैं और नहीं करना चाहती। ”  

ये बोलकर आंटी मेरे लिंग को देखने लगी। मैं पिछले 40 मिनट तक आंटी की चुत चाट रहा था और उस दौरान मेरा लिंग अपनी लार टपका रहा था। 

बस आंटी उसी लम्बी टपकती लार को देख सेक्सी हो गई। मेरे लिंग के मुँह से लसलसी लार टपक रही थी। 

मेरा नसों से भरा कड़ा लिंग आंटी को काफी पसंद आया। उसे देख उनका मुँह बंद हो गया और वो वापस अपनी टांगे खोल कर सोफे पर लेट गई। 

आंटी की बुर चाटी और उसपर थूक कर चोदा !

उस वक्त मुझे अपने लिंग पर गर्व हुआ और मैं आगे बढ़कर आंटी की मलाईदार चुत पर थूका और अपने लिंग के टोपे को अंदर करने लगा। लिंग अंदर डाल कर मैंने आंटी की चुत का भरता बनाना शुरू कर डाला। 

लिंग अंदर जाते ही आंटी की आंखे मुझे प्यार से देखने लगी। मैं उन आँखों में अपनी आँखे डाल कर चुत में लंड डाल कर चोदने लगा। मेरा लंड सफेद मलाई दार चुत को चोद रही थी और मुझे काफी आनंद आ रहा था। 

चुत अंदर से और ज्यादा गर्म थी। चुत चोदते हुए मैंने आंटी के ब्लाउज को खोलना शुरू किया। मेरी आंखे आंटी की नरम छाती पर तिकी थी और कपकपाते हाथो से मैं उनके ब्लाउज को खोल रहा था। 

इस दौरान आंटी ने मेरे हाथो को पकड़ा और उन्हें सहलाना शुरू कर दिया। 

ब्लाउज उतारने के बाद मैंने दोनों स्तनों को ब्रा के ऊपर से खींच कर निकाला और दोनों खड़ी चूचियों को अपने होठो से चूसने लगा। 

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काली काली और कड़ी चूचिया काफी नरम और गर्म थी। मुझे दोनों को चूसने में काफी ज्यादा आनंद आ रहा था। आंटी भी काफी मजे में थी और मैं चुदाई करते हुए पुरे मजे लेने लगा। 

कभी आंटी के स्तन दबाए तो कभी चुत चोदी। आंटी का शरीर पूरा चुदाई का माल था। उनका चेहरा भी काफी सुंदर और देसी थी। चुत चोदते हुए मैं थोड़ा सा आगे बड़ा और आंटी में सर को दोनों हाथो से पकड़ कर उनके होठो को चूमने लगा। 

अपने कूल्हे हिला हिला कर मैं अपने उनके बड़े होठो को अपने होठो के बीच दबा कर चूस रहा था। 

आंटी की चुत धीरे धीर अंदर के और गीली होने लगी और अगले ही पल बस एक बड़ी सी पानी की धार निकली जिसने मेरे लिंग को चुत से बाहर निकाल फेका। 

होठो को चूसने के बाद आंटी ने अपने मुँह से अपनी जुबान निकाली और मैं उसे चूसने लगा। दोस्तों इसी तरह मुझे काफी मजा आ रहा था। मैं लगातार उनकी जुबान को अपने होठो से चूस रहा था। 

आंटी की साडी लिपस्टिक और आँखों का काजल खराब हो गया। बालो की माँ चुद गई और चुत का भोसड़ा हो गया। चुत से अपनी निकालने के बाद मैंने अपने लिंग को वापस अंदर डाला और चुत को चोद कर पूरा आनंद लेने लगा। 

धीरे धीरे आंटी की चुत में दर्द और शरीर में बेचैनी बढ़ने लगी। वो धीरे धीरे छटपटाने लगी और मैं उन्हें जकड़ कर चोदता रहा। 

आंटी को दबोच कर मैंने उन्हें काफी चोदा और अपने लिंग को आनंद दिया।  

उनका बड़ा सा गर्म शरीर मुझे काफी आनंद दे रहा था। मेरे ठन्डे हाथ गर्म हो चुके थे और लंड का पानी निकलने वाला था। 

कुछ इसी तरह आंटी को धके लगते हुए मैंने अपना एक पैर सोफे पर रखा और खड़ा होकर आंटी की चुत में अपना लिंग मारता रहा। 

मैं एक पैर सोफे पर और एक पैर जमीन पर रख कर चुत में लंड फसा कर उठक बैठक लगाने लगा। मेरा लिंग सामने की जगह मुँह नहीं कर रहा था बल्कि वो नीचे की तरफ मुँह कर के चुत के अंदर फस था। 

इसी तरह मैं बस उठक बैठक लगाता हुआ चुत को चोदता रहा और पूरा आनंद लेता हुआ आंटी के शरीर को देखता रहा। आंटी भी मुझे दिखती रही और मुझे चोदता हुआ देख आनंद लेती रही। 

मैं भी आंटी को चुदता हुआ देखता रहा और बस मेरे लंड से लस्सी निकलने वाली थी। जैसे ही मेरा लंड जरूरत से ज्यादा कड़ा हो गया तो आंटी को पता लग गया की मेरा पानी निकलने वाला है। 

उन्होंने मुझे अपनी एक टांग से धका दिया और मैं नीचे नंगा गीर गया। मैं जैसे ही अपने चूतड़ों के बल नंगे फर्श पर गिरा मेरे लंड ने अपनी लस्सी छोड़ दी। लस्सी की धार फेश पर गिरी और उसकी कुछ बुँदे चुत के ऊपर। 

मेरे चूतड़ों की हड्डी दर्द करने लगी और मैं वही नंगा बैठा आंटी को गुस्से से देखता रहा और बोला “क्या हो गया आंटी जी !!!”

आंटी खड़ी हुई और मेरे कान के पास आकर अपनी सेक्सी आवाज में बोली “बस तू इसी लायक है तेरी इतनी औकात कहा की तू मेरे अंदर अपना झाड़े ! “

उसके बाद आंटी ने मेरे कपडे पकड़े और मेरे ऊपर फेक कर कहा “चल जा अब !!” 

मैं खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहन कर आंटी के घर से निकल गया। 

बस उसी वक्त मैं आंटी का और दीवाना हो गया और मैंने अपने आप से ठान ली की अब तो मैं आंटी को जरूर चोदुँगा और उनके अंदर ही अपना झाडूगा। 

तो दोस्तों ये थी मेरी कहानी आंटी की बुर चाटी। पर आंटी ने उस दिन के बाद मेरे साथ सेक्स करने से मना कर दिया। मैं कई बार और कई कई दिन तक उनके घर के बाहर उनका इंतजार करता रहा की कब वो मुझे अंदर आने को कहेगी पर ऐसा नहीं हुआ। अगर होता तो मैं आपको अपनी देसी कहानी का तीसरा भाग भी सुनाता।

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