आशा – एक सामाजिक सोच पर आधारित वासना कहानी 🖤

मै आपका अर्जुन फिर से आया हू आपके लिए एक सच्ची कहानी लेकर।  मैं पंजाब राज्य के लुधियाना सहर से हूं। जैसा की मैने पहले भी बताया है मै एक सपा केन्द्र मे काम करता हूँ। काम के सिलसिले में मेरा क्षेत्र सीमित नही है। काम के सिलसिले में मैं चंडीगढ़, जालंधर,अमृतसर, हिसार, दिल्ली तक आता जाता रहता हूं।

मेरी उम्र सताईस साल है।

कार्य की व्यस्तता के कारण जिम तो नही जा पाता हूं परन्तु रोजाना सुबह चार बजे उठकर रनिंग करना मेरी बचपन से ही आदत रही है। मै एक सुंदर शरीर का मालिक हूँ। और दुसरो की तरह मुझसे झूठ तो बोला नही जाता की मेरे लन्ड का साइज इतना बड़ा है ये वो सब।

दोस्तो! 

मेरा लन्ड 7 इंच लम्बा ही है परन्तु मोटाई मे कुछ ज्यादा ही है।

मेरी पिछली कहानी को लेकर आप सभी के मेल व सुझाव मुझे मिले। मेरी Hindi Sex Stories को इतना प्यार और पसंद करने के लिए आप सभी पाठकों का धन्यवाद।

आज मेरी कहानी उत्तेजित न होकर एक सामाजिक और  सत्य घटना को लेकर है।  आप सभी से निवेदन है कहानी को जरूर पढ़ियेगा और अपने विचार दीजियेगा। क्योंकि इस सत्य घटना को आप लोगो के बीच लाना मेरे लिए आज की सामाजिक दृष्टि को देखना और आप लोगो की विचार धारा पढ़ना मेरा उद्देश्य है।

अगर आप सिर्फ रोमांचक नजरिये से कहानी पढ़ते है तो शायद आपको मेरी ये कहानी पसंद ना आये उसके लिए क्षमा!

तो चलिए आरम्भ करते हैं:-

एक दिन मैं ऐसे ही स्पा सेंटर पर अकेला था तो मुझे एक कस्टमर की कॉल आयी और मसाज के लिए घर आने का आर्डर दिया।

वो एक 55 साल की बूढ़ी औरत का  था वो मुझे बाद में पता चला।

दोस्तो उसकी आवाज से मुझे बिल्कुल ये नही लगा कि वो इस उम्र की औरत होगी उनकी आवाज में दर्द था, रूखापन था परन्तु उम्र दिखने जैसा कुछ नही था।

खैर मुझे इन सब से लेना भी क्या होता है मसाज करना मेरी आजीविका का साधन है।

इसी से मेरा घर खर्च चलता है।

लेकिन मेरे अंदर भी सिर्फ  आजीविका के बारे में सोचना जैसी सोच से अलग है ये मुझे बाद में पता चला।

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आपको भी शायद कहानी के अंत मे ऐसा कुछ अनुभव हो मेरे बारे में।

कोरोना काल मे अब लोग स्पा-सेंटर पर आने से घबरा भी रहे हैं सो काम नाममात्र ही आता है जितने भी आर्डर आते हैं वो सब घर डिलीवरी के आते हैं।

आप यकीन मानिए कोरोना की वजह से सम्भोग Antarvasna का बहुत ज्यादा उदय हुआ है। लोगो का ध्यान कार्य से हट गया और फ्री रहते हुए कुछ ज्यादा सोच ही नही पा रहे।

आर्डर आता हैं मसाज का परन्तु करना कुछ और ही पड़ जाता है वहाँ जाकर।

खैर कहानी पर आते हैं

मैंने बाइक उठायी और बताये गए पते पर किट लेकर पहुंचा।

उसके घर मे कोई नही था बिल्कुल शांत उसने गेट खोला।

वो एक सामान्य औरत थी।

अधिकांश बाल सफेद हो चुके थे चेहरे पर झुर्रियां साफ नजर आ रही थी मतलब अगर आपके नजरिये से बोलू तो उसमें हॉट कुछ नही था परंतु मुझे तो अपना काम करना था।

हम अंदर गए तो उसने मुझे सोफे पर बैठने को बोला और मेरे लिए पानी लेकर आई। उसका नाम आशा (काल्पनिक) था। कुछ देर हमने बैठकर इधर उधर की  बातें की और बातो ही बातों में उसने बताया कि वो अकेली रहती हैं उसकी एक सन्तान थी वो एक दुर्घटना में…

सॉरी बस इस से ज्यादा मुझसे भी नही बताया जा रहा।

मतलब मैं सही बताऊ तो उस समय मैं बहुत ज्यादा इमोशनल हो गया था और भूल गया था कि मैं यहाँ किसलिए आया हूं।

उसके पति दो साल पहले स्वर्ग सिधार गए थे। वो बहुत ही दर्द में अपनी जिंदगी जी रही है परंतु आज उसकी जिंदगी में थोड़ी बहुत खुशियां है मेरी वजह से और मेरे लिए यह फक्र की बात है कि मैं उसकी खुशियों का कारण हूं।

मैंने आंटी को दिलासा दी, उनको समझाया और किसी भी समय कोई जरूरत हो तो अपने बेटे की तरह समझकर बुला लेना। इस तरह मैंने उनके साथ चाय भी पी और उठकर चलने की आज्ञा मांगी।

सच बताऊ दोस्तो इस हालत में अगर कोई भी हवस या फिर और नजरो से देखे तो मैं उसको जानवर ही मानूँगा चूंकि मेरा काम मसाज का था इसलिए मेरे जमीर ने मुझको उनकी मसाज करने को भी अंदर ही अंदर मना कर दिया था।

और मैं ऐसा कतई नही सोचता कि इसकी उम्र इतनी है ऐसी क्या जरूरत पड़ी है इसको मसाज वगैरा की।

देखिये मसाज से तनाव दूर होता है और रिलैक्स अनुभव होता है। और ये सब अनुभव करना हर उम्र में अच्छा लगता है। मेरी भावनाओ को समझते हुए वो मुझे रोक ना पायी और मुझे जाते हुए देखती रही।

उनका नम्बर मैने सेव कर लिया था। मैं जब भी फ्री होता उनको कॉल कर लेता बाते करता,उनको धक्के से हंसाने की कोशिश करता। खैर आज के जमाने मे इस व्यस्त माहौल में आप भी ऐसे किसी पुरुष या महिला की सहायता जरूर करे, खुद को व्यस्त दिखाने की कोशिश जरा भी न करें। धीरे धीरे हमारी रोज बात होने लगी उनके घर जाना मेरा आम हो गया था।

ऐसे ही 15-20 दिन गुजर जाने के बाद

एक दिन अचानक रात के समय मे उनकी कॉल आयी वो बीमार थी उनके लिए दवा लेकर आना था।

मैं रात को ही शहर के एक हस्पताल से दवा लेकर पंहुचा। उनको आराम लगने पर वापिस घर आ गया। हम पूरी तरह से घुल मिल गए थे और फिर एक दिन उन्होंने मुझे ऐसा कुछ ऐसा बताया कि मेरे पैरों तले से जमीन निकल गयी।

हालांकि उनकी बात में सच्चाई थी जो समाज आज भी नही समझ पाता।

उन्होंने मुझसे बताया कि वो स्ट्रेस में रहती है और उनका कोई भी नही है जिसके साथ वो कुछ पल बीता सके अपना दुख बांट सके इसलिए मैंने तुमको उस दिन बुलाया था ताकि मसाज के बहाने तुमसे मिल सकू और तुम्हारे बारे में जान संकू जैसा कि तुम्हारे बारे में सुना है। 

तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो बेटा अर्जुन!

तुम मेरे बारे में सब जान चुके हो ।

आज मैं तुमको बोल रही हूं शायद तुम्हे गलत लगे परन्तु सच ये की मुझे भी वासना होती है।

कुछ देर चुप रहकर और एक लंबी सांस लेते हुए बोली

अर्जुन, क्या तुम मेरे साथ सम्भोग कर सकते हो?

कुछ देर के लिए मैं सुन्न हो गया सुनकर

 क्या सोचता था मैं इनके बारे में ,क्या समझकर इज्जत करता था मैं इनकी और आज मुझको क्या बोल दिया इन्होंने।

3-4 दिन ऐसे ही निकल गए सोचते सोचते उनका भी कोई कॉल नही आया।

एक दिन मैने खुद ने सोचा कि वो अपनी जगह सही है उनकी भी इच्छा होना लाजमी है क्योंकि वो भी एक औरत है और सामाजिक डर के कारण घुट घुट के जीने को मजबूर है।

मैंने कॉल करके उनको सहमति दे दी और रात को मिलने के लिए बोल दिया।

मैं रात को उनके घर पहुंचा ।

वो रोज की तरह नार्मल दिखाई दे रही थी कुछ भी नया नही था वो ही दुखी चेहरा बस बेबस थी तो शायद शारीरिक जरूरत से।

हमने कुछ देर नार्मल बातें ही की। दोनों में से हिम्मत किसी मे नही थी सुरुआत करने की।

उन्होंने लाइट ऑफ कर दी और धीरे से हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और गले लग गयी।

कुछ देर हम ऐसे ही पड़े रहे मैने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनको आंखों में देखकर धीरे धीरे किस करना सुरु कर दिया।

वो किस करते हुए मेरा पूरा साथ दे रही थी।

उनके बूढ़ी त्वचा के होंठ अलग ही मजा दे रहे थें।

दोस्तो प्लीज आप मुझको गलत मत समझना मैं उनकी जरूरत के हिसाब से ठीक था।

कुछ रोमांचक शब्द मै आप लोगो के लिए कहानी को रोमांटिक करने के लिए जोड़ रहा हूं क्योंकि इस समय मेरे जहन में मजा जैसे कुछ नही था मैं सिर्फ एक इंसान होने के नाते और अपने समाज की घटिया सोच होने के कारण उनका अकेलापन दूर करने में भरपूर साथ दे रहा था।

अब मै ये साथ सभी ऐसी महिलाओं का देता हूं जो सामाजिक डर के कारण अपनी जरूरत को दबाये रहती हैं।

खासकर विधवा औरतें व बूढी हो चुकी औरतें जिनका पति उनकी सतुंष्ट करने में सक्षम नही होता और उनकी इच्छा अभी भी जागृत होती है।

जिन्हें किसी की जरूरत महसूस होती हो और जो इस सामाजिक सोच से दूर हो।

ये उनका हक है जिसे समाज अपनी दिखावटी इज्जत के कारण उनको इस से वंचित रखने की कोसिश करता है

खासकर बेचारी और असहाय विधवा औरतें।

खैर हम दोनों सम्भोग की दुनिया मे डूबे हुए एक दूसरे को खा जाने की तरह किस कर रहे थे।

उसने अपनी शर्ट निकाल दी और ढ़ीले पड़े बूब्स पर मेरा मुह लगा दिया।

उम्र ज्यादा और चुचिया छोटी होने के कारण वो ब्रा नही डालती।

मैं उनके बूब्स को पीने के साथ साथ उनकी सलवार में हाथ डालकर उंगली योनि में अंदर बाहर कर रहा था।

सेक्स ना करने के कारण उनको हल्का दर्द भी हो रहा था।

उनकी योनि बड़े बड़े बालों से घिरी पड़ी थी।

हमने सम्भोग के दौरान लाइट ऑन नही की थी।

15-20 मिनट चुम्मा चाटि स्मूचिंग करने के बाद मैंने उनको लंड मुँह में लेने को बोला क्योकि मै उनको किसी भी सुख से वंचित नही रखना चाहता था।

पर उन्होंने ये सब करने से मना कर दिया क्योंकि उनको इसकी आदत नही थी परंतु बाद में धीरे धीरे वो इसको अब वो गपा गपा पूरा अंदर लेती है मुँह में पूरा का पूरा।

मैं सलवार को निकालकर उनकी योनि को चाटने लगा।

उनकी योनि रस से इतनी लबा लब भरी थी कि जब जीभ को योनि से दूर ले जाता तो कामरस व बालों की मिली जुली धारा दूर तक बनती।

5 मिनट में उनकी योनि ने पानी छोड़ दिया जिसे मैंने पूरा पी लिया।

थोड़ी देर किस के बाद उनकी कामेच्छा दोबारा से जागने लगी और अब वो सम्भोग चाहती थी।

मैने लन्ड को योनि पर सेट किया औऱ हल्का सा धक्का दिया उनकी थोड़ा सा दर्द हुआ जिसको वो आराम से झेल गयी।

थोड़ी से किस करने के बाद मैंने एक दम से पूरा लन्ड योनि में डाल दिया उनकी आंखों से दर्द साफ झलक रहा था परंतु साथ ही संतुष्टि की भाव भी।

उन्होंने मेरे लन्ड की मोटाई की तारीफ की।

धीरे धीरे मैने धक्के लगाना स्टार्ट कर दिया ।

कुछ देर बाद हम सम्भोग में बिल्कुल खो चुके थे।

मै कभी उनके स्तन तो कब उनके होंठो को चूस रहा था।

योनि के पानी के कारण धक्कों के साथ योनि और बालों की सयुंक्त ध्वनी छप्पप छप्प छप्पपप्प… आ रही थी।

कुछ देर बाद वो झुक गयी। 

इस स्टाइल में मैने जब लंड को उनको योनि पर रखा तो लंड मोटा होने की वजह से उसकी योनि में परर्रर्रर्रर…. की आवाज के साथ घुसा।

मैंने उनको इस स्टाइल में पूरे दम से चोदा।

मेरे टट्टे पट-पट की आवाज कर रहे थे।

ऐसे ही 15 मिनट की चुदाई के बाद मैंने उनकी योनि को अपने कामरस से भर दिया।

ऐसे कुछ देर हम एक दूसरे के साथ लेटे रहे।

थोड़ी देर बाद वो मुझसे गले लगकर रोने लगे गयी और उनको समझाते हुए मेरा भी गला भर आये और हम दोनों ही आंखों में पानी लिये एक दूसरे के गले लगकर सो गये।…

दोस्तो ये मेरी सच्ची कहानी है

हम आज भी बाते करते है मिलते है सम्भोग करते हैं और उनको मेरे काम से भी कोई दिक्कत नही है।

उनको पता मैं और असहाय औरतों के साथ भी सम्भोग कर लेता हूं परन्तु वो एक अच्छी आदर्श महिला की सोचते हुए  उन असहाय और मजबूर महिलाओं के साथ मेरा सम्भोग करना जायज मानती है।

प्लीज आप भी मुझे समाज की तरह गलत मत समझना या गलत नजरो से मत देखना ।

मैं इसे एक सही कार्य मानता हूं क्योंकि वो एक दुखी और असहाय औरत मेरी वजह से आज पूरी तो नही कहूंगा पर थोड़ा बहुत खुश है।

मेरे इस मानवता कार्य पर आपके सुझावों का मुझे ईन्तजार रहेगा प्लीज आपकी राय जरूर दीजियेगा और अगर आप एक स्त्री है तो आप एक स्त्री होने के नाते मेरी इस सामाजिक पहल और मेरी इस सोच को जांचकर दो शब्द जरूर भेजना मेल में।

[email protected] com

धन्यवाद।

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