अपनी माँ को चोदा

दिल्ली का जवान लड़का विजय करता है अपनी सगी माँ के साथ अपमान जनक हरकत। पर माँ उम्र में बड़ी है तो क्या हुआ दिमाग से तो जवान है। विजय ने बताया की उसकी माँ को सेक्स का काफी शोक था जिसकी वजह से वो दोनों यौन-क्रिया कर बैठे। विजय ने apni maa ko choda और हमें ये सीख दी की हमेशा आदमी की ही नहीं औरतों की भी नियत खराब होती है।

मैं ऑफिस में काम करता था। मेरी शादी भी नहीं हो रही थी क्यों की मैं मोटा था और मेरा रंग भी काला। पर जब मेने रसोई में अपनी माँ को चोदा तो उस दिन मेरी हवस मिट गई। अपनी सगी माँ के साथ सेक्स करके मुझे काफी अच्छा लगा और मेने शादी के बारे में सोचना छोड़ दिया। 

उस दिन मैं ऑफिस में था और छुप छुप कर अपने फ़ोन में गन्दी फिल्मे देख रहा था। उस वक्त मेरी कामवासना जाग उठी थी और मैं काम छोड़ कर चुदाई वाली फिल्मे देख कर अपना लिंग टेबल के नीचे से सहला रहा था।

मैंने खुद को यौन चरमोत्कर्ष पर नहीं पहुंचाया क्यों की मुझे अपनी पैंट गन्दी नहीं करनी थी। जब छूटी हुई तो मैं घर चला गया। 

मेरे साथ सिर्फ माँ ही रहती थी और पिता कब की चल बेस थे। एक बड़ा भाई था जो अलग रहता था। 

माँ ने मेरा स्वागत किया और रत के करीब 9 बजे वो मेरे लिए खाना बनाने लगी। उस वक्त मैं अभी भी कामुक था और मेरे लिंग से रास की बूंदे टपक रही थी।

तभी मैं अपनी वासना से भरी आँखों से अपनी माँ को देखने लगा। माँ ने रात की क़मीज़(nighty) पहनी थी और उनके कंधे से मुझे उनकी ब्रा दिख रही थी। बस वही से एक माँ और बेटे की सेक्स कहानी शुरू हो गई। 

मैं उनके बस गया और पूछे से उनकी गर्दन देखने लगा। माँ जब भी रोटी बेलती उनके स्तन हिलते और मेरे लिंग को और मोटा करते। माँ की गोरी गर्दन और स्तनों के बीच की लाइन देख मेरी कामुकता सर चढ़ कर नाचने लगी। 

मेने कहा – माँ तुम खाना बनाओ मैं तुम्हारे कंधे दबाता हूँ। तुम भी काफी थकी लग रही हो। 

माँ – अरे वह क्या बात है आज इतना प्यार क्यों ?

मेने उसके सवाल का जवाब एक मुस्कान से दे दिया और उनके कंधे दबाने लगा। दबाते दबाते मैं उन्हें गंदे तरीके से छूने की कोशिश करने लगा। मेने अपना हाथ उनकी कमर पर रखा और उन्हें चुदाई के इरादे से देखता रहा। देखते देखते मैं यहाँ वह की बाते भी करता रहा तभी उनका ध्यान मेरे हाथो पर ना जाये। 

पर उन्हें सब पता था वो भी मेरी हिमत जांच रही थी। उन्होंने मुझे तिरछी आँखों से देखा और मेरे दोनों हाथ ले कर अपने स्तनों पर धर दिए और कहा अब करो अच्छे से। 

मेने कहा (गहरी साँस लेते हुए) – माँ ?? 

माँ (मुस्कुराते हुए) – मैं भी तुम्हे वैसे देखती हूँ कभी कभी जैसे तुम। 

मन कहा (अनजान बनते हुए) – मैं कुछ समझा नहीं।  

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माँ ने मेरे हाथो से अपने स्तन मसलना शुरू कर दिया और मेरी अन्तर्वासना की वजह से मैं उन्हें रोक न सका।

माँ ने गैस बंद किया और पीछे मूड कर मुझे चूमा शुरू कर दिया और मेने भी उस वक्त का आनंद लेना शुरू कर दिया। माँ के नरम होठ महसूस करके मेरा लिंग पूरा तन गया। 

जब माँ को मेरा लिंग दिखा तो उन्होंने मेरी पैंट में हाथ डाला और उसे प्यार से सहलाने लगी। अपनी माँ की चुदाई करने के लिए मैं पूरा उत्साहित था। 

मेने रसोई में माँ को उल्टा करके झुकाया और उनकी nighty ऊपर करके उनकी गांड में मुँह देने लगा। उनकी गांड चुत का छेद गिला करने के बाद मेने अपना लिंग निकाला और माँ को उसपर थूकने को कहा। 

माँ ने तीन से चार बार थूका और मेरा लिंग उनके अंदर जाने को तैयार हो गया। मेने माँ की कमर हाथ से झुकाई और उनकी गांड ऊपर कर के चोदने लगा। 

माँ – अहह ! काफी बड़ा है तुम्हारा बेटा अभी थोड़ा आराम से करो। 

मेने चुदाई करते हुए उनकी nighty में हाथ डाला और उनकी दोनों चूचियां दबाते हुए नीचे की ओर खींचता रहा।

माँ – अह्ह्ह बेटा! मेरे दूध न दबाओ इस तरह दर्द होता है काफी।    

माँ के साथ ये सब करते मुझे शर्म आने लगी थी पर उनकी काली चुत ने मेरे लिंग पर जादू सा कर रखा था। 

मैं उन्हें उनकी चुदाई करता रहा और उनकी चुत से रसीले पानी की छींटे निकलती रही। मेरे हाथ उनकी बड़े बड़े दूधो से हट नहीं रहे थे। 

और मेरा लिंग उनकी चुत से निकलना नही चाहता था। माँ को भी ऊपर आनंद आने लगा तो उन्होंने अपने सारे कपडे उतार दिए। 

और मैं उन्हें रसोई में चोदने लगा। माँ के दोनों स्तन मेरे धको से हिले जा रहे थे और जब वो आपस में टकराते तो जोर से झापड़ की आवाज अति। 

चुदाई करते करते हम दोनों पसीने पसीने हो गए। मेने माँ के बाल खींचे और उन्हें ऊपर उठा लिया। 

मेने एक हाथ आगे किया और उनके स्तनों के बीच से लेजा कर उनकी गर्दन पकड़ ली और उन्हें तेज धके मारता रहा। 

माँ की रास दार गांड पर जोर जोर से मेरी कमर की मर ने उनकी गांड लाल कर दी। माँ की गांड पिटाई में मुझे अंतहीन आनंद आने लगा और मैं उन्हें किसी रंडी की तरह मारते मारते चोदता रहा।

माँ को दर्द से भरी चुदाई का मजा आने लगा और हम सेक्स करते रहे।

कभी मैं उनकी गांड में लंड देता तो कभी चुत दोनों छेदो का अपना ही मजा था।

मैं उनकी गहराइयों में कही खो गया और वो मेरे लंड की चोटी के मजे लेती रही। उनके और तेज चिलाने से मेरा शरीर कापने लगा और मेने अपना चरम सुख हासिल कर लिया। 

माँ की चुत में अपना माल डालने के बाद में रुक गया और अपना लिंग नही निकला। माँ के गंदे छेदो से मेरा मन नही भरा पर लिंग तना न होने की वजह से मैं कुछ नही कर सका। 

माँ – बस हो गया बेटा ? आज कल कल के लड़को में दम नहीं है थोड़ा घी खाया खरो ताकत आती है। 

मेने अपनी माँ को चोदा और नहाने चला गया उसके बाद माँ ने खाना बनाया और हम खाने लगे। 

ये थी मेरी हिंदी सेक्स कहानी। उसके बाद हमने कई बार चुदाई की और आज भी करते है। मेने कई बार maa ko jabardasti choda और उनको मेरा मर्दाना अंदाज पसंद आने लगा। अगर मेने आपको जरा भी कामुक सुख दिया तो कमेंट में जरूर बताना।  

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