अब लॉकडाउन में चुदाई बर्दाश्त नहीं होती

दिल्ली की ये कहानी कुसुम द्वारा भेजी गई है। कुसुम ने अपनी कहानी में बताया की उनका पति लॉकडाउन में भी पैसा कमाने घर से बाहर जाते थे ताकि घर सही से चला सके। पर कुसुम का ससुर अपनी बीवी के साथ रोज सेक्स करता था। कुसुम के ससुर की एक किराने की दुकान थी जिसके बंद हो जाने की वजह से घर बैठा ससुर रोज सास के साथ सेक्स करने लगा। अब रोज रोज की चुदाई से सास परशान हो गई और अपना दुखड़ा बहू के सामने रोने लगी। अब लॉकडाउन में चुदाई बर्दाश्त नहीं होती कहानी में कैसे कुसुम का ससुर जबरदस्त तरीके से उसकी सास की पिलाई करता था ये तो कहानी पढ़ कर ही पता लगेगा। 

मेरा पति अपने दफ्तर रोज जाता था ताकि थोड़े पैसे कमा सके। लॉकडाउन के कारण हमारे घर में काफी दिकते चल रही थी। ऊपर से मेरे ससुर की किराने की दुकान भी बंद हो गई। 

घर बैठा ससुर कुछ काम नहीं कर रहा था तभी लॉकडाउन के एक महीने बाद उसने सासु माँ की चुदाई शुरू कर दी। जब मेरा पति घर से बाहर होता था तो ससुर माता जी को अपने कमरे में लेजाते और उनका पूरा बदन हिला डालते।

एक दिन सासु माँ काफी परशान दिख रही थी तो मैंने उनसे पूछा की क्या बात है तो उन्होंने कहा। क्या करू बहू तेरे ससुर जी !!!

उनकी कमर का दर्द और परेशानी देख मैं समझ गई थी की सासु माँ की आज कल रोज रोज चुदाई हो रही है। 

मैंने कहा – आप सीधे सीधे मना क्यों नहीं कर देती ?

सासु माँ – अरे तुझे नहीं पता यो कैसे है !! मुझे तो बस इस बात की चिंता है की अब इस उम्र में बच्चा हो गया तो मैं क्या करुँगी !!

सासु माँ की गांड का दर्द और बच्चे की परेशानी देख मैंने दिमाग चलाया और अपने ब्लाउज से कंडोम निकाल कर सासु माँ के हाथ में रख दिया। 

सासु माँ – यो के है गुब्बारा सा छोरी ?? 

मैंने कहा – अरे यही तो है जो आज कल के जवान छोरा छोरी इस्तेमाल करते है !!

सासु माँ – के मतलब ??

मैंने कहा – इसे मर्द लोग अपने वहा लगाते है जिस से बच्चा नहीं होता। 

सासु माँ – अच्छा ये वो है इसका तो मैंने टीवी पर विज्ञापन देखा है। पर ये तेरे ब्लाउज में ??

मैं शर्मा कर बोली लाडू के पापा भी बिलकुल ससुर जी पर गए है। इसके बाद सास माँ खुश हो गई पर फिर भी उनके मुँह पर मायूसी थी क्यों की गांड की चुदाई तो फिर भी करवानी ही पड़ेगी ना। 

ससुरजी दिन में चुदाई करते थे ताकि लाडू के पापा को पता न चले। इसलिए रात को सासु माँ कमर और गांड पर बाम लगा कर सो जाती थी ताकि कल की चुदाई सहन कर सके। 

मैं रात को यही सोच सोच कर कामुक होने लगी की ससुर जी आखिर केसी चुदाई करते होंगे जो सासु माँ इतनी टूटी हुई है। मेरे ससुर जी काफी पतले थे और सासु माँ का बदन भरा हुआ। 

मैं यही सोचते हुआ सो गई और अगले दिन जब उठी तो लाडू के पापा को काम पे भेजने के बाद मैंने सोचा की आज सासु माँ और ससुर जी की चुदाई देखूँगी। 

लाडू के पापा के जाते ही ससुर जी अपने काम पर जग गए। उस वक्त सासु माँ मेरे साथ चाय पी रही थी और उन्होंने सासु माँ को ऊपर आने को कहा। 

ससुर जी की आवाज सुन कर सासु माँ का मुँह ऐसा हो गया जैसे मैंने उन्हें कड़वी चाय दी हो। 

वो धीरे से उठी और मैंने उन्हें पूरा कंडोम का ढाबा दे दिया। उसके बाद वो ऊपर चली गई। 

कुछ 5 मिनट के बाद मैं भी ऊपर चली गई और कमरे की खिड़की से देखने लगी। 

ससुर जी ने सासु माँ को कमर से पकड़ा और उन्हें गन्दी तरह होठो पर चूमने लगे। चूमते हुअए वो उनकी साड़ी और ब्लाउज उतारने लगे। इस उम्र में इतना जोश और प्यार देख मैं हैरान होगा गई। 

ससुर जी ने सासु माँ के स्तन दबाना शुरू कर दिया और सासु माँ का एक हाथ पकड़ कर अपनी धोती में डाल दिया। सासु माँ उन्ही कुश करने के लिए अपनी गांड तो चुदवा रही थी और उन्ही उसमे कोई मजा नहीं आ रहा था। 

ससुर जी इस उम्र में किसी जवान लड़के जैसे हवसी हो रही थी। उन्होंने जल्दी से सासु माँ की साड़ी खोली और उन्हें बिस्तर पर पैर खोल कर लेटा दिया। 

सासु माँ – रुको ये(कंडोम) अपने लिंग पर लगा लो !

ससुर जी – यो के है ??

सासु माँ – इस से बच्चा रुकता है !!

ससुर जी – तो के होया ?? यो प्लास्टिक लगाने से मजा किरकिरा हो जावेगा तने न पता ?

ससुर जी ने कंडोम लिया और उसे कमरे के किसी कोने मी फेक दिया। ये देख सासु माँ का रोने वाला मुँह बन गया और मैं अपनी हसी नहीं रोक पा रही थी। 

इसके बाद ससुर जी ने अपनी धोती खोली और सासु माँ की काली चुत में अपना बुजुर्ग लिंग घुसा दिया। 

अपने ढीले लिंग से ससुर जी कैसे और कितनी देर चुदाई करते है यही मैं देखना चाहती थी। 

सास ससुर की देसी चुदाई देख मैं भी कामुक होने लगी और यौन सुख के लिए वही खड़ी अपनी चुत में ऊँगली करने लगी। 

पीछे से मैंने देखा ससुर जी अपनी पतली गांड हिला हिला कर सासु माँ की मोटी गांड चोद रही है। वो कभी उनकी चुत उंगलिओ से रगड़ रही थे तो कभी लंड से। कुछ देर में ही सासु माँ को भी चुदाई का मजा आने लगा और वो भी आवाजे करने लगी। 

सासु माँ – अहह अहह ओ जी थोड़ा धीरे को इस उम्र में इतने झटके सहन नहीं होते !

ससुर जी – अहह क्यों री जवानी में तो बड़ा उछलती थी अब के होअय चुत में जंग लग गया के ??

सासु माँ – अहह न न कमर दर्द हो जाती है !!

ससुर जी को चुत थोड़ी से गीली होती क्या दिखी वो वहा मुँह मारने लगे। चुदाई का जोश सासु माँ को भी चढ़ा था इसलिए वो अपने स्तन खुद ही चूसने लगी। 

ससुर जी ने उनके चूतड़ों को हाथो से पकड़ क्र ऊपर उठाया और योनी में लिंग डाल कर जोरदार चटके मरने लगे। सासु माँ दर्द से चिलाने लगी तो ससुर जी और जल्दी दखके लगाने लगे। 

इतनी जबरदस्त चुदाई देख मेरा चुदने का दिल कने लगा। क्यों की मैं पीछे खड़ी थी मुझे ससुर जी के लटके अखरोट आगे पीछे झूलते दिकने लगे। 

कमरे के अंदर चुदाई का मौसम बना हुआ था और मैं इतनी धुप में खड़ी अपनी योनी में ऊँगली कर रही थी। तभी ससुर जी आगे झुके और सासु माँ के दोनों स्तनों को बारी बारी से चूसने लगे। 

ससुर जी के मुँह के चुसो से सासु माँ के स्तन बड़े हो गए थी। उस दौरान उनकी दोनों चूची भी खड़ी होगा गई थी। ससुर जी अपने पतले शरीर से एक भरी फूली औरत की चुदाई करने में लगे थे। मैंने सुना था औरतो की छाती जितनी भरी हो मर्दो को उतना आनंद आता है। 

मेरी सासु माँ की छाती 38 की थी और कमर 31 साथ ही गांड 40 की। धीरे धीरे मुझे समझ आ गया की ससुर जी अभी भी सासु माँ की चुदाई क्यों करते है। 

खेर बिस्तर पर चुदाई के बाद ससुर जी ने ससुर माँ को खड़ा किया और उन्हें घोड़ी बना कर दिवार की तरफ मुँह कर के खड़ा कर दिया। 

सासु माँ ने दोनों हाथो से दिवार का सहारा लिया और ससुर जी के लोडे का दर्द बर्दाश करने लगी। पीछे से ससुर जी जानवर की तरह सासु माँ की मोटी गांड चोद रहे थे। 

चुदाई करते करते उन्होंने अपने हाथ आगे किये और सासु माँ के मोटे स्तनों को उलटे सीधे तरीको से दबाने लगे। वो जिस मर्दाना तरीके से उनके स्तन मसल रही थे ये देख मैं और कामुक हो गई। उन्हें देखते हुए मैं अपनी चुत में ऊँगली तो कर ही रभी थे साथ नई नीचे से ब्लाउज में हाथ डाल कर अपने स्तन भी जोर से दबाने और नोचे लगी। 

मैंने ऐसी  देसी चुदाई पहले कभी नहीं देखी थी। उनकी चुदाई देख मुझे पता लगा की मैं और मेरा पति तो करते है वो तो कुछ भी नहीं है। 

चुदाई करते करते ससुर जी सासु माँ की पीठ चाटने लगे और उनकी चुसनी मरोड़ते रहे। 

कुछ देर बाद और चुदाई करने की बाद उन्होंने उनकी गांड में ही अपना पानी झाड़ दिया। गांड में माल जाते ही जैसे सासु माँ कुश हो गई की चलो कम से कम चुत में तो नहीं झाड़ा। उसके बाद ससुर जी वही नंगे सो गए और सासु माँ नहाने के लिए जाने लगी। 

मैं वहा से जल्दी से भाग कर नीचे गई और ऐसे नाटक करने लगी की जैसे मैं तब की वही बैठी टीवी देख रही थी। 

तो बस ये थी मेरी लॉकडाउन में चुदाई की कहानी अब लॉकडाउन में चुदाई बर्दाश्त नहीं होती। अंत में कुछ बदला नहीं न ही सासु माँ की चुदाई रुकी। ससुर जी ने कंडोम लगाने से इंकार कर दिया और रोज उनकी चुदाई करते है। लॉकडाउन और पता नहीं कितना लम्बा होने वाला है यही सासु माँ सोच सोच कर परेशान रहती है। क्यों की जब तक लॉकडाउन चलेगा तब तब सासु माँ की गांड ससुर जी अपने लंड से पीटेंगे।